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नोमूरा और सिटी ने घटाया निफ्टी का लक्ष्य, मिड और स्मॉल कैप पर खतरा

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नोमूरा ने कहा कि उसके निफ्टी लक्ष्य में बदलाव और कॉरपोरेट कमाई पर मंडराता जोखिम कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण है

Last Updated- March 16, 2026 | 10:17 PM IST
Nifty 50

पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध के बीच विदेशी ब्रोकरों ने निफ्टी-50 के लिए अपने साल के अंत तक के लक्ष्य घटाने शुरू कर दिए हैं। नोमूरा अब निफ्टी 50 सूचकांक के दिसंबर अंत तक 24,900 के स्तर पर जाने का अनुमान जता रहा है, जो उसके पिछले लक्ष्य 29,300 से 15 फीसदी कम है। लेकिन सोमवार के बंद भाव से करीब 6.4 प्रतिशत ज्यादा है। अगर तेल की कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो उसे वित्त वर्ष 2027 के आय अनुमानों में 10-15 प्रतिशत तक का जोखिम भी दिख रहा है।

नोमूरा में इंडिया इक्विटी रिसर्च के प्रमुख सायन मुखर्जी ने हाल में अपने एक नोट में लिखा, ‘हमारा बेस केस यह मानता है कि आय अनुमानों में 7.5 प्रतिशत की कमी आएगी और पीई मल्टीपल 18.5 गुना (पहले 21 गुना) रहेगा। हम दिसंबर में निफ्टी का लक्ष्य 21,000-29,100 के दायरे में देख रहे हैं। हमारे अनुमान में तेजी की सूरत यह है कि भू-राजनीतिक तनाव तुरंत कम हो जाएगा।’

सिटी रिसर्च के विश्लेषकों ने भी पश्चिम एशिया के संघर्ष के बीच 2026 के आखिर तक निफ्टी का अपना लक्ष्य 5.2 प्रतिशत घटाकर 27,000 कर दिया है। सिटी रिसर्च में विश्लेषक सुरेंद्र गोयल ने सोमवार को कहा, ‘जहां भारत की राजकोषीय और मौद्रिक प्रतिक्रिया इस पर निर्भर करती है कि संघर्ष कब तक चलेता है और कितना भीषण रहता है, वहीं कमाई पर इसका असर इस बात पर निर्भर करेगा कि आपूर्ति में रुकावट कितनी लंबी खिंचती है।’

खरीदें या बेचें?

नोमूरा का मानना है कि निकट भविष्य में 5 प्रतिशत की और गिरावट की संभावना है जो रूस-यूक्रेन युद्ध के दौरान हुई थी। इसका स्मॉल-कैप और मिड-कैप शेयरों पर तुलनात्मक रूप से अधिक जोखिम हो सकता है। मुखर्जी ने लिखा, ‘मौजूदा स्तरों से 5 प्रतिशत से ज्यादा की गिरावट लंबे समय के नजरिये से खरीदने का अच्छा मौका हो सकती है।’

भारतीय बाजारों (निफ्टी) में पिछले दो सप्ताह में 8 प्रतिशत की गिरावट आई है। नोमूरा के अनुसार पिछले एक दशक में इतनी बड़ी गिरावट सिर्फ दो बार देखने को मिली है। पहली बार 2020 में कोविड-19 महामारी के दौरान और दूसरी बार 2022 में रूस-यूक्रेन संघर्ष की शुरुआत में।

बाजार में गिरावट के इस दौर में नोमूरा को उम्मीद है कि कोयला, तेल उत्पादक, हेल्थकेयर, फार्मा, स्टैपल्स और टेलीकॉम सेक्टर बेहतर प्रदर्शन करेंगे। जहां एक ओर यह रिसर्च और ब्रोकरेज हाउस इन सेक्टरों को लेकर सकारात्मक बना हुआ है, वहीं उसे हेल्थकेयर और स्टैपल्स जैसे क्षेत्रों में मूल्यांकन काफी ज्यादा लग रहा है।

तेल का झटका

नोमूरा ने कहा कि उसके निफ्टी लक्ष्य में बदलाव और कॉरपोरेट कमाई पर मंडराता जोखिम कच्चे तेल की कीमतों में आई भारी तेजी के कारण है। होर्मुज स्ट्रेट से जुड़ी तनातनी के चलते कच्चे तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल को पार कर गई हैं।

पिछली बार तेल की कीमतें वर्ष 2022 में 100 डॉलर के पार पहुंची थीं। तब रूस-यूक्रेन संघर्ष शुरू हुआ था। नोमूरा का मानना है कि मौजूदा भू-राजनीतिक तनाव ज्यादा चिंताजनक है क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से दुनिया के तेल और एलएनजी व्यापार का 20-25 प्रतिशत हिस्सा आता है जबकि रूस से आपूर्ति लगभग 8-10 प्रतिशत है।

भारत के लिए, इसका असर और भी ज्यादा होने की आशंका है, क्योंकि होर्मुज स्ट्रेट से देश के कच्चे तेल और एलएनजी आयात का क्रमशः 43 प्रतिशत और 63 प्रतिशत हिस्सा आता है।

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First Published - March 16, 2026 | 10:12 PM IST

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