नोमूरा ने भारतीय शेयरों की रेटिंग ओवरवेट से घटाकर न्यूट्रल कर दी है। इसके पीछे उसने पश्चिम एशिया में चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के बीच तेल की बढ़ती कीमतों से पैदा जोखिम, घरेलू निवेश की आवक में संभावित सुस्ती, और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के क्षेत्र में भारत की कमजोर स्थिति से जुड़ी चिंता का हवाला दिया है।
ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि होर्मुज़ स्ट्रेट के रास्ते ऊर्जा आपूर्ति में लंबे समय तक रुकावट रही तो तेल की कीमतें पहले के अनुमान से भी ज्यादा समय तक ऊंची रह सकती हैं, जिससे भारत की अर्थव्यवस्था और कंपनियों की आय को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ सकता है।
नोमूरा के अनुसार, आयात पर भारी निर्भरता के कारण भारत एशिया की उन अर्थव्यवस्थाओं में से एक है जो ऊर्जा की लगातार ऊंची कीमतों के प्रति सबसे ज्यादा संवेदनशील हैं। नोमूरा के इक्विटी रणनीतिकार (एशिया प्रशांत) चेतन सेठ ने 1 अप्रैल के नोट में लिखा, बढ़ती/ऊंची तेल/ कमोडिटी की कीमतें ऐतिहासिक रूप से भारतीय शेयर बाजार के लिए कमजोरी का मुख्य कारण रही हैं और यह स्थिति एक बार फिर से भारतीय इक्विटी बाजार के लिए बड़ी भारी बाधा बनती जा रही है। वैश्विक ब्रोकरेज फर्म ने निवेशकों को सलाह दी है कि वे दक्षिण कोरिया और चीन का रुख करें, जिन्हें लेकर फर्म का रुख ओवरवेट है।
नोमूरा ने यह भी बताया कि भारतीय शेयर बाजारों ने दक्षिण एशिया के अन्य बाजारों के मुकाबले कमजोर प्रदर्शन किया है, खासकर इसलिए कि वैश्विक निवेशक उन बाजारों की ओर ज्यादा आकर्षित हो रहे हैं, जो मौजूदा एआई आधारित टेक्नॉलजी के चक्र से सीधे तौर पर जुड़े हुए हैं। सेठ ने कहा कि ये चिंताएं अभी भी बनी हुई हैं।
उन्होंने कहा, युद्ध शुरू होने से भी पहले भी निवेशक एआई और भारत के आबादी लाभ, खपत के आउटलुक और स्ट्रक्चरल कहानी पर इसके असर को लेकर चिंतित दिख रहे थे। हालांकि हमारा मानना है कि अभी कोई पक्का नतीजा निकालना जल्दबाजी होगी, फिर भी ये चिंताएं निवेशकों के मनोबल पर तब तक भारी पड़ सकती हैं जब तक कि गलत साबित न हो जाएं। साथ ही उन्होंने भारत को बिना एआई वाला बाजार बताया।
विदेशी पोर्टफोलियो निवेशक (एफपीआई) लगातार बिकवाली कर रहे हैं। उन्होंने 2024 के आखिर से अब तक करीब 61 अरब डॉलर के भारतीय शेयर बेच दिए हैं। घरेलू निवेशकों ने अब तक सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी) के जरिये आने वाले निवेश से इस असर को काफी हद तक संभाला है। लेकिन नोमुरा ने चेतावनी दी है कि अगर बाजार का रिटर्न कम रहता है तो निवेशकों की भागीदारी में कमी आ सकती है। ब्रोकरेज ने कहा कि मूल्यांकन भी चिंता का मसला बने हुए हैं।
एमएससीआई इंडिया इंडेक्स अपनी आगे की कमाई के लगभग 18.9 गुना पर कारोबार कर रहा है, जो एशिया के दूसरे देशों (जापान को छोड़कर) के मुकाबले 55 फीसदी ज़्यादा है जबकि कमाई के अनुमानों में अभी तक ऊर्जा की ज्यादा की कीमतों से होने वाले संभावित नुकसान के जोखिमों को पूरी तरह से शामिल नहीं किया गया है। पिछले महीने नोमूरा के भारतीय रणनीतिकार ने कमाई में बढ़ोतरी के अनुमानों पर जोखिमों का हवाला देते हुए दिसंबर 2026 के लिए निफ्टी के लक्ष्य को 29,300 से घटाकर 24,900 कर दिया था।