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टाटा संस फिलहाल अपर लेयर एनबीएफसी में रहेगी, सीआईसी लाइसेंस पर फैसला बाकी

अपर लेयर एनबीएफसी को परिभाषित करने के लिए संशोधित मानदंड इसी साल जून से प्रभावी हुए हैं। टाटा संस की एकल परिसंपत्ति 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक है

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सुब्रत पांडा   
Last Updated- August 05, 2026 | 11:37 PM IST

टाटा समूह की प्रमुख होल्डिंग फर्म टाटा संस अपर लेयर एनबीएफसी यानी ऊपरी स्तर की गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी बनी रहेगी क्योंकि उसके लिए तय नियम सिद्धांतों पर आधारित हैं। भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) ने आज मौद्रिक नीति समीक्षा के बाद आयोजित संवाददाता सम्मेलन में यह संकेत दिया। साथ ही एनबीएफसी- मुख्य निवेश कंपनी (सीआईसी) के तौर पर पंजीकरण रद्द करने संबंधी टाटा समूह के अनुरोध पर अभी भी विचार किया जा रहा है।

आरबीआई के गवर्नर संजय मल्होत्रा से जब पूछा गया कि साल 2025-26 के लिए अपर लेयर की सूची कब प्रकाशित होगी, तो उन्होंने कहा, ‘यह अब सिद्धांतों पर आधारित है। उन सिद्धांतों के अनुसार हर कोई जानता है कि सूची क्या है। मामला इसी ​​​स्थिति में है।’ 2024-25 के लिए अपर लेयर एनबीएफसी की सूची जनवरी 2025 में जारी की गई थी। इसी तरह 2024 में भी यह सूची जनवरी में ही जारी हुई थी।

मल्होत्रा ने कहा, ‘अब हर कोई जानता है कि कौन सी एनबीएफसी अपर लेयर, मिडिल लेयर और बेस लेयर में है। जो एनबीएफसी मानदंडों को पूरा करेंगी वे सूची में बनी रहेंगी। जहां तक नई सूची का सवाल है तो वह सिद्धांतों पर आधारित है और यह आगे भी जारी रहेगा। स्थिति वैसी ही है जैसी पहले थी।’

आरबीआई के संशोधित नियमों के अनुसार, 1 लाख करोड़ रुपये से अधिक की परिसंपत्ति वाले एनबीएफसी को अपर लेयर में माना जाएगा। अपर लेयर एनबीएफसी को सख्त नियामकीय निगरानी का सामना करना पड़ता है और उसके लिए सूची में शामिल होने के तीन साल के भीतर स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध होना आवश्यक है। 

अपर लेयर एनबीएफसी को परिभाषित करने के लिए संशोधित मानदंड इसी साल जून से प्रभावी हुए हैं। टाटा संस की एकल परिसंपत्ति 1.75 लाख करोड़ रुपये से अधिक है। आरबीआई के डिप्टी गवर्नर ​शिरीष मुर्मू ने कहा कि सूची जल्द जारी की जाएगी। मगर टाटा संस को स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कराने के बारे में अनिश्चितता अब भी बरकरार है। प्रमुख निवेश कंपनी (सीआईसी) के रूप में अपना पंजीकरण रद्द करने संबंधी टाटा संस का आवेदन आरबीआई के पास अभी भी विचाराधीन है।

टाटा संस ने ऋण मुक्त होने के बाद 2024 में सीआईसी लाइसेंस सरेंडर करने के लिए आरबीआई से संपर्क किया था। इस कदम से उसे एक निजी, गैर-सूचीबद्ध कंपनी बरकरार रहने की अनुमति मिल जाएगी।

स्टॉक एक्सचेंज पर सूचीबद्ध कराने की समयसीमा 30 सितंबर, 2025 थी। मगर समयसीमा बीत जाने के बाद भी टाटा संस का आवेदन विचाराधीन है। सूत्रों का कहना है कि आरबीआई ने पंजीकरण रद्द करने के अनुरोध पर अब तक कोई अंतिम निर्णय नहीं लिया है।

टाटा संस को सबसे पहले 2022 में आरबीआई के नियामकीय ढांचे के तहत अपर लेयर गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनी के रूप में वर्गीकृत किया गया था। वह 2025 में प्रकाशित केंद्रीय बैंक की अपर लेयर सूची में भी शामिल रही। 

फिलहाल 15 एनबीएफसी को अपर लेयर एनबीएफसी के रूप में वर्गीकृत किया गया है। इनमें बजाज फाइनैंस, श्रीराम फाइनैंस, एलऐंडटी फाइनैंस, टाटा कैपिटल, एलआईसी हाउसिंग फाइनैंस, चोलामंडलम इन्वेस्टमेंट ऐंड फाइनैंस, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा फाइनैंशियल सर्विसेज, आदित्य बिड़ला फाइनैंस, पीरामल कैपिटल ऐंड हाउसिंग फाइनैंस, मुथूट फाइनैंस, एचडीबी फाइनैंशियल सर्विसेज, सम्मान कैपिटल, बजाज हाउसिंग फाइनैंस, पीएनबी हाउसिंग फाइनैंस और टाटा संस शामिल हैं।

आरबीआई ने अप्रैल में प्रस्ताव दिया था कि अपर लेयर में 1 लाख करोड़ रुपये या इससे अधिक परिसंपत्ति वाली एनबीएफसी शामिल होने चाहिए। केंद्रीय बैंक ने इसे जून में अंतिम रूप दिया था। इससे पहले स्केल आधारित नियामकीय ढांचा मात्रात्मक और गुणात्मक मापदंडों को मिलाकर एक स्कोरिंग मॉडल के जरिये अपर लेयर एनबीएफसी की पहचान करता था जिनका भारांश क्रमशः 70 फीसदी और 30 फीसदी था।

First Published : August 5, 2026 | 11:30 PM IST