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Foreign Assets वाले सावधान! ITR में गलत एक्सचेंज रेट डालने पर फंस सकते हैं, टैक्स एक्सपर्ट ने दी चेतावनी

विदेशी शेयर, ESOP या बैंक अकाउंट की जानकारी ITR में देते समय SBI TTBR एक्सचेंज रेट का ही इस्तेमाल करें, वरना टैक्स विभाग की जांच का सामना करना पड़ सकता है।

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अमित कुमार   
Last Updated- July 27, 2026 | 2:20 PM IST

ITR Filing 2026: अगर आप भारत में Resident Taxpayer हैं और आपके पास विदेशी बैंक अकाउंट, विदेशी शेयर, ESOP (Employee Stock Option Plan) या कोई दूसरी विदेशी संपत्ति है, तो आकलन वर्ष (AY) 2026-27 के लिए ITR दाखिल करते समय इसकी जानकारी देना जरूरी है। लेकिन सिर्फ जानकारी देना ही काफी नहीं है। इन संपत्तियों की कीमत को भारतीय रुपये में बदलते समय सही एक्सचेंज रेट का इस्तेमाल करना भी जरूरी है।

Google या RBI का एक्सचेंज रेट क्यों नहीं इस्तेमाल करना चाहिए?

ClearTax की चार्टर्ड अकाउंटेंट और टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंदन के अनुसार, कई लोग विदेशी संपत्तियों की वैल्यू को रुपये में बदलने के लिए Google, RBI रेफरेंस रेट या अपने बैंक का एक्सचेंज रेट इस्तेमाल कर लेते हैं। जबकि आयकर नियमों के मुताबिक Schedule FA में विदेशी संपत्तियों की जानकारी देते समय स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) के Telegraphic Transfer Buying Rate (TTBR) का ही इस्तेमाल करना चाहिए।

उन्होंने बताया कि एक और आम गलती यह होती है कि लोग सभी विदेशी संपत्तियों के लिए एक ही एक्सचेंज रेट, जैसे साल के आखिर का रेट, इस्तेमाल कर लेते हैं। जबकि अलग-अलग वैल्यू के लिए अलग-अलग तारीख का TTBR लागू होता है।

हर वैल्यू के लिए अलग तारीख का एक्सचेंज रेट लागू हो सकता है

चांदनी आनंदन के मुताबिक, किस तारीख का TTBR इस्तेमाल होगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि आप कौन-सी वैल्यू दिखा रहे हैं।

  • खरीद (Acquisition) की वैल्यू के लिए खरीद की तारीख का SBI TTBR इस्तेमाल करें।
  • पीक वैल्यू (सबसे अधिक कीमत) के लिए उस दिन का TTBR लें, जब निवेश की कीमत सबसे ज्यादा थी।
  • क्लोजिंग वैल्यू के लिए 31 दिसंबर 2025 का SBI TTBR इस्तेमाल करें।

यानी एक ही विदेशी निवेश के लिए अलग-अलग वैल्यू पर अलग-अलग एक्सचेंज रेट लग सकता है।

एक ही एक्सचेंज रेट लगाने की गलती न करें

My Legal Expert के संस्थापक और एडवोकेट अश्विनी कुमार का कहना है कि कई लोग Schedule FA को सामान्य औपचारिकता मानकर भर देते हैं और तकनीकी नियमों पर ध्यान नहीं देते। कई करदाता सभी विदेशी संपत्तियों के लिए एक ही एक्सचेंज रेट इस्तेमाल कर लेते हैं, जिससे रिटर्न में गलत जानकारी जा सकती है। इससे बाद में आयकर विभाग सवाल पूछ सकता है।

1 Finance के टैक्स हेड पराग जैन के अनुसार, Schedule FA की रिपोर्टिंग भारत के वित्त वर्ष के आधार पर नहीं होती। इसमें 1 जनवरी से 31 दिसंबर तक का कैलेंडर वर्ष माना जाता है।

उन्होंने बताया कि AY 2026-27 के लिए करदाताओं को 1 जनवरी 2025 से 31 दिसंबर 2025 के बीच रखी गई विदेशी संपत्तियों की जानकारी देनी होगी। कई लोग गलती से सिर्फ 31 मार्च 2026 तक की जानकारी भर देते हैं, जबकि यह सही तरीका नहीं है।

गलत एक्सचेंज रेट इस्तेमाल करने पर क्या हो सकता है?

1 Finance के टैक्स हेड पाराग जैन ने एक उदाहरण देकर समझाया कि अगर किसी कर्मचारी के Restricted Stock Units (RSUs) 15 जुलाई 2025 को वेस्ट (Vest) हुए हैं, तो Schedule FA में उनकी शुरुआती वैल्यू उसी दिन के SBI TTBR के आधार पर रुपये में बदली जाएगी।

हालांकि, कंपनी ने कर्मचारी की सैलरी पर टैक्स की गणना करते समय किसी दूसरे एक्सचेंज रेट का इस्तेमाल किया हो सकता है। ऐसे में दोनों वैल्यू अलग-अलग होना बिल्कुल सामान्य है, क्योंकि दोनों पर अलग-अलग टैक्स नियम लागू होते हैं। इसलिए इन दोनों आंकड़ों को एक जैसा करने की कोशिश नहीं करनी चाहिए।

इसी तरह ClearTax की टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंदन का कहना है कि अगर किसी व्यक्ति के पास अमेरिका में लिस्टेड शेयर हैं, तो उनकी खरीद कीमत, सबसे अधिक कीमत (Peak Value) और साल के अंत की कीमत (Closing Value) को अलग-अलग तारीख के SBI TTBR के हिसाब से रुपये में बदलना चाहिए। पूरे निवेश के लिए एक ही एक्सचेंज रेट का इस्तेमाल करना सही तरीका नहीं है।

गलत एक्सचेंज रेट डालने पर क्या होगा?

विशेषज्ञों का कहना है कि अगर एक्सचेंज रेट में मामूली गलती है, तो हर बार जुर्माना नहीं लगता। लेकिन इससे आपका ITR तकनीकी रूप से गलत माना जा सकता है।

चांदनी आनंदन के अनुसार, अगर गलत एक्सचेंज रेट की वजह से विदेशी संपत्ति की वैल्यू में बड़ा अंतर आ जाता है, तो आयकर विभाग आपसे स्पष्टीकरण मांग सकता है। यदि गलती का पता आपको खुद चल जाए, तो तय समय के भीतर Revised ITR दाखिल करना सबसे सुरक्षित विकल्प होता है।

पाराग जैन का कहना है कि जिन लोगों के पास विदेश में बड़ा निवेश है, उनके मामले में वैल्यू में बड़ा अंतर जांच (Scrutiny) के दौरान महत्वपूर्ण साबित हो सकता है।

वहीं, S.K. Patodia LLP के एसोसिएट डायरेक्टर मिहिर तन्ना के अनुसार, अब आयकर विभाग AEOI, CRS और FATCA जैसे अंतरराष्ट्रीय सूचना साझाकरण सिस्टम के जरिए विदेशी संपत्तियों की जानकारी का मिलान भी करता है। अगर रिटर्न में दी गई जानकारी और उपलब्ध रिकॉर्ड में अंतर मिलता है, तो करदाता को नोटिस या जांच का सामना करना पड़ सकता है।

उन्होंने यह भी सलाह दी कि यदि आपके पास कोई विदेशी बैंक खाता बंद पड़ा (Dormant) है या उसमें बहुत कम बैलेंस है, तब भी अगर वह Schedule FA के तहत रिपोर्ट करने योग्य है, तो उसकी जानकारी ITR में जरूर दें।

ITR भरने से पहले ये दस्तावेज रखें तैयार

टैक्स विशेषज्ञों का कहना है कि ITR दाखिल करने से पहले सभी जरूरी दस्तावेजों को व्यवस्थित कर लेना चाहिए। इससे रिटर्न भरते समय गलती होने की संभावना कम रहती है।

ClearTax की टैक्स एक्सपर्ट चांदनी आनंदन के अनुसार, करदाताओं को अपनी जानकारी का मिलान Annual Information Statement (AIS) से जरूर करना चाहिए। अब AIS में विदेशी संपत्तियों और विदेश से होने वाली आय की जानकारी भी शामिल होती है, जो अंतरराष्ट्रीय सूचना साझा करने की व्यवस्था के तहत आयकर विभाग को मिलती है।

My Legal Expert के संस्थापक अश्विनी कुमार का कहना है कि विदेशी निवेश रखने वाले लोगों को निवेश से जुड़े दस्तावेज, ब्रोकरेज स्टेटमेंट, विदेशी बैंक स्टेटमेंट और जिस SBI TTBR के आधार पर विदेशी संपत्तियों की वैल्यू रुपये में बदली गई है, उसका रिकॉर्ड भी सुरक्षित रखना चाहिए। इससे ITR में गलतियां होने की संभावना कम रहती है।

वहीं, 1 Finance के टैक्स हेड पाराग जैन के अनुसार, ITR भरने से पहले यह तय कर लेना चाहिए कि आपकी रेजिडेंशियल स्टेटस क्या है। Schedule FA भरने का नियम आमतौर पर केवल Resident and Ordinarily Resident (ROR) करदाताओं पर लागू होता है। NRI और RNOR श्रेणी के लोगों पर यह नियम सामान्य तौर पर लागू नहीं होता। उन्होंने यह भी सलाह दी कि जिस तारीख का SBI TTBR इस्तेमाल किया गया है, उसका रिकॉर्ड डाउनलोड करके ITR की कॉपी के साथ सुरक्षित रखें।

S.K. Patodia LLP के एसोसिएट डायरेक्टर मिहिर तन्ना ने कहा कि जिन लोगों ने विदेश में टैक्स चुकाया है, उन्हें विदेशी टैक्स राहत (Foreign Tax Relief) का दावा करने के लिए जरूरी नियमों और औपचारिकताओं को भी पूरा करना चाहिए।

विशेषज्ञों का मानना है कि आज के समय में विदेशी शेयर, ESOP और अन्य विदेशी निवेश रखने वाले भारतीयों की संख्या लगातार बढ़ रही है। ऐसे में सही एक्सचेंज रेट का इस्तेमाल करना, सभी जरूरी दस्तावेज सुरक्षित रखना और सही अवधि की जानकारी ITR में देना बेहद जरूरी है। इससे आयकर विभाग की ओर से अनावश्यक नोटिस या पूछताछ से बचा जा सकता है।

First Published : July 27, 2026 | 2:20 PM IST