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बढ़ते तापमान का जल संरक्षण पर गंभीर प्रभाव: सीएसई

PTI

- March,23 2022 3:35 PM IST

22 मार्च (भाषा) ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत में भारत के बड़े हिस्से में तेज गर्मी महसूस होना इस बात का सबूत है कि यह जलवायु परिवर्तन का युग है और इसका जल संरक्षण पर गंभीर प्रभाव पड़ सकता है। विज्ञान एवं पर्यावरण केंद्र (सीएसई) ने मंगलवार को यह बात कही।

विश्व जल दिवस के अवसर पर सीएसई की महानिदेशक सुनीता नारायण ने कहा कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव जल और उसके प्रबंधन पर पड़ेगा।

उन्होंने कहा, '' ग्रीष्म ऋतु की शुरुआत में ही भारत के बड़े हिस्से को चपेट में लेने वाली इस तीव्र गर्मी की लहर का वास्तव में क्या मतलब है? विशेष रूप से आज विश्व जल दिवस के अवसर पर इसका मतलब है कि यह जलवायु परिवर्तन का युग है। इसका मतलब यह भी है कि हम कैसे आने वाले दिनों में हमारे पानी का प्रबंधन करेंगे और यह ही तय करेगा कि हम ऐसी चरम जलवायु परिस्थितियों से बचे रहेंगे या नहीं।''

नारायण ने कहा, ''हम सभी जानते हैं कि जलवायु परिवर्तन का प्रभाव बढ़ी हुई गर्मी, बढ़ते तापमान और अत्यधिक बारिश व इसके समय में बदलाव के बारे में है। दोनों का जलचक्र के साथ सीधा संबंध है। इसलिए जलवायु परिवर्तन को काबू करने का संबंध पानी और उसके प्रबंधन को लेकर भी होना चाहिए।''

सीएसई के जलवायु परिवर्तन इकाई की उप कार्यक्रम प्रबंधक अवंतिका गोस्वामी ने कहा कि भारत में 2021 की स्थिति दोहराई जा रही है, जब फरवरी की शुरुआत में देश के कुछ हिस्सों में तापमान 40 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच गया था।

गोस्वामी ने कहा, ''यह तब था जब 2021 'ला नीना' का साल था, ये प्रशांत जल धाराएं वैश्विक स्तर पर तापमान को कम करने के लिए जानी जाती हैं। भारतीय मौसम वैज्ञानिकों ने सूचित किया है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि ने 'ला नीना' के इस शीतलन प्रभाव को बेहद कम कर दिया है।''

भाषा शफीक मनीषा

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