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बॉन्ड यील्ड बढ़ने के बीच लार्ज कैप शेयर आकर्षक, मिडकैप-स्मॉलकैप में बढ़ा वैल्यूएशन जोखिम

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2012 से अब तक के साप्ताहिक आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले 10 सालों में निफ्टी 50 के लिए इक्विटी रिस्क प्रीमियम सहज स्तर पर रहा है

Last Updated- September 02, 2026 | 11:16 PM IST
Large Cap Funds
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

बॉन्ड यील्ड बढ़ने के बावजूद लार्जकैप शेयर अपेक्षाकृत आकर्षक हो गए हैं। लेकिन मिडकैप और खासकर स्मॉलकैप शेयरों के मामले में ऐसा नहीं है क्योंकि उनके पीई मल्टीपल ज्यादा हैं। बॉन्ड बाजार की स्थिति भारतीय निवेशकों को लार्जकैप शेयरों के बारे में कुछ संकेत दे रही है। आज जब 10 साल के बॉन्ड की यील्ड 6.9 फीसदी तक पहुंच गई तो भारतीय बाजार के निवेशक चिंतित हो गए, खासकर ऐसे समय में जब निफ्टी 50 इंडेक्स ने पिछले एक साल में 3% का घाटा दिया है और तेल की कीमतें बढ़ रही हैं।

लेकिन 2012 के आंकड़ों से पता चलता है कि निफ्टी 50 के लिए इक्विटी रिस्क प्रीमियम (यानी शेयर से होने वाली कमाई और 10 साल के सरकारी बॉन्ड से मिलने वाले रिटर्न के बीच का अंतर) दीर्घावधि के सबसे अच्छे स्तर पर है। भले ही साल भर बेंचमार्क यील्ड बढ़ी हो और अर्निंग्स यील्ड 4.61 फीसदी है, फिर भी निफ्टी 50 इंडेक्स आकर्षक लग रहा है।

2012 से अब तक के साप्ताहिक आंकड़ों से पता चलता है कि पिछले 10 सालों में निफ्टी 50 के लिए इक्विटी रिस्क प्रीमियम सहज स्तर पर रहा है। मायनस 2.41% पर इक्विटी रिस्क प्रीमियम 66वें परसेंटाइल पर है। इसका सीधा सा मतलब है कि 2012 के बाद से 66 फीसदी हफ्तों में अर्निंग यील्ड और बॉन्ड यील्ड के बीच का अंतर अभी की तुलना में ज्यादा था। निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स के लिए यही आंकड़ा मायनस 3.85 (26वां परसेंटाइल) है और स्मॉल कैप इंडेक्स के लिए मायनस 3.61 (32वां परसेंटाइल) है। 

हालांकि ऐतिहासिक आधार पर लार्ज-कैप सेगमेंट आकर्षक लग रहा है, लेकिन मिडकैप और स्मॉलकैप महंगे हैं। 31 गुना और 33 गुने के पीई  मल्टीपल के साथ यह एक ऐसा सेगमेंट है जो पिछले 14 वर्षों की तुलना में बहुत महंगा है। उनका रिस्क प्रीमियम पिछले 14 सालों के निचले क्वार्टाइल में है, जो 2023-24 की उस तेजी का असर है जिसे नियामक ने खुद अत्यधिक तेजी वाला बताया था। इससे हम एक दिलचस्प बाजार की स्थिति में पहुंचते हैं, जो दो दिशाओं में आगे बढ़ेगा। एक तरफ़ वैल्यू के लिहाज से खरीद वाला लार्ज-कैप सेगमेंट है यानी भारत की ब्लूचिप कंपनियां, जो पिछले दो सालों से विदेशी निवेश की निकासी की मार झेल रही हैं और दूसरी तरफ स्मॉलकैप में जबरदस्त तेजी है, जिसने कोविड के बाद खुदरा निवेश की लहर को आगे बढ़ाया था, लेकिन अब इसे बॉन्ड बाजार की चुनौतियों का सामना करना पड़ेगा। फंड की ज्यादा लागत इस सेगमेंट पर हर स्तर पर असर डालेगी, चाहे वह पैसा जुटाने की बात हो या कच्चे माल की लागत की।

जियोजित इन्वेस्टमेंट्स के मुख्य निवेश रणनीतिकार वी.के. विजयकुमार का कहना है, वित्त वर्ष 27 में शेयर बाजार से मिलने वाले रिटर्न में काफी सुधार की उम्मीद है। वित्त वर्ष 27 की पहली तिमाही के जीडीपी आंकड़े और कंपनियों के पहली तिमाही के नतीजे बेहतर संभावनाओं का संकेत दे रहे हैं। वित्त वर्ष 27 में निफ्टी 50 की कमाई में 12 से 15 फीसदी तक की बढ़ोतरी हो सकती है। व्यापक बाजार में 15 फीसदी से ज्यादा आय देने की क्षमता है। एफआईआई और घरेलू निवेशक आगे चलकर इक्विटी निवेश को लेकर आशावादी हो सकते हैं।

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First Published - September 2, 2026 | 11:16 PM IST

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