प्रतीकात्मक तस्वीर
आरबीआई के डिप्टी गवर्नर रोहित जैन ने बुधवार को मौद्रिक नीति के बाद के संवाददाता सम्मेलन में कहा कि केंद्रीय बैंक डिजिटल करेंसी (सीबीडीसी) और यूनिफाइड लेंडिंग इंटरफेस (यूएलआई) को अपनाने की रफ्तार बढ़ रही है। इन दोनों प्लेटफॉर्म का इस्तेमाल पहले से ही सीधे लेनदेन के लिए किया जा रहा है।
जैन ने कहा कि सीबीडीसी असल लेनदेन के लिए पहले से ही चालू है। हालांकि इसे अभी भी पायलट प्रोजेक्ट ही कहा जा रहा है। आरबीआई इसकी टेक्नॉलजी और इस्तेमाल के तरीकों का दायरा बढ़ा रहा है। सीबीडीसी और यूएलआई दोनों को ज्यादा से ज्यादा अपनाने के लिए केंद्रीय बैंक बैंकों के साथ मिलकर काम कर रहा है और साथ ही उधारी प्लेटफॉर्म को बढ़ावा देने के लिए राज्य सरकारों के संपर्क में भी है। अब तक 12 राज्यों ने यूएलआई अपनाने में आसानी के लिए अपने भूमि रिकॉर्ड को डिजिटल कर लिया है।
जैन ने कहा, ‘हम अच्छी प्रगति कर रहे हैं। अपनाने वालों की संख्या बढ़ रही है। ये सिर्फ पायलट प्रोजेक्ट नहीं हैं, बल्कि असल में लोगों के बीच इनका इस्तेमाल हो रहा है। यह सचमुच हो रहा है। सीबीडीसी का इस्तेमाल असल लेनदेन के लिए किया जा रहा है। इसे बस नाम के लिए पायलट कहा जा रहा है।’
उन्होंने कहा कि आरबीआई सीबीडीसी के इस्तेमाल के अलग-अलग तरीकों का दायरा बढ़ा रहा है। इनमें क्रॉस-बॉर्डर ट्रांजेक्शन, सरकारी योजनाएं और खास लाभार्थियों के वर्गों को लक्षित ट्रांसफर शामिल हैं। उम्मीद है कि इससे इसे ज्यादा व्यापक तरीके से अपनाया जाएगा और इसका इस्तेमाल बढ़ेगा।
यूएलआई के बारे में जैन ने कहा कि आरबीआई इसके इस्तेमाल के तरीकों को बढ़ाने के लिए बैंकों के साथ काम कर रहा है। इस प्लेटफॉर्म को ज्यादा से ज्यादा अपनाने के लिए राज्य सरकारों के साथ लगातार बातचीत कर रहा है। अब तक बारह राज्यों ने जमीन के रिकॉर्ड को डिजिटल कर लिया है, जबकि बाकी राज्य ऐसा करने की प्रक्रिया में हैं।
2025 में इस प्लेटफॉर्म से कुल 64 ऋणदाता (41 बैंक और 23 एनबीएफसी) जुड़ गए हैं। एक साल पहले इनकी संख्या 36 थी। यूएलआई के जरिये उपलब्ध डेटा सेवाओं की संख्या भी एक साल पहले की 50 से बढ़कर 136 से ज़्यादा हो गई है, जो 12 अलग-अलग तरह के लोन प्रोसेस में मदद करती हैं।