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गरीबी हटाने को 5 साल निर्णायक: प्रधानमंत्री

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राज्य सभा में बोले प्रधानमंत्री, एजेंसियों को भ्रष्टाचारियों पर कठोरतम कार्रवाई करने की खुली छूट

Last Updated- July 03, 2024 | 10:25 PM IST
pm modi

प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार के आने वाले पांच वर्ष गरीबी के खिलाफ लड़ाई के लिए निर्णायक वर्ष हैं और यह देश गरीबी के खिलाफ लड़ाई में विजयी होकर रहेगा। प्रधानमंत्री ने दावा किया कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा। जब देश दुनिया की तीसरी सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था बनेगा तो इसका प्रभाव जीवन के हर क्षेत्र पर पड़ने वाला है।’

मोदी ने कहा, ‘हम आने वाले कालखंड में नए स्टार्ट-अप, नई कंपनियों का वैश्विक उभार देख रहे हैं। हमारे शहरी और कस्बाई क्षेत्र भी ग्रोथ इंजन की बड़ी भूमिका निभाने वाले हैं।’ प्रधानमंत्री ने कहा कि चुनावी नतीजों के आने के बाद भी कुछ लोग जानबूझकर इससे अपना मुंह फेर कर बैठे रहे, कुछ लोगों को समझ नहीं आया और जिनको समझ आया, उन्होंने हो-हल्ला कर देश की जनता के इस महत्त्वपूर्ण निर्णय पर छाया करने की कोशिश की।

उन्होंने कहा, ‘मैं पिछले दो दिन से देख रहा हूं कि आखिर पराजय भी स्वीकार हो रही है और दबे मन से विजय भी स्वीकार हो रही है।’ कांग्रेस नेता जयराम रमेश पर तंज कसते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि जब से नतीजे आए हैं तब से इस सदन के एक सदस्य उनकी सरकार को ‘एक तिहाई सरकार’ बता रहे हैं। मोदी ने कहा, ‘इससे बड़ा सत्य क्या हो सकता है कि हमारे 10 साल हुए हैं, 20 और बाकी हैं। एक तिहाई हुआ है, दो तिहाई और बाकी है और इसीलिए उनकी इस भविष्यवाणी के लिए उनके मुंह में घी शक्कर।’

नीट-यूजी सहित कई प्रतियोगी परीक्षाओं के प्रश्न पत्र लीक होने के मामले में विपक्ष पर कोई सकारात्मक सुझाव देने के बजाय केवल राजनीति करने का आरोप लगाते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को राज्य सभा में देश के युवाओं को आश्वासन दिया कि ऐसे मामलों में दोषियों को सख्त से सख्त सजा दिलवाने के लिए कदम उठाए जा रहे हैं।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने भ्रष्टाचार और कालाधन के खिलाफ और कड़ी कार्रवाई करने का संकल्प लेते हुए बुधवार को कहा कि सरकार ने जांच एजेंसियों को भ्रष्टाचारियों के खिलाफ कठोरतम कार्रवाई करने की खुली छूट दे रखी है। प्रधानमंत्री ने कहा कि इस कार्रवाई में किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा। उन्होंने आम आदमी पार्टी (आप) के खिलाफ पहले सबूतों के साथ गंभीर आरोप लगाने और बाद में साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ने व गठबंधन करने के लिए कांग्रेस पर भी निशाना साधा।

मोदी ने कहा, ‘भ्रष्टाचार के खिलाफ कार्रवाई हमारे लिए मिशन है। ये हमारे लिए चुनाव में हार-जीत का विषय नहीं है। हमने 2014 में जब सरकार बनाई थी तब हमने कहा था कि हमारी सरकार गरीबों के कल्याण के लिए काम करेगी। भ्रष्टाचार के खिलाफ कड़ा प्रहार करेगी और कालेधन पर वार करेगी। भ्रष्टाचार में फंसा कोई भी व्यक्ति कानून से बच नहीं पाएगा। यह मोदी की गारंटी है।’

सरकार पर जांच एजेंसियों के दुरुपयोग के विपक्षी सदस्यों के आरोपों का जिक्र करते हुए मोदी ने दिवंगत मुलायम सिंह यादव जैसे विपक्षी नेताओं के बयानों का हवाला दिया, जिन्होंने संप्रग सरकार पर उनके खिलाफ ईडी और सीबीआई का इस्तेमाल करने के आरोप लगाए थे। प्रधानमंत्री ने उच्चतम न्यायालय की उस टिप्पणी की याद दिलाई जिसमें सीबीआई को ‘पिंजरे में बंद तोता’ बताया गया था।

उन्होंने कहा, ‘केंद्रीय जांच एजेंसियों के खिलाफ आरोप लगाए गए हैं। कहा गया है कि केंद्र सरकार जांच एजेंसियों का गलत इस्तेमाल कर रही है। उन्होंने कहा, ‘आप शराब घोटाला करती है, आप भ्रष्टाचार करती है, आप बच्चों के लिए कक्षाओं के निर्माण में घोटाला करती है, आप पानी का घोटाला भी करती है। कांग्रेस आप के खिलाफ शिकायत करती है। आप को कांग्रेस अदालत में घसीटती है और अगर कार्रवाई होती है तो वे मोदी को गाली देते हैं।’

प्रधानमंत्री ने कांग्रेस को संविधान की ‘सबसे बड़ी विरोधी’ पार्टी बताया और कहा कि इसका विरोध ही उसके जेहन में है। उन्होंने इस बात पर आपत्ति जताई कि अभिभाषण के दौरान कई विपक्षी सदस्यों ने 2024 के लोकसभा चुनाव को देश के इतिहास का पहला चुनाव बताया जिसका मुद्दा ‘संविधान की रक्षा’ था। आपातकाल को याद दिलाते हुए उन्होंने सवाल किया, ‘अभी भी यह फर्जी विमर्श चलाते रहोगे क्या? क्या आप भूल गए 1977 का चुनाव? जब अखबार बंद थे, रेडियो बंद था, बोलना भी बंद था और देशवासियों ने लोकतंत्र की पुनर्स्थापना के लिए वोट किया था।

जम्मू-कश्मीर में आतंकवाद के अंतिम चरण में पहुंच जाने का दावा करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि सरकार आतंकवाद के नेटवर्क को नेस्तनाबूद करने के लिए व्यूह रचना के साथ आगे बढ़ रही है। बीते 10 वर्षों में पहले की तुलना में आतंकवादी घटनाओं में काफी कमी आई है। प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन के दौरान 26 जनवरी को संविधान दिवस मनाए जाने के फैसले का उल्लेख करते हुए आरोप लगाया कि संविधान की प्रति हाथ में लेकर ‘घूमने वाले’ लोगों ने इसका भी विरोध किया था।

सदन में मौजूद विपक्ष के नेता मल्लिकार्जुन खरगे ने इस पर आपत्ति जताई और आसन से अपना पक्ष रखने का आग्रह किया। हालांकि सभापति जगदीप धनखड़ ने इस पर कोई ध्यान नहीं दिया। इसके बाद विपक्षी सदस्यों ने हंगामा और नारेबाजी शुरू कर दी। प्रधानमंत्री ने हंगामे के बीच ही अपना संबोधन जारी रखा। कुछ देर बाद विपक्षी सदस्य सदन से बहिर्गमन कर गए।

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First Published - July 3, 2024 | 10:25 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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