मध्यप्रदेश उच्च न्यायालय ने इंदौर में यातायात व्यवस्था की बदहाली पर राज्य सरकार की खिंचाई करते हुए तीन आला अफसरों को 20 सितंबर को अदालत में खुद हाजिर रहने का आदेश दिया है।
उच्च न्यायालय की इंदौर पीठ के न्यायमूर्ति शांतनु केमकर और न्यायमूर्ति प्रकाश श्रीवास्तव ने एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए आज यह आदेश दिया।
युगल पीठ ने कहा कि ऐसा लगता है कि प्रदेश सरकार ने शहर की यातायात व्यवस्था सुधारने पर बार..बार आश्वासन देने के बावजूद कोई प्रभावी कदम नहीं उठाया हैै।
अदालत ने कहा, इन हालात में हम प्रदेश के गृह :पुलिस: विभाग के प्रमुख सचिव, अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक :योजना और प्रशासन: और इंदौर नगर निगम के आयुक्त को आदेशित करते हैं कि वे हमारे पुराने आदेश का पालन न किये जाने और दूसरे संबंधित सवालों के जवाब के लिये अगली तारीख को अदालत में खुद हाजिर रहें।
युगल पीठ ने याचिका पर अगली सुनवाई के लिये 20 सितंबर की तारीख तय की है।
याचिकाकर्ता संजय मित्तल ने 20 जुलाई 2010 को निकाली गयी एक राजनीतिक रैली की पृष्ठभूमि में शहर में यातायात व्यवस्था की बदहाली औैर सड़कों पर कायदे..कानूनों के खुले..आम उल्लंघन की ओर अदालत का ध्यान खींचा था।
यह रैली भारतीय जनता युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष के रूप में नजदीकी राउ क्षेत्र के विधायक जीतू जिराती की ताजपोशी की खुशी में निकाली गयी थी। लेकिन इस आयोजन के लिये प्रशासन ने कोई अनुमति नहीं दी थी।
भाजपा की युवा इकाई की विशाल रैली व्यस्ततम एमजी रोड से भी गुजरी, जिस पर सक्षम मंजूरी के बगैर रैली..जुलूस निकालने पर उच्च न्यायालय ने रोक लगा रखी है। हालांकि, तय परंपरागत जुलूस इस प्रतिबंध के दायरे से बाहर हैं।