नेशनल स्टॉक एक्सचेंज यानी NSE के लंबे समय से अटके IPO को बाजार नियामक भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) से मंजूरी मिल गई है। इसके साथ ही देश के बड़े शेयर बाजारों में शामिल NSE के सार्वजनिक होने का रास्ता साफ हो गया है। मौजूदा जानकारी के मुताबिक, NSE का IPO देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO हो सकता है।
सूत्रों के मुताबिक, NSE अगले हफ्ते IPO का प्राइस बैंड जारी कर सकता है। इसके लिए शेयरों की बिक्री 15 सितंबर से शुरू होने की संभावना है। वहीं, NSE के शेयरों की BSE पर लिस्टिंग 25 सितंबर तक हो सकती है।
NSE के IPO लाने की कोशिश करीब एक दशक से चल रही है। हालांकि, को-लोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़े मामलों के चलते यह प्रक्रिया लंबे समय तक आगे नहीं बढ़ पाई। एक्सचेंज ने इसी साल जून में SEBI के पास IPO से जुड़े दस्तावेज दोबारा जमा किए थे। अब नियामक की मंजूरी मिलने के बाद NSE के IPO की प्रक्रिया आगे बढ़ने की उम्मीद है।
NSE का IPO पूरी तरह ऑफर फॉर सेल यानी OFS के जरिए आएगा। इसके तहत मौजूदा शेयरधारक NSE के 14.89 करोड़ तक शेयर बेचेंगे। इन शेयरों की फेस वैल्यू 1 रुपये है और ये शेयर NSE की कुल चुकता पूंजी का करीब 6 फीसदी हिस्सा हैं।
इस IPO में NSE कोई नया शेयर जारी नहीं करेगा। ऐसे में शेयरों की बिक्री से मिलने वाली पूरी रकम NSE को नहीं मिलेगी, बल्कि उन मौजूदा शेयरधारकों को जाएगी जो अपने शेयर बेच रहे हैं।
IPO का आकार करीब 30,000 करोड़ रुपये रहने का अनुमान है। अगर इश्यू इसी आकार में आता है तो यह देश का अब तक का सबसे बड़ा IPO होगा। फिलहाल सबसे बड़े IPO का रिकॉर्ड हुंडई मोटर इंडिया के पास है, जिसने 2024 में करीब 28,000 करोड़ रुपये जुटाए थे।
अनलिस्टेड बाजार में NSE के शेयर करीब 1,975 रुपये प्रति शेयर के भाव पर कारोबार कर रहे थे। अनलिस्टेड जोन के आंकड़ों के मुताबिक, इस भाव पर NSE का कुल बाजार मूल्य करीब 4.88 लाख करोड़ रुपये है।
NSE की सबसे बड़ी शेयरधारक भारतीय जीवन बीमा निगम यानी LIC है। LIC के पास NSE की 10.72 फीसदी हिस्सेदारी है। हालांकि, LIC इस IPO में अपने शेयर नहीं बेच रही है और IPO के बाद भी उसकी पूरी हिस्सेदारी बनी रहेगी।
इस IPO में अपने शेयर बेचने वाले प्रमुख मौजूदा निवेशकों में स्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI) और SBI कैपिटल, बैंक ऑफ बड़ौदा, एमएस स्ट्रैटेजिक (मॉरीशस) और अरंडा इन्वेस्टमेंट्स (मॉरीशस), कनाडा पेंशन प्लान इन्वेस्टमेंट बोर्ड, स्टॉक होल्डिंग कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया, जनरल इंश्योरेंस कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया (GIC), नेशनल इंश्योरेंस कंपनी और यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी शामिल हैं।
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NSE के शुरुआती निवेशकों को IPO के जरिए काफी फायदा होने की उम्मीद है। SBI ने NSE के शेयर औसतन करीब 0.8 रुपये प्रति शेयर की लागत पर खरीदे थे। वहीं, बैंक ऑफ बड़ौदा की NSE में हिस्सेदारी की खरीद लागत करीब 0.54 रुपये प्रति शेयर रही थी।
NSE ने अपने IPO की तैयारी के लिए कुल 20 निवेश बैंकों को जिम्मेदारी सौंपी है। किसी IPO के लिए इतनी बड़ी संख्या में निवेश बैंकों की नियुक्ति अपने आप में खास है।
NSE का प्रदर्शन भी मजबूत रहा है। जून 2026 में खत्म हुई पहली तिमाही यानी Q1FY27 में एक्सचेंज का मुनाफा 3,120 करोड़ रुपये रहा। पिछले साल की इसी तिमाही में NSE को 2,923 करोड़ रुपये का मुनाफा हुआ था।
इस दौरान NSE की आय भी बढ़ी। जून तिमाही में यह बढ़कर 4,560 करोड़ रुपये हो गई, जबकि एक साल पहले इसी अवधि में आय 4,032 करोड़ रुपये थी। हालांकि, मार्च 2026 में खत्म हुई पिछली तिमाही के मुकाबले जून तिमाही की आय में 8 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई।
NSE के IPO की राह साफ होने से पहले इससे जुड़े पुराने कानूनी मामलों में भी अहम घटनाक्रम हुआ। IPO को SEBI की मंजूरी मिलने से एक दिन पहले सुप्रीम कोर्ट ने को-लोकेशन और डार्क फाइबर मामलों में SEBI की अपीलों का निपटारा कर दिया था।
यह कार्रवाई NSE की ओर से 1,491.21 करोड़ रुपये के समझौते के बाद हुई। को-लोकेशन और डार्क फाइबर से जुड़े मामले ही NSE के IPO की प्रक्रिया लंबे समय तक अटकने की प्रमुख वजहों में रहे थे।