भारतीय शेयर बाजारों में शुक्रवार को तेजी आई। इसकी वजह दिन की शुरुआत में कच्चे तेल की कीमतों में नरमी आना रही। लिहाजा निवेशकों को एक दिन पहले की बिकवाली के बाद सस्ते में खरीदारी के मौके तलाशने का हौसला मिला। लेकिन दिन के दौरान कच्चे तेल की कीमतों में अचानक उछाल ने निवेशकों को चिंतित कर दिया जिससे बढ़त सीमित हो गई।
शुक्रवार को कारोबारी सत्र के दौरान सेंसेक्स में 1,079 अंकों यानी 1.5 फीसदी तक की बढ़त दर्ज की गई थी। लेकिन सत्र के अंत में यह 326 अंकों यानी 0.4 फीसदी की बढ़त के साथ 74,533 पर बंद हुआ। निफ्टी 112 अंकों यानी 0.5 फीसदी की तेजी के साथ 23,115 पर टिका।
बीएसई में सूचीबद्ध कंपनियों का कुल बाजार पूंजीकरण 3 लाख करोड़ रुपये बढ़कर 429 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया। शुक्रवार की इस बढ़त से दोनों सूचकांकों को मामूली नुकसान के साथ सप्ताह की समाप्ति करने में मदद मिली। सप्ताह के दौरान सेंसेक्स में 0.04 फीसदी और निफ्टी में 0.2 फीसदी की गिरावट आई। पिछले चार हफ्तों से दोनों सूचकांकों में गिरावट आ रही है।
शुक्रवार की तेजी तेल की कीमतों में उछाल के बीच बेंचमार्क सूचकांकों में लगभग दो वर्षों में सबसे बड़ी गिरावट दर्ज किए जाने के एक दिन बाद देखने को मिली। तेल की ऊंची कीमतें भारत में महंगाई बढ़ाती हैं और आर्थिक वृद्धि पर असर डालती हैं क्योंकि देश कच्चे तेल की अपनी अधिकांश जरूरतों का आयात करता है।
खबरों के मुताबिक, ईरान ने शुक्रवार को खाड़ी देशों पर हमले किए। अमेरिका, ईरान के प्रमुख तेल निर्यात इलाके खार्ग द्वीप को कब्जे में लेने पर विचार कर रहा था ताकि तेहरान पर होर्मुज स्ट्रेट को फिर से खोलने का दबाव बनाया जा सके। अमेरिकी डॉलर के मुकाबले रुपया अब तक के सबसे निचले स्तर पर 93.7 पर आ गया। ब्रेंट क्रूड 105.4 डॉलर पर कारोबार कर रहा था, जिसमें 0.3 फीसदी की बढ़त दर्ज की गई।
मोतीलाल ओसवाल फाइनैंशियल सर्विसेज में अनुसंधान प्रमुख (वेल्थ मैनेजमेंट) सिद्धार्थ खेमका ने कहा, सकारात्मक शुरुआत के बावजूद बाजार का रुख अस्थिर बना रहा क्योंकि वैश्विक बाजार की प्रतिकूल परिस्थितियां बाजार की दिशा को प्रभावित करती रहीं। कच्चे तेल की ऊंची कीमतों और पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव के कारण निकट भविष्य को लेकर नजरिया सतर्क बना हुआ है। विदेशी निवेशकों की लगातार बिकवाली से भी बाजार का मनोबल गिरा हुआ है।
बाजार में चढ़ने व गिरने वाले शेयरों का अनुपात सकारात्मक रहा और 2,414 शेयरों में बढ़त और 1,863 में गिरावट दर्ज की गई। सेंसेक्स के दो-तिहाई से अधिक शेयरों में तेजी रही। रिलायंस इंडस्ट्रीज के शेयरों में 2.1 फीसदी की वृद्धि हुई और सेंसेक्स की बढ़त में उसका सबसे ज्यादा योगदान रहा। इसके बाद इन्फोसिस का स्थान रहा, जिसके शेयरों में 2.8 फीसदी की बढ़ोतरी हुई। एचडीएफसी के शेयरों में 2.4 फीसदी की गिरावट आई, जो सेंसेक्स का सबसे खराब प्रदर्शन करने वाला शेयर रहा और सूचकांक पर सबसे अधिक नकारात्मक प्रभाव डाला। निजी बैंक के चेयरमैन के नैतिक मतभेदों का हवाला देते हुए इस्तीफा देने से इस शेयर में पिछले दो सत्रों में गिरावट आई है।
रेलिगेयर ब्रोकिंग के वरिष्ठ उपाध्यक्ष (अनुसंधान) अजित मिश्र ने कहा कि सूचकांक के लिए 23,400-23,600 का दायरा उछाल की स्थिति में प्रतिरोध के रूप में काम कर सकता है जबकि 22,800 समर्थन का अहम स्तर बना हुआ है। इस स्तर से नीचे टूटने पर अत्यधिक बिकवाली की स्थिति के बावजूद 22,500 के स्तर तक और गिरावट आ सकती है। चूंकि अधिकांश क्षेत्रों में दबाव बना हुआ है, इसलिए निवेशकों को शेयर विशेष का नजरिया अपनाना चाहिए। उनको खरीद के अवसरों के लिए अपेक्षाकृत मजबूत शेयरों और शॉर्ट के लिए कमजोर शेयरों पर ध्यान देना चाहिए।