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Private Equity निवेशक अब MedTech और Diagnostics सेक्टर में तेजी से निवेश बढ़ा रहे हैं

Last Updated- July 13, 2026 | 8:15 AM IST
Private Equity

प्राइवेट इक्विटी निवेशक अस्पतालों से हटकर मेडिकल उपकरणों (मेडटेक) पर तेजी से अपना ध्यान केंद्रित कर रहे हैं। साथ ही डायग्नोस्टिक में फिर से दिलचस्पी देखी जा रही है। ऐसा इसलिए है क्योंकि ऐसा इसलिए है क्योंकि देश के स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में दमदार सौदों की गतिविध के बावजूद अस्पाल परिसंपत्तियों के बढ़ते मूल्यांकन की वजह से निवेशक ज्यादा सोच-समझकर निवेश कर रहे हैं।

बीमा के बढ़ते दायरे और मांग-आपूर्ति के बीच बढ़ते अंतर की वजह से अस्पताल निवेश का आकर्षक जरिया बने हुए हैं। अलबत्ता समरसेट इंडस के संस्थापक साझेदार मयूर सरदेसाई का कहना है कि पिछले दो से तीन साल के दौरान मूल्यांकन में हुई तेज बढ़ोतरी ने निवेशकों को अस्पतालों से हटकर दूसरे विकल्पों पर विचार करने के लिए प्रेरित किया है।

उन्होंने कहा, ‘मेडटेक एक और ऐसा क्षेत्र है जो अब जोर पकड़ रहा है और निवेशक कारोबारों को एक साथ लाने के लिए प्लेटफॉर्म बना रहे हैं।’ उन्होंने कहा कि डायग्नोस्टिक क्षेत्र में भी फिर से तेजी देखी जा रही है, क्योंकि निवेशक ऐसे क्षेत्र तलाश रहे हैं जिनमें सूचीबद्ध कंपनियां कम हों और निकासी के बेहतर मौके हों।

टाटा कैपिटल हेल्थकेयर फंड भी इसी चलन को मानता है। इसने मेडिकल उपकरण तथा अनुबंध के आधार पर विकास और विनिर्माण करने वाली कंपनियों (सीडीएमओ) को स्वास्थ्य सेवा में निवेश के लिए सबसे आकर्षक क्षेत्र माना है। टाटा कैपिटल हेल्थकेयर फंड की प्रबंध साझेदार विशालाक्षी चंद्रमौलि के अनुसार मेडिकल उकरण क्षेत्र को जोरदार घरेलू मांग, आयात विकल्प और निर्यात के मौकों से फायदा हो रहा है। साथ ही सीडीएमओ को चीन प्लस-1 रणनीति और वैश्विक दवा कंपनियों द्वारा आपूर्ति बढ़ाने से फायदा मिल रहा है।

फार्मास्युटिकल, अस्पताल और डायग्नोस्टिक क्षेत्र भी संरचनात्मक मांग और बीमा के बढ़ते दायरे की मदद से लगातार पूंजी आकर्षित कर रहे हैं। यह क्षेत्र प्राइवेट इक्विटी के लिए सबसे व्यस्ततम क्षेत्रों में से एक बना हुआ है। टाटा कैपिटल हेल्थकेयर फंड का अनुमान है कि भारतीय स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में हर साल करीब 120 सौदों के जरिये सालाना लगभग 6 अरब डॉलर का निजी इक्विटी निवेश आया है।

निवेश निकासी गतिविधि भी मजबूत हुई है। स्वास्थ्य सेवा क्षेत्र में निकासी का मूल्य वित्त वर्ष 19 में दर्ज 1.2 अरब डॉलर से बढ़कर वित्त वर्ष 25 में लगभग पांच बढ़कर 6.2 अरब डॉलर हो गया है। साथ ही वित्त 26 में लगभग 5.6 अरब डॉलर की निकासी दर्ज की गई है।

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First Published - July 13, 2026 | 8:15 AM IST

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