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20% और टूट सकता है भारतीय बाजार! मार्क फेबर की चेतावनी से निवेशकों में बढ़ी चिंता

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मार्क फेबर ने भारतीय शेयर बाजार में 20% तक और गिरावट की आशंका जताते हुए निवेशकों को फिलहाल नकदी और बॉन्ड पर फोकस रखने की सलाह दी है।

Last Updated- June 23, 2026 | 8:04 AM IST
Stock Market
Representative image

पश्चिम एशिया युद्ध ने पिछले कुछ महीनों में वैश्विक वित्तीय बाजारों को झकझोर दिया है। ‘द ग्लूम, बूम ऐंड डूम रिपोर्ट’ के संपादक और प्रकाशक मार्क फेबर ने पुनीत वाधवा को फोन पर दिए साक्षात्कार में बताया कि उनकी सलाह फिलहाल नकदी और बॉन्ड में निवेश बनाए रखने की
है। पेश हैं उनसे हुई बातचीत
के अंश:

क्या बाजारों ने पश्चिम एशिया युद्ध के समाधान की संभावना को पूरी तरह नजरअंदाज कर दिया है?

वैश्विक शेयर बाजार कोई एक बाजार नहीं हैं। विभिन्न देशों और उद्योगों में कई बाजार हैं। कुछ शेयर अत्यधिक मूल्यवान हैं, खासकर अमेरिका में। एआई और सेमीकंडक्टर से जुड़ा कुछ भी आज आसमान पर है और आय का अनुमान बहुत अधिक है। मेरे विचार में यह अवास्तविक है। निवेश के बुलबुले या उन्माद में कमाई के अनुमान को आमतौर पर अत्यधिक बढ़ा-चढ़ाकर बताया जाता है। कभीन कभी कमाई उम्मीदों पर खरी नहीं उतर पाती है और शेयरों में भारी गिरावट आती है।

वर्तमान में, बहुत सस्ते शेयर मिलना मुश्किल है। इसका एक उदाहरण इंडोनेशियाई शेयर हो सकते हैं। वे इस साल 30 प्रतिशत तक गिर गए हैं, जबकि वे लंबी अवधि से कमजोरी का सामना कर रहे थे। मेरा मानना है कि वे अब उचित मूल्य पर हैं, लेकिन मुझे नहीं लगता कि थोड़े समय में वे बहुत अधिक बढ़ेंगे।

भारत के बारे में आप क्या कहना चाहेंगे?

मेरा मानना है कि भारत ने मंदी की शुरुआत हो गई है और इसमें अभी और गिरावट आएगी। इसका अर्थव्यवस्था से कोई लेना-देना नहीं है। अर्थव्यवस्था अच्छा कर रही है, लेकिन शेयर बाजार इतने सस्ते नहीं कि मैं खरीद लूं। तथापि भारतीय बाजार 2024 की तुलना में सस्ते हैं क्योंकि बाजार नीचे आ गए हैं। तब से रुपये-डॉलर की कीमत में भी बदलाव आया है। मुझे लगता है कि भारतीय बाजार यहां से 20 प्रतिशत तक और नीचे जा सकते हैं।

भारतीय बाजारों में गिरावट के मुख्य कारक क्या हो सकते हैं?

मेरा मानना है कि कंपनियों की कमाई का प्रदर्शन निराश करना शुरू करेगा और इसका बाजार के मनोबल पर असर पड़ेगा। हमें यह भी ध्यान रखना होगा कि आजकल बाजार वैश्विक तरलता से चलते हैं, जो अभी भी बढ़ रही है, लेकिन इसकी गति पहले की तुलना में धीमी है। इस सबका भविष्य में भारतीय शेयर बाजारों पर असर पड़ेगा।

पश्चिम एशिया की घटनाओं पर वैश्विक वित्तीय बाजारों की कैसी प्रतिक्रिया है?

एशियाई बाजार ठीक-ठाक हैं। दक्षिण कोरिया और ताइवान जैसे कुछ बाजार बहुत ज्यादा सट्टेबाजी वाले और ऊंचे स्तर पर हैं। लेकिन ये सभी शेयरों की वजह से नहीं, बल्कि मुट्ठीभर शेयरों की वजह से बढ़ रहे हैं। कोरियाई बाजार में दो या तीन शेयरों का दबदबा है, जिनसे आधा से अधिक बाजार पूंजीकरण है। ये शेयर हैं- एसके हाइनिक्स और सैमसंग इलेक्ट्रॉनिक्स। यही स्थिति ताइवान की है। ताइवान सेमीकंडक्टर सबसे बड़ी कंपनी है।

सोना, चांदी और कच्चे तेल पर आपकी क्या प्रतिक्रिया है?

मैं कीमती धातुओं, विशेषकर सोने और चांदी को लेकर सकारात्मक हूं। वर्ष 2024 से 2026 की शुरुआत तक हमने इनमें जोरदार तेजी देखी गई। अभी हम गिरावट के दौर से गुजर रहे हैं और मेरी राय में यह गिरावट अभी समाप्त नहीं हुई है। संभावना है कि इन धातुओं की कीमतें अभी और नीचे जाएंगी। हालांकि, लंबी अवधि के लिए मेरा मानना है कि लोगों को कुछ कीमती धातुएं रखनी चाहिए। कच्चे तेल की बात करें तो, मुझे नहीं लगता कि यह इस समय बहुत महंगा है। इसमें एक बड़ी उछाल आई थी और फिर इसमें गिरावट आई। अमेरिका-ईरान संघर्ष का समाधान बहुत जटिल है और इसमें समय लगेगा। मेरी राय में, तेल की कीमतें नीचे जाने के बजाय ऊपर
ही जाएंगी।

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First Published - June 23, 2026 | 8:04 AM IST

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