facebookmetapixel
Advertisement
उदारीकरण के 35 साल: सुधार के इंतजार में ‘पूरब का शेफील्ड’; क्या डबल इंजन सरकार लौटाएगी औद्योगिक गौरव?वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच घरेलू सुधारों पर जोर, रणनीतिक बढ़त के लिए तेज नीतिगत फैसलों की जरूरत: वित्त मंत्रालयE20 विवाद के बीच बढ़ी Ethanol-Free Fuel की मांग, प्रीमियम पेट्रोल की बिक्री दोगुनी से ज्यादा हुईQ1 Results: अदाणी एंटरप्राइजेज को ₹1,160 करोड़ का घाटा, जानें आयशर मोटर्स, एशियन पेंट्स समेत अन्य कंपनियों का कैसा रहा रिजल्ट SML Mahindra ने M&M के ट्रक-बस कारोबार का ₹525 करोड़ में अधिग्रहण मंजूर, CV मार्केट में बढ़ाएगी पकड़L&T का ऑटो कंपोनेंट सेक्टर में बड़ा दांव, EV टेक्नोलॉजी पर ₹5,000 करोड़ करेगी निवेशसार्वजनिक वितरण प्रणाली को अब खाद्य नहीं, पोषण सुरक्षा की ओर बढ़ना होगाITR Filing 2026: HRA, होम लोन और 80C-80D डिडक्शन क्लेम में अब देनी होगी ज्यादा जानकारी, जानें नए नियमनीट केवल परीक्षा नहीं, सामाजिक बदलाव का माध्यम भी हैEditorial: राज्यों का बढ़ता कर्ज और घाटा अर्थव्यवस्था के लिए क्यों है चिंता का विषय?

सिर चढ़ कर बोलेगा हाइब्रिड कार का जलवा

Advertisement
Last Updated- December 07, 2022 | 9:46 PM IST

किसी कार का प्रदूषण स्तर शून्य हो और यह एक लीटर पेट्रोल में 30-32 किलोमीटर चलती हो तो आप यही सोचेंगे कि काश, यह कार मेरी होती।

बहुत जल्द आपका यह सपना साकार होने वाला है।राष्ट्रमंडल खेल से पहले दिल्ली की सड़कों पर ऐसी ही कारों के दौड़ने की पूरी उम्मीद है। इस प्रकार की हाइब्रिड कार की उम्मीद को अंजाम देने में जुटे हैं दिल्ली कॉलेज ऑफ इंजीनियरिंग के छात्र।

जिन्होंने महिंद्रा एंड महिंद्रा कंपनी की मदद से इस प्रकार की ‘कांसेप्ट कार’ का परीक्षण भी कर लिया है। इस कार को जनमानस का बनाने के लिए अब इंडियल ऑयल कंपनी लिमिटेड (आईओसीएल) जैसी कंपनी छात्रों की मदद कर  रही है।

इस प्रोजेक्ट से जुड़े छात्रों के मुताबिक कार पेट्रोल के साथ बिजली से भी चलेगी। कार के इंजन की खासियत यह है कि इसमें कंटिन्यूअस वेरिअबल ट्रांसमिशन (सीवीटी)  लगा है जिससे यह जररूत के हिसाब ले अपने आप बिजली से पेट्रोल पर या फिर पेट्रोल से बिजली पर शिफ्ट हो जाएगा।

प्रोजेक्ट से जुड़े आदित्य चौहान कहते हैं, ‘अल्टो या जेन जैसी पेट्रोल कार को आसानी से हाइब्रिड कार बनायी जा सकती है और इसमें अधिकतम खर्च 70 हजार रुपये का होगा। एक बार इस प्रकार की कार सड़क पर आ गयी तो कार निर्माता कंपनी बड़े पैमाने पर इसका उत्पादन कर सकती है।’

डीसीई के निदेशक पी बी शर्मा ने बताया कि इस योजना को अंतिम रूप देने के लिए आईओसीएल ने 18 लाख रुपये की मदद दी है। इसके अलावा कई अन्य बड़ी कंपनियां भी इस ‘कांसेप्ट’ में दिलचस्पी दिखा रही है।

उन्होंने कहा कि वर्ष 2010 में दिल्ली में राष्ट्रमंडल खेल के साथ विश्व हॉकी कप का भी आयोजन निर्धारित है। इस दौरान इस कार को सड़क पर उतारने का सबसे अच्छा मौका होगा।

दिल्ली के साथ बेंगलुरू इस कार के लिए अच्छा बाजार साबित हो सकता है। चौहान कहते हैं, ‘टोयटा और होंडा सिविक ने भी ऐसी हाइब्रिड कारें बनायी है लेकिन उसे भारत में लाने पर उसकी लागत काफी अधिक होगी।



 

Advertisement
First Published - September 20, 2008 | 3:02 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement