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पर्सनल लोन या ओवरड्राफ्ट? अचानक पैसों की जरूरत पड़ने पर कौन सा विकल्प हो सकता है बेस्ट

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पैसों की जरूरत पड़ने पर पर्सनल लोन तय किश्त और कम ब्याज का भरोसा देता है, जबकि ओवरड्राफ्ट छोटे समय के लिए पैसों का आसान विकल्प है

Last Updated- May 26, 2026 | 8:00 PM IST
Rupee
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

पैसे की अचानक जरूरत पड़ने पर अक्सर लोग उलझन में पड़ जाते हैं कि पर्सनल लोन लें या ओवरड्राफ्ट (OD) फैसिलिटी का इस्तेमाल करें। आजकल बैंक और फिनटेक कंपनियां ग्राहकों को लुभाने के लिए धड़ाधड़ प्री-अप्रूव्ड (पहले से मंजूर) क्रेडिट ऑफर्स दे रही हैं। ऐसे में समझदारी इसी में है कि लोन के लिए अप्लाई करने से पहले दोनों विकल्पों की बारीकियों, खर्चों और उनकी बनावट को अच्छी तरह समझ लिया जाए।

भले ही दोनों ही तरीकों से पैसा बहुत जल्दी मिल जाता है, लेकिन दोनों के काम करने का तरीका और उनकी लागत एक-दूसरे से काफी अलग है। आइए समझते हैं कि आपके लिए कौन सा विकल्प किस स्थिति में बेहतर साबित हो सकता है।

क्या है ओवरड्राफ्ट और यह कैसे काम करता है?

ओवरड्राफ्ट असल में एक घूमती हुई क्रेडिट लाइन (रिवॉल्विंग लाइन ऑफ क्रेडिट) की तरह है, जो आपके सेविंग्स या करंट अकाउंट से जुड़ी होती है। इसके तहत बैंक आपको आपके खाते में मौजूद बैलेंस से ज्यादा पैसा निकालने की मंजूरी देता है। इसकी एक लिमिट पहले से तय होती है, जिसे प्री-अप्रूव्ड लिमिट कहा जाता है।

पर्सनल लोन की तरह इसमें बैंक सारा पैसा एक साथ आपके खाते में नहीं डालता। आपको जब और जितने पैसों की जरूरत हो, आप इस लिमिट से निकाल सकते हैं। अपनी सुविधा के अनुसार आप इस पैसे को किश्तों में या एक साथ वापस भी चुका सकते हैं।

इसकी सबसे बड़ी खूबी यह है कि ब्याज केवल उसी रकम पर लगता है जिसका आप इस्तेमाल करते हैं, और यह डेली रिड्यूसिंग बैलेंस (रोजाना घटने वाले बैलेंस) के आधार पर तय होता है। यही वजह है कि अचानक सामने आने वाले खर्चों या कुछ समय के लिए पैसों की तंगी को दूर करने में ओवरड्राफ्ट बहुत मददगार होता है। आमतौर पर बैंक यह सुविधा सैलरी अकाउंट होल्डर्स, अच्छे बिजनेस और मजबूत बैंकिंग ट्रैक रिकॉर्ड वाले ग्राहकों को देते हैं। यह लिमिट आपकी कमाई, अकाउंट की हिस्ट्री या फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) को देखकर तय की जाती है।

पर्सनल लोन: तय ढांचा और किश्तों का भरोसा

पर्सनल लोन एक बेहद व्यवस्थित जरिया है। इसमें बैंक एक तय रकम सीधे आपके बैंक खाते में ट्रांसफर कर देता है। इसके बाद आपको एक निश्चित समय (टेन्योर) के दौरान हर महीने तय EMI के जरिए यह लोन चुकाना होता है। चूंकि पर्सनल लोन अनसिक्योर्ड लोन की श्रेणी में आता है, इसलिए इसके लिए किसी तरह की गारंटी या सिक्योरिटी रखने की जरूरत नहीं होती। हालांकि, लोन देने से पहले बैंक आपकी आमदनी, पुराना रिकॉर्ड और क्रेडिट स्कोर जरूर जांचते हैं।

पर्सनल लोन में ब्याज की गणना पहले दिन से ही पूरी मंजूर की गई रकम पर शुरू हो जाती है, भले ही आप उसमें से आधा पैसा अपनी अलमारी में ही क्यों न रख दें। आर्थिक मामलों के जानकार मानते हैं कि पर्सनल लोन उन बड़े और तय खर्चों के लिए सबसे बेस्ट है, जहां आपको पहले से पता होता है कि कितना पैसा खर्च होने वाला है।

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ब्याज का गणित: कहीं महंगा न पड़ जाए ओवरड्राफ्ट

अक्सर लोगों के बीच यह एक बड़ी गलतफहमी होती है कि ओवरड्राफ्ट हमेशा सस्ता पड़ता है क्योंकि इसमें केवल इस्तेमाल की गई रकम पर ही ब्याज देना होता है। लेकिन हकीकत थोड़ी अलग है। आमतौर पर ओवरड्राफ्ट की ब्याज दरें पर्सनल लोन के मुकाबले काफी ज्यादा होती हैं। बैंकिंग और लेंडिंग प्लेटफॉर्म्स के आंकड़ों के मुताबिक, ओवरड्राफ्ट पर सालाना ब्याज दर 18 फीसदी से लेकर 24 फीसदी या उससे भी ऊपर जा सकती है। इसके विपरीत, जिन ग्राहकों का क्रेडिट रिकॉर्ड शानदार होता है, उन्हें पर्सनल लोन काफी कम और आकर्षक ब्याज दरों पर मिल जाता है।

यदि कोई व्यक्ति ओवरड्राफ्ट लिमिट से पैसा निकालकर लंबे समय तक उसे नहीं चुकाता या बार-बार आउटस्टैंडिंग अमाउंट को आगे बढ़ाता रहता है, तो इसकी कुल लागत बहुत भारी पड़ सकती है। दूसरी तरफ, पर्सनल लोन में रीपेमेंट का शेड्यूल बिल्कुल साफ होता है। आपको हर महीने एक फिक्स्ड अमाउंट चुकाना होता है, जिससे बजट बनाना और उसे संभालना काफी आसान हो जाता है।

कब ओवरड्राफ्ट चुनें और कब पर्सनल लोन?

दोनों ही तरीकों के अपने-अपने फायदे और जरूरत हैं। ओवरड्राफ्ट का चुनाव तब करना चाहिए जब आपकी जरूरत बहुत छोटे समय के लिए हो या आपको यह पक्का न हो कि कितने पैसों की जरूरत पड़ेगी। अगर आपको किश्तों में पैसों की जरूरत है और आप उसे जल्दी ही चुकाने की स्थिति में हैं, तो ओवरड्राफ्ट बेस्ट है। अनियमित कमाई वाले लोग या कुछ दिनों के लिए नकदी के संकट से जूझ रहे नौकरीपेशा लोग (जैसे महीने के आखिरी दिनों की तंगी) इसका सबसे ज्यादा फायदा उठा सकते हैं।

इसके उलट, अगर आपका कोई बड़ा प्लान है, जैसे- शादी-ब्याह, मेडिकल इमरजेंसी, बच्चों की उच्च शिक्षा, घूमना-फिरना या घर की मरम्मत, तो पर्सनल लोन ज्यादा बेहतर विकल्प है। इन कामों के लिए आपको सारा पैसा एक साथ चाहिए होता है और इसे चुकाने के लिए कई साल का समय मिलता है। यदि आपका सिबिल (CIBIL) स्कोर 700 से ऊपर है, तो आपको बहुत ही कम ब्याज दर पर बड़ा पर्सनल लोन आसानी से मिल सकता है।

छिपे हुए खतरे और जरूरी बातें

ओवरड्राफ्ट की लचीली शर्तें कभी-कभी ग्राहकों के लिए जाल बन जाती हैं। चूंकि इसमें EMI का कोई कड़ा नियम नहीं होता, इसलिए लोग अक्सर जरूरत से ज्यादा पैसा निकाल लेते हैं और उसे लंबे समय तक नहीं चुकाते। यह शॉर्ट-टर्म लोन धीरे-धीरे एक महंगे कर्ज के जाल में बदल जाता है। इसके विपरीत, पर्सनल लोन में हर महीने EMI चुकाने का एक कड़ा अनुशासन होता है। हालांकि, पर्सनल लोन की EMI बाउंस होने पर सिबिल स्कोर खराब होने और पेनाल्टी लगने का डर भी रहता है।

लोन लेने से पहले सिर्फ ब्याज दर न देखें। प्रोसेसिंग फीस, ओवरड्राफ्ट की सालाना रिन्यूअल फीस, पर्सनल लोन को समय से पहले बंद करने का चार्ज (फोरक्लोजर या प्रीपेमेंट कॉस्ट) और ब्याज दरें फिक्स्ड हैं या फ्लोटिंग, इन सब बातों की तुलना जरूर करें। अंत में, फैसला इस बात पर निर्भर करता है कि आपको कितने समय के लिए पैसा चाहिए और आपका रीपेमेंट बिहेवियर कैसा है।

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First Published - May 26, 2026 | 8:00 PM IST

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