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यूपी की मंडियों में दोहरी शुल्क व्यवस्था से व्यापारी नाराज

Last Updated- December 15, 2022 | 2:26 AM IST

उत्तर प्रदेश की मंडियों में दोहरी शुल्क व्यवस्था लागू होने से नाराज व्यापारी आवाज उठाने लगे हैं। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार को बाहर की तरह मंडियों के अंदर भी शुल्क की व्यवस्था को खत्म कर देना चाहिए।
व्यापारियों ने मांग की है कि जब केंद्र सरकार ने मंडी शुल्क समाप्त करने की व्यवस्था लागू कर दी है तो प्रदेश की मंडियों के अंदर भी समाप्त करने के लिए शासनादेश जारी होना चाहिए। मंडी शुल्क की विसंगतियों को लेकर लखनऊ में व्यापारी हड़ताल कर चुके हैं, वहीं इस हते कानपुर में मंडी में जोरदार प्रदर्शन किया गया है।
गौरतलब है कि केंद्र सरकार ने हाल ही में पूरे देश में कृषक उत्पाद व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) अध्यादेश लागू किया है। इस अध्यादेश के तहत उत्तर प्रदेश में मंडियों के बाहर मंडी शुल्क समाप्त हो गया है। इस अध्यादेश के उत्तर प्रदेश में लागू होने के उपरांत उत्तर प्रदेश में गल्ला मंडियों व सब्जी मंडियों के बाहर कृषि उत्पाद की खरीद बिक्री होने पर कोई मंडी शुल्क नहीं लगेगा और न ही मंडी समितियों के कई कागजातों की लंबी प्रक्रिया से गुजरना होगा। यहां तक कि मंडियों के बाहर कृषि उत्पादों की खरीद बिक्री के लिए किसी भी तरह के लाइसेंस की जरूरत नहीं होगी । उत्तर प्रदेश में लागू नई व्यवस्था के बाद मंडी परिसर के अंदर काम करने वालों को दो फीसदी शुल्क अदा करना पड़ता है। जबकि बाहर खरीद फरोत करने पर कोई शुल्क नहीं देना पड़ रहा है। व्यापारियों का कहना है कि मंडियों के अंदर अलग और बाहर अलग व्यवस्था होने से मंडियों के अंदर का कारोबार बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। इसे लेकर कानपुर में व्यापारियों ने मंडी शुल्क की पूर्णतया समाप्ति को लेकर धरना प्रदर्शन कर स्थानीय मंत्री सतीश महाना को ज्ञापन सौंपा।
व्यापारियों का आरोप है कि इस अध्यादेश के लागू होने के उपरांत कृषि उत्पादन मंडी अधिनियम से संचालित मंडी शुल्क या यूजर चार्ज लेने वाली प्रदेश की गल्ला व सब्जी मंडियों में कृषि उत्पादों की आवक में भारी कमी आना शुरू हो गया है, यहां तक कि इन दोनों मंडियों की आवक बिल्कुल खत्म हो रही है। कानपुर गल्ला आढ़तिया संघ के महासचिव ज्ञानेश मिश्रा का कहना है बाहर मंडी शुल्क समाप्त होने व मंडियों के अंदर शुल्क लागू रहने से गल्ला व सब्जी मंडियों में कारोबार न के बराबर रह गया है।  सरकार को इस दोहरी व्यवस्था को तुरंत समाप्त करना चाहिए, ताकि व्यापार को बचाया जा सके। राजधानी लखनऊ में दुबग्गा मंडी के सब्जी व्यापारी नरेंद्र मोनकर का कहना है कि मंडी शुल्क लागू रहने से व्यापार समाप्त हो रहा है। मंडी के बाहर ही कोई शुल्क न लगने से खुलेआम लोग काम कर रहे हैं।
कानपुर गल्ला आढ़तिया संघ के उपाध्यक्ष अजय वाजपेयी का कहना है कि मुयमंत्री योगी ने मंडियों में ढाई से घटा कर दो फीसदी मंडी शुल्क तो किया है लेकिन मंडियों के अंदर व्यापार करने वाले व्यापारियों को शुल्क तो देना ही होगा जबकि बाहर खरीद बिक्री करने पर कोई शुल्क नहीं देय है, जिसके कारण मंडियों में आवक ही नहीं रह गई है।

First Published - September 9, 2020 | 3:41 PM IST

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