पोर्टफोलियो प्रबंधकों को एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव्स का ज्यादा इस्तेमाल करने की इजाजत देने का भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) का प्रस्ताव पोर्टफोलियो प्रबंधन सेवाओं (पीएमएस) के तहत निवेश की कई तरह की रणनीतियों का रास्ता खोल सकता है।
पीएमएस फर्मों और वेल्थ प्रबंधकों के अनुसार यह अतिरिक्त लचीलापन प्रबंधकों को लॉन्ग-शॉर्ट, मार्केट न्यूट्रल और हेज्ड इक्विटी रणनीतियों जैसे उत्पाद पेश करने में सक्षम बनाएगा। यह उन्हें कवर कॉल जैसी रणनीतियों का उपयोग करके अतिरिक्त कमाई करने की भी अनुमति देगा, साथ ही डाउनसाइड जोखिमों और बाजार के जोखिम का अधिक प्रभावी ढंग से मुकाबला करने में मदद करेगा।
वॉटरफील्ड एडवाइजर्स में लिस्टेड इन्वेस्टमेंट्स के कार्यकारी निदेशक अरुण प्रकाश ने कहा, ‘इससे डेरिवेटिव्स सिर्फ हेजिंग टूल से बदलकर ‘अल्फा-जेनरेशन’ इंस्ट्रूमेंट बन जाते हैं। इससे लॉन्ग-शॉर्ट इक्विटी स्ट्रैटेजी, कवर्ड-कॉल/पुट-राइट इनकम ओवरले, टैक्टिकल लेवरेज्ड इक्विटी प्ले और वोलैटिलिटी-हेज्ड पोर्टफोलियो जैसी योजना बनाना मुमकिन हो जाता है।’
पिछले सप्ताह जारी एक कंसल्टेशन पेपर में, सेबी ने पोर्टफोलियो प्रबंधकों को ग्राहक के पोर्टफोलियो के 125 प्रतिशत तक का कुल एक्सचेंज-ट्रेडेड डेरिवेटिव एक्सपोजर लेने की इजाजत देने का प्रस्ताव दिया है। इसमें 50 प्रतिशत तक की अनहेज्ड शॉर्ट पोजीशन और 10 प्रतिशत तक का ऑप्शन प्रीमियम एक्सपोजर शामिल है। अभी, पोर्टफोलियो प्रबंधक मुख्य रूप से हेजिंग और बेहतर पोर्टफोलियो मैनेजमेंट के लिए डेरिवेटिव का इस्तेमाल कर सकते हैं।
नियो वेल्थ मैनेजमेंट के प्रबंध निदेशक और मुख्य निवेश अधिकारी पवन कुमार ने कहा, ‘इन बदलावों से लॉन्ग-शॉर्ट और मार्केट-न्यूट्रल स्ट्रैटजी, हेज्ड इक्विटी पोर्टफोलियो, कवर्ड-कॉल रणनीतियों, वैश्विक आवंटन और दूसरे अलग तरह के प्रोडक्ट्स के लिए मौके बन सकते हैं। इससे मैनेजर बेहतर तरीके से डाउनसाइड रिस्क और मार्केट एक्सपोजर का प्रबंधन कर पाएंगे।’
वेल्लुम कैपिटल के मुख्य कार्याधिकारी और पोर्टफोलियो प्रबंधक मनीष भंडारी ने भी कहा कि अगर इन प्रस्तावों को लागू किया जाता है, तो इससे कवर्ड-कॉल ओवरले, प्रोटेक्टिव पुट और मार्केट-न्यूट्रल स्ट्रैटेजी जैसी अलग तरह की पेशकशों का रास्ता खुलेगा। उन्होंने कहा कि डेरिवेटिव में मिलने वाली अतिरिक्त स्वायत्तता से पोर्टफोलियो प्रबंधक ऐसे प्रोडक्ट बना सकेंगे जो अभी किसी भी परिसंपत्ति प्रबंधन ढांचे के जरिये निवेशकों के लिए उपलब्ध नहीं हैं।
पीएमएस कंपनियों और संपत्ति प्रबंधकों का मानना है कि डेरिवेटिव्स में लचीलेपन और निवेश के दायरे को बढ़ाने (जिसमें विदेशी प्रतिभूतियां और सूचीबद्ध होने वाली प्रतिभूतियां शामिल होंगी) के प्रस्ताव से पीएमएस, कैटेगरी 3 वैकल्पिक निवेश फंडों (एआईएफ) और स्पेशलाइज्ड इन्वेस्टमेंट फंड्स (एसआईएफ) के मुकाबले ज्यादा प्रतिस्पर्धी हो जाएगा, क्योंकि ये फंड अभी कई तरह की आधुनिक निवेश रणनीतियों की पेशकश करते हैं।
अमेट्रा पीएमएस के सह-संस्थापक और सीआईओ करण अग्रवाल ने कहा, ‘प्रस्तावित बदलावों से पीएमएस अब एआईएफ और एसआईएफ के साथ बराबरी के स्तर पर मुकाबला कर पाएंगे। इनसे न केवल उत्पाद नवाचार को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि व्यवसाय के विकास के लिए नए रास्ते भी खुलेंगे और पीएमएस मॉडल की लोकप्रियता में इजाफा होगा।’
एफवाईईआरएस ऐसेट्स के मुख्य निवेश अधिकारी संजीव सदानंद पाटकर ने कहा, ‘अगर इसे सही तरीके से लागू किया जाए, तो पीएमएस ऐसे खास और जोखिम बजट वाले उत्पाद पेश कर पाएगा जो पहले सिर्फ ऑफशोर हेज फंड या कैट-3 एआईएफ में ही मिलते थे।’
डिजर्व के सह-संस्थापक संदीप जेठवानी के अनुसार, हालांकि आधुनिक डेरिवेटिव रणनीति अभी भी एसआईएफ रूट के लिए ज्यादा बेहतर हो सकती हैं, लेकिन वैश्विक निवेश, गैर-सूचीबद्ध डेट और सूचीबद्ध होने वाली प्रतिभूतियों को शामिल करने से पोर्टफोलियो प्रबंधकों के लिए ज्यादा बेहतर संपत्ति समाधान देने का मौका बनता है।