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हिंद जिंक: गिरती कीमतें

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बीएस संवाददाता
Last Updated- December 07, 2022 | 10:40 PM IST

पिछले कुछ महीनों मे जिंक की कीमत में 6 प्रतिशत की गिरावट के साथ 1780 प्रति टन के स्तर पर पहुंच गया है। अभी जो कीमतों का स्तर है वह पिछले साल यानी 2007 के अक्तूबर के4100 प्रति डॉलर केउच्चतम स्तर से काफी कम है। पिछले दो महीनों में वैश्विक स्तर पर धातुओं के इनवेन्ट्रीज में 4 प्रतिशत की गिरावट आई है और यह 156,500 टन पहुंच गया है। शायद यही कारण है कि अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर जिंक का निर्माण करनेवाली कंपनियां जैस आस्ट्रेलिया कि पेरिल्या ने अपने ब्रोकन हिल ऑपरेशन में होनेवाले उत्पादन को 91,000 टन प्रति वर्ष से घटाकर 55,000 टन प्रति वर्ष कर दिया है। विश्लेषकों का मानना है कि आपूर्ति में कमी किए जाने से कुछ हद कीमतों में गिरावट को रोका जा सकता है। इधर भारत में 7,878 करोड़ रुपये की जिंक निर्माता कंपनी एचजेडएल ने अपने बैलेंस शीट में कहा है कि अपेक्षाकृत कम एलएमई कीमत और रुपये की कीमत में सुधार के कारण कीमतों पर पड़नेवाले असर को कम करने केलिए वॉल्युम में इजाफा किया गया है।


हालांकि वित्त वर्ष 2008 में बेचे जाने वाले जिंक के उत्पादन में साल दर साल के  हिसाब से22.4 प्रतिशत की बढाेतरी के बावजूद कुल बिक्री 8 प्रतिशत की गिरावट के साथ साल-दर-साल के हिसाब से 7,878 करोड रुपये रहा। जून 2008 की तिमाही में भी एलएमई पर जिंक की कीमत में गिरावट होने से कंपनी की कुल बिक्री में 16 प्रतिशत की गिरावट आई और यह 1,643 करोड रुपये रही। इसके परिणामस्वरूप कंपनी का ऑपरेटिंग प्रॉफिट मार्जिन 1,340 आधार अंक गिरकर 59.5 प्रतिशत तक आ गया। चीन जोकि विश्व के कुल जिंक उत्पादन का 30 प्रतिशत तक उपभोग करता है, में मांगों में कमी आने और और साथ ही अमेरिकी और यूरोपीय बाजार में मंदी क ा दौर रहने से जिंक  के लिए संभावनाएं फिलहाल बेहतर नहीं लग रही है। एचजेडएल फिलहाल कुछ परेशानियां भी झेल रहा है जिसमें कि इंटरमिडिएट उत्पाद केलसाइन में कमी और सितंबर 2008 में समाप्त हुई दूसरी तिमाही में पायरोस्मेल्टर को नियोजित ढंग से बंद किया जाना भी शामिल है। इससे कंपनी के टॉपलाइन ग्रोथ के प्रभावित होने की संभावना है लेकिन पिछले तीन महीनों में रुपये में आई गिरावट के कारण निर्यात से बेहतर अपेक्षाएं हैं। कंपनी ने अपनी उत्पादन क्षमता को इस साल अप्रैल में  88,000 टन प्रति वर्ष बढ़ाकर 6,69,000 टन कर दिया है और इसके अलावा कंपनी की योजना 2010 तक उत्पादन क्षमता में 2,10,000 टन प्रति वर्ष का इजाफा करने की है। इससे बाजार में आपूर्ति में बढ़ोतरी होगी जिससे कि कीमतों पर नियंत्रण रखने में मदद मिलेगी। कंपनी का शेयर जनवरी से बेहतर प्रदर्शन नहीं कर पा रहा है और सेंसेक्स में 38 प्रतिशत की गिरावट की तुलना में इसके शेयरों में 46 प्रतिशत तक की गिरावट आई है। अगस्त से अब तक शेयरों में 23 प्रतिशत की गिरावट आई है जबकि बाजार 14 प्रतिशत नीचे जा गिरा है। 451 रुपये के मौजूदा मूल्य पर कंपनी के  शेयरों का कारोबार वित्त वर्ष 2009 के मुनाफे का 5.5 गुना पर हो रहा है।


 


 

First Published : October 1, 2008 | 12:04 AM IST