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Investment Strategy: स्मॉलकैप और मिडकैप की तेजी पड़ सकती है धीमी, अब बड़ी कंपनियों के शेयरों की आ सकती है बारी

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मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की तेज रैली के बाद क्या अब लार्जकैप शेयरों की बारी है? जानिए वैल्यूएशन, एफआईआई की वापसी और एक्सपर्ट्स की राय

Last Updated- July 17, 2026 | 3:43 PM IST
Large Cap Stocks

पिछले कुछ महीनों में शेयर बाजार में सबसे ज्यादा कमाई मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों ने कराई है। लेकिन अब कई विश्लेषकों का मानना है कि आने वाले समय में बड़ी कंपनियों यानी लार्जकैप शेयरों का प्रदर्शन बेहतर हो सकता है। इसकी सबसे बड़ी वजह इन शेयरों की अपेक्षाकृत कम वैल्यूएशन और विदेशी निवेशकों की वापसी की उम्मीद है।

इस वित्त वर्ष में किसने दिया ज्यादा रिटर्न?

वित्त वर्ष 2027 में अब तक सेंसेक्स करीब 8.4 फीसदी और निफ्टी 8.7 फीसदी चढ़े हैं। वहीं निफ्टी मिडकैप 100 इंडेक्स में 18.4 फीसदी और निफ्टी स्मॉलकैप 100 इंडेक्स में करीब 26 फीसदी की तेजी आई है। घरेलू निवेशकों की लगातार खरीदारी की वजह से मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों में जोरदार तेजी देखने को मिली।

लार्जकैप क्यों रहे पीछे?

विश्लेषकों के मुताबिक मार्च से जून के बीच विदेशी संस्थागत निवेशकों ने भारतीय बाजार से करीब 28 अरब डॉलर निकाले। विदेशी निवेशक आमतौर पर बड़ी कंपनियों के शेयरों में ज्यादा निवेश करते हैं। यही वजह रही कि इस दौरान लार्जकैप शेयरों का प्रदर्शन कमजोर रहा।

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अब क्यों बदल सकती है तस्वीर?

ब्रोकरेज फर्म बर्नस्टीन का कहना है कि अब हालात धीरे धीरे बदल सकते हैं। अगर वैश्विक तनाव कम होता है और विदेशी निवेशकों की वापसी होती है, तो सबसे पहले फायदा बड़ी कंपनियों के शेयरों को मिल सकता है। बर्नस्टीन के मैनेजिंग डायरेक्टर वेणुगोपाल गारे और निखिल अरेला का कहना है कि पिछले 9 से 10 महीनों में घरेलू निवेशकों ने मिडकैप और स्मॉलकैप में काफी निवेश किया है। ऐसे में अब निवेश का कुछ हिस्सा लार्जकैप की तरफ जा सकता है।

मिडकैप और स्मॉलकैप अब महंगे हो चुके हैं

बर्नस्टीन के मुताबिक मिडकैप और स्मॉलकैप शेयरों की वैल्यूएशन अब अपने लंबे समय के औसत से काफी ऊपर पहुंच गई है। मिडकैप का वैल्यूएशन फिलहाल 1.5 गुना है, जबकि इसका लंबी अवधि का औसत 1.31 गुना है। वहीं स्मॉलकैप का वैल्यूएशन 1.33 गुना है, जबकि इसका ऐतिहासिक औसत 0.97 गुना रहा है।

क्या मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी खत्म हो जाएगी?

बर्नस्टीन का मानना है कि ऐसा नहीं है। हालांकि अगर लार्जकैप शेयरों में तेजी आती है तो उसका कुछ असर मिडकैप और स्मॉलकैप पर पड़ सकता है। यानी आने वाले समय में इन दोनों सेगमेंट की तेजी पहले जैसी तेज नहीं रह सकती।

एक्सपर्ट क्या कह रहे हैं?

एक्सिस म्युचुअल फंड के एमडी और सीईओ बी गोपकुमार का कहना है कि वैल्यूएशन के लिहाज से लार्जकैप शेयर अभी भी मिडकैप और स्मॉलकैप के मुकाबले बेहतर स्थिति में हैं। हालांकि मिडकैप और स्मॉलकैप कंपनियों की कमाई की रफ्तार मजबूत रही है, इसलिए निवेशक अब भी इनमें बेहतर रिटर्न की उम्मीद कर रहे हैं।

ग्लोबल रणनीतिकार क्रिस्टोफर वुड के मुताबिक पिछले दो साल में मिडकैप 150 कंपनियों की कमाई सालाना औसतन 18 फीसदी की दर से बढ़ी है। इसके मुकाबले निफ्टी 100 की बड़ी कंपनियों की कमाई सिर्फ 8 फीसदी सालाना बढ़ी है।

निवेशकों को क्या करना चाहिए?

अल्फानिटी फिनटेक के सह संस्थापक यू आर भट्ट का कहना है कि मिडकैप और स्मॉलकैप में तेज उछाल के बाद अब निवेशकों को बहुत सोच समझकर शेयर चुनने चाहिए। अगर पश्चिम एशिया का तनाव कम होता है और विदेशी निवेशक दोबारा भारतीय बाजार में लौटते हैं, तो बड़ी कंपनियों के शेयर फिर से निवेशकों की पहली पसंद बन सकते हैं।

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First Published - July 17, 2026 | 3:43 PM IST

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