भारतीय बीमा सेक्टर में बड़ा बदलाव होने वाला है। बीमा नियामक इरडा (IRDAI) ने इंड एएस (Ind AS) लागू करने की दिशा में कदम बढ़ा दिए हैं और इसे 1 अप्रैल 2026 से लागू करने की तैयारी है। एमके (Emkay) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस नए अकाउंटिंग नियम से लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों की कमाई और नेटवर्थ का आंकड़ा काफी बेहतर दिखेगा, हालांकि असल कारोबार पर इसका कोई असर नहीं पड़ेगा।
इंड एएस अंतरराष्ट्रीय मानकों (IFRS) के अनुरूप तैयार अकाउंटिंग सिस्टम है, जिसका उद्देश्य कंपनियों के वित्तीय नतीजों को ज्यादा पारदर्शी और तुलनात्मक बनाना है। दुनिया के कई देशों में बीमा कंपनियां पहले ही IFRS 17 लागू कर चुकी हैं, जबकि भारत में यह कदम अब उठाया जा रहा है।
एमके की रिपोर्ट के अनुसार, Ind AS लागू होने के बाद कंपनियां पॉलिसी बेचने में होने वाले खर्च और कमीशन को एक साथ दिखाने के बजाय पूरे पॉलिसी अवधि में फैलाकर दिखाएंगी। अभी तक इन खर्चों को शुरुआत में ही दिखाया जाता था, जिससे शुरुआती सालों में मुनाफा कम नजर आता था। नए सिस्टम में यह दबाव कम हो जाएगा और कंपनियों की असली कमाई बेहतर तरीके से सामने आएगी। खासकर तेजी से बढ़ रही कंपनियों को इसका ज्यादा फायदा मिलेगा।
रिपोर्ट में कहा गया है कि Ind AS लागू होने के बाद लाइफ इंश्योरेंस कंपनियों के मुनाफे (PAT) में 1.5 से 3 गुना तक की बढ़ोतरी दिख सकती है। कुछ छोटी कंपनियों में यह उछाल और ज्यादा हो सकता है। साथ ही, कंपनियों की बैलेंस शीट भी मजबूत नजर आएगी क्योंकि नेटवर्थ और कुल वैल्यू को बेहतर तरीके से दिखाया जाएगा।
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अभी तक इंश्योरेंस कंपनियों की वैल्यू समझने के लिए इंडियन एंबेडेड वैल्यू (IEV) का इस्तेमाल होता है। लेकिन इंड एएस लागू होने के बाद मुनाफा और बैलेंस शीट खुद ज्यादा साफ तस्वीर दिखाएंगे, जिससे IEV की जरूरत कम हो सकती है या उसका फॉर्म बदल सकता है।
रिपोर्ट साफ करती है कि इंड एएस लागू होने से कंपनियों की सॉल्वेंसी (पूंजी की मजबूती) या डिविडेंड देने की क्षमता पर कोई असर नहीं पड़ेगा। ये अभी भी पुराने IGAAP नियमों और भविष्य में आने वाले नए पूंजी नियमों पर निर्भर रहेंगे।
एमके का कहना है कि इंड एएस कोई जादू नहीं है जो कंपनियों का असली मुनाफा बदल दे। बीमा कंपनियों की कमाई अभी भी पॉलिसी, लागत, ग्राहक बने रहने और प्राइसिंग जैसे फैक्टर्स पर निर्भर रहेगी। लेकिन यह नया सिस्टम कंपनियों की असली आर्थिक स्थिति को ज्यादा साफ और सटीक तरीके से दिखाएगा।
इंड एएस लागू होने के बाद निवेशकों के लिए इंश्योरेंस कंपनियों का मूल्यांकन आसान हो जाएगा। अब पी/ई और पी/बी जैसे आम पैमाने ज्यादा भरोसेमंद बनेंगे और निवेशक इन कंपनियों की तुलना दूसरे सेक्टर और वैश्विक कंपनियों से आसानी से कर पाएंगे।
(डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।)