यह बात अपने आप में महत्वपूर्ण है क्योंकि पिछले साल दसियों हजार बाज शिकारियों का शिकार बन गए थे।
संरक्षण के ये कदम अमूर फाल्कन प्रोटेक्शन स्कवाड :एएफपपीएस:, एक अन्य एनजीओ नेचुरल नगाज, स्थानीय समुदाय, नगालैंड वन विभाग व वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया के द्वारा संयुक्त रूप से उठाए जा रहे हैं।
एएफपीएस शिकारियों का एक ऐसा समूह है जो अब इस पक्षी के रक्षक बन गए हैं। एएफपीएस के निर्माण से वन विभाग और ग्रामीण परिषदों को उस समझौते को प्रभावी रूप से लागू करने में मदद मिली थी, जो जलाशय के आसपास के गांवों की परिषदों, नेचुरल नगा और वाइल्डलाइफ ट्रस्ट ऑफ इंडिया ने किया था।
डब्ल्यूटीआई के क्षेत्रीय प्रमुख सुनील क्यारोंग ने कहा कि समझौते में परिषदों ने घोषणा की थी कि इस इलाके में बाजों का शिकार अवैध है और इसका उल्लंघन करने वालों पर 5 हजार रूपए का जुर्माना लगाया गया।
सूत्रों ने कहा कि इन प्रयासों के तहत वन विभाग के कर्मचारियों और एएफपीएस द्वारा दोयांग रिजर्वेयर के साथ रोजाना गश्त लगाई जाती है।