नैशनल सिक्योरिटीज डिपोजिटरी (एनएसडीएल) ने उन कुछ विदेशी फंडों की समस्याओं को दूर किया है जिनके खाते नियामकीय उल्लंघन की वजह से फ्रीज कर दिए गए। इनमें से कुछ फंडों में अलबुला इन्वेस्टमेंट फंड, क्रेस्टा फंड, और एपीएमएस इन्वेस्टमेंट फंड शामिल हैं। ये फंड अदाणी समूह के शेयरों में अपने निवेश के लिए सुर्खियों में हैं।
घरेलू शेयरों में विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) निवेश पर नजर रखने की जिम्मेदारी संभाल रही एनएसडीएल ने अपनी वेबसाइट पर इनके नामों में ‘जीडीआर’ जोड़ दिया है।
इस कदम का मकसद यह दर्शाना है कि इन एफपीआई के सिर्फ वैश्विक डिपोजिटरी रिसीप्ट (जीडीआर) संबंधित खातों को फ्रीज के दायरे में लाया गया है।
पिछले महीने इन फंडों के दर्जे से जुड़ी अनिश्चितता ने निवेशकों में आशंका पैदा कर दी है, जिससे अदाणी समूह कंपनियों के शेयरों में गिरावट को बढ़ावा मिला और बाजार पूंजीकरण में 50,000 करोड़ रुपये से ज्यादा की कमी आई थी।
एक बाजार विश्लेषक ने कहा, ‘एनएसडीएल के ताजा कदम से यह स्पष्ट हो गया है कि अकाउंट लेवल फ्रीज की समस्या सिर्फ एफपीआई के जीडीआर खातों से ही संबंधित है। वहीं तीन फंडों के अन्य लाभार्थी ट्रेडिंग खातें परिचालन में बने हुए हैं।’
एनएसडीएल की वेबसाइट पर 31 मई को उपलब्ध आंकड़े में अलबुला इन्वेस्टमेंट फंड, क्रेस्ट फंड और एपीएमएस इन्वेस्टमेंट फंड पर ‘अकाउंट लेवल फ्रीज’ लिखा दिखाया गया था। इन मॉरिशस स्थित एफपीआई का अदाणी समूह कंपनियों में संयुक्त रूपा से 40,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का निवेश है।
14 जून को, सभी 6 अदाणी समूह शेयरों में उन खबरों के बाद गिरावट आ गई थी जिनमें कहा गया कि इन फंडों के खाते फ्रीज कर दिए गए हैं।
अदाणी समूह, एनएसडीएल और फंडों ने तुरंत यह स्पष्ट कर दिया था कि इन फंडों की मौजूदा स्थिति सक्रिय बनी हुई है और उन्हें स्वतंत्र रूप से प्रतिभूतियों की खरीद-बिक्री की अनुमति दी गई थी।
इस मौजूदा स्थिति के बारे में एनएसडीएल की वेबसाइट पर जानकारी दी गई थी और यह बाजार नियामक सेबी द्वारा पांच साल पुराने आदेश से संबंधित थी और इससे इनन फंडों के सिर्फ जीडीआर खाते प्रभावित हुए थे।
उद्योग के कारोबारियों का कहना है कि इस घटनाक्रम के बाद एनएसडीएल को अपनी वेबसाइट पर ज्यादा पारदर्शी आंकड़े मुहैया कराने पर जोर देना चाहिए।