पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव के बीच सोमवार के कारोबारी सत्र में एग्रोकेमिकल शेयरों में 5 फीसदी तक की गिरावट दर्ज की गई। आपूर्ति श्रृंखला में व्यवधान, कच्चे माल की बढ़ती लागत और आने वाले मौसम की संभावित स्थितियों का असर प्रमुख कंपनियों के शेयरों पर पड़ा। इस क्षेत्र के शेयरों पर हालांकि दबाव था, लेकिन बेंचमार्क और अन्य सूचकांकों में 1.7 से 2.3 फीसदी तक की गिरावट देखी गई।
गुजरात नर्मदा वैली फर्टिलाइजर्स ऐंड केमिकल्स में 5.09 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। इसके बाद गुजरात स्टेट फर्टिलाइजर्स ऐंड केमिकल्स में 4.4 फीसदी की गिरावट आई, जबकि नैशनल फर्टिलाइजर्स और चंबल फर्टिलाइजर्स ऐंड केमिकल्स में 3.6 फीसदी की नरमी दर्ज हुई।
अन्य शेयरों में दीपक फर्टिलाइजर्स ऐंड पेट्रोकेमिकल्स कॉरपोरेशन (दीपक फर्टिलाइजर्स) में 3.18 फीसदी, फर्टिलाइजर्स ऐंड केमिकल्स त्रावणकोर में 2.57 फीसदी और पारादीप फॉस्फेट्स में 2.06 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई। सबसे बड़े सूचीबद्ध उर्वरक शेयर कोरोमंडल इंटरनैशनल में 1.13 फीसदी की गिरावट आई।
कोटक इंस्टिट्यूशनल के अनुसार, पश्चिम एशिया में लंबे समय तक चलने वाली अशांति से न केवल भारतीय रसायन कंपनियों की इनपुट लागत बढ़ सकती है, बल्कि कुछ कंपनियों के निर्यात राजस्व पर भी इसका असर पड़ सकता है। रिपोर्ट में बताया गया है कि जनवरी 2026 में भारत के जैविक और अजैविक रसायनों के निर्यात में मासिक आधार पर 5.1 फीसदी और सालाना आधार पर 0.2 फीसदी की गिरावट आई, जबकि आयात में मासिक आधार पर 12.3 फीसदी की वृद्धि हुई लेकिन सालाना आधार पर 0.2 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
एमके रिसर्च के अनुसार, इस संघर्ष के कारण आपूर्ति को लगे झटके से सभी मूल्य श्रृंखलाओं में, विशेष रूप से पेट्रोकेमिकल्स और उर्वरकों की कीमतों में भारी उछाल आई है। ब्रोकरेज फर्म का कहना है कि पश्चिम एशिया से अमोनिया, डायअमोनियम फॉस्फेट (डीएपी) और यूरिया के आयात में सख्ती और कतर एनर्जी के एलएनजी उत्पादन के निलंबन के दोहरे झटके से उर्वरक उद्योग को भारी नुकसान होगा। भारत अपनी एलएनजी आवश्यकता का 50 फीसदी के लिए कतर एनर्जी पर निर्भर है।