facebookmetapixel
Advertisement
रिलायंस, HDFC और Infosys से पैसा निकालकर कहां लगा रहे विदेशी निवेशक?Rupee at New low: डॉलर के मुकाबले रुपया 96.25 के रिकॉर्ड निचले स्तर पर, तेल कीमतों ने बढ़ाया दबाव₹2.5 लाख करोड़ के ऑर्डर बुक वाली HAL पर ब्रोकरेज बुलिश, 36% तक तेजी की उम्मीदGold-Silver Price Today: मिडिल ईस्ट तनाव के बीच भी सोना-चांदी हुए सस्ते, जानें आज के रेटभारतवंशी हिंदुजा परिवार की संपत्ति 38 अरब पाउंड पहुंची, ब्रिटेन में फिर टॉप परप. बंगाल को टेक हब बनाने की तैयारी; केंद्र ने Google, Microsoft, Amazon जैसी टेक कंपनियों से शुरू की बातचीतरिकॉर्ड गर्मी से AC और कोल्ड ड्रिंक कंपनियों की चांदी, सीमेंट सेक्टर पर दबावIndian Oil आज कर सकती है डिविडेंड का ऐलान, निवेशकों की नजर बोर्ड मीटिंग परJSW Steel बनेगी दुनिया की टॉप स्टील कंपनी! 7.8 करोड़ टन क्षमता का बड़ा प्लानपश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव के बीच तेल 110 डॉलर के पार, अमेरिकी बाजार में भारी गिरावट

रिलायंस, HDFC और Infosys से पैसा निकालकर कहां लगा रहे विदेशी निवेशक?

Advertisement

बड़े शेयरों में हिस्सेदारी घटाकर अब नए सेक्टरों और उभरती कंपनियों में निवेश बढ़ा रहे हैं विदेशी निवेशक

Last Updated- May 18, 2026 | 11:39 AM IST
FPI

पिछले कुछ सालों से भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों यानी FPIs की बिकवाली लगातार चर्चा में रही है। खासतौर पर 2022 में रूस-यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार से काफी पैसा निकाला। इसके बाद यह धारणा बनने लगी कि शायद विदेशी निवेशकों का भारत से भरोसा कम हो रहा है। लेकिन अब ICICI Securities की एक नई रिपोर्ट एक अलग तस्वीर दिखा रही है।

रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी निवेशक भारत से पूरी तरह बाहर नहीं जा रहे हैं, बल्कि अब उनका निवेश करने का तरीका बदल रहा है। पहले जहां उनका पैसा कुछ चुनिंदा बड़े शेयरों में ज्यादा लगा होता था, वहीं अब वे ज्यादा कंपनियों और नए सेक्टरों में पैसा फैला रहे हैं।

10 साल में घटी विदेशी हिस्सेदारी

ICICI Securities की रिपोर्ट कहती है कि भारतीय शेयर बाजार में विदेशी निवेशकों की कुल हिस्सेदारी अब घटकर करीब 15 फीसदी रह गई है। करीब 10 साल पहले यह हिस्सेदारी 20 फीसदी के आसपास थी। यानी पिछले दशक में विदेशी निवेशकों की पकड़ कुछ कमजोर हुई है।

रिपोर्ट के मुताबिक सबसे ज्यादा बदलाव 2022 के बाद देखने को मिला। रूस-यूक्रेन युद्ध और वैश्विक अनिश्चितता के दौरान विदेशी निवेशकों ने भारतीय बाजार के कई बड़े शेयरों में हिस्सेदारी घटानी शुरू की।

बड़े शेयरों से घटाया निवेश

शेयर मार्च 2022 में FPI पोर्टफोलियो में हिस्सेदारी (%) मार्च 2026 में हिस्सेदारी (%) बदलाव
HDFC + HDFC Bank 11.6 6.9 -4.7
Reliance Industries 9.1 5.3 -3.8
Infosys 5.8 2.1 -3.7
TCS 4.2 1.3 -2.9
Kotak Mahindra Bank 3.1 1.5 -1.6
Bajaj Finance 2.0 1.7 -0.3
Hindustan Unilever 1.4 0.8 -0.6
HCL Technologies 1.3 0.9 -0.4
Asian Paints 1.2 0.4 -0.8
Tech Mahindra 1.1 0.4 -0.7
कुल 40.9 21.3 -19.5

स्रोत: कैपिटलाइन, आई-सेक रिसर्च

रिपोर्ट में कहा गया है कि 2022 में विदेशी निवेशकों के भारतीय पोर्टफोलियो का करीब 41 फीसदी हिस्सा कुछ बड़े शेयरों में केंद्रित था। लेकिन अब यह हिस्सा घटकर करीब 21 फीसदी रह गया है। HDFC Bank, Reliance Industries, Infosys, TCS, Kotak Mahindra Bank और Asian Paints जैसे बड़े शेयरों में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी कम हुई है। उदाहरण के तौर पर HDFC और HDFC Bank का योगदान 11.6 फीसदी से घटकर 6.9 फीसदी रह गया। Reliance Industries का हिस्सा 9.1 फीसदी से गिरकर 5.3 फीसदी हो गया। Infosys और TCS में भी विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी में तेज गिरावट देखने को मिली।

रिपोर्ट का कहना है कि इसका मतलब यह नहीं है कि FPIs भारत छोड़ रहे हैं, बल्कि वे अब पुराने बड़े शेयरों से निकलकर नए अवसर तलाश रहे हैं।

ज्यादा कंपनियों में फैल रहा निवेश

रिपोर्ट की सबसे दिलचस्प बात यह है कि विदेशी निवेशक अब ज्यादा कंपनियों में निवेश कर रहे हैं। जिन कंपनियों में FPIs की हिस्सेदारी 1 फीसदी से ज्यादा है, उनकी संख्या करीब 900 से बढ़कर 1300 तक पहुंच गई है। यानी अब विदेशी निवेशक सिर्फ कुछ बड़े नामों पर निर्भर नहीं रहना चाहते। वे हाई ग्रोथ वाले सेक्टरों और उभरती कंपनियों पर ज्यादा दांव लगा रहे हैं।

किन सेक्टरों में बढ़ा विदेशी निवेश?

ICICI Securities की रिपोर्ट के मुताबिक विदेशी निवेशकों ने कई नए और तेजी से बढ़ते सेक्टरों में हिस्सेदारी बढ़ाई है। Consumer Discretionary, Industrials, Healthcare और Financial Services जैसे क्षेत्रों में विदेशी निवेश तेजी से बढ़ा है।

Eternal Ltd में विदेशी हिस्सेदारी 10.4 फीसदी से बढ़कर 30.8 फीसदी पहुंच गई है। HDFC AMC में यह 10.4 फीसदी से बढ़कर 24.5 फीसदी हो गई। वहीं Polycab India में विदेशी निवेशकों की हिस्सेदारी 5.8 फीसदी से बढ़कर 18.2 फीसदी तक पहुंच गई।

Midcap कंपनियों में Max Healthcare, GE Vernova T&D और One 97 जैसी कंपनियों में भी FPIs ने हिस्सेदारी तेजी से बढ़ाई है। Smallcap और Microcap शेयरों में भी विदेशी निवेशकों की दिलचस्पी बढ़ती दिख रही है।

अप्रैल में कहां हुई सबसे ज्यादा बिकवाली?

रिपोर्ट के मुताबिक अप्रैल 2026 में विदेशी निवेशकों ने भारतीय शेयर बाजार में करीब 609 अरब रुपये की बिकवाली की। सबसे ज्यादा बिकवाली फाइनेंशियल सेक्टर में हुई, जहां से करीब 309 अरब रुपये निकाले गए। इसके अलावा डिस्क्रेशनरी सेक्टर, हेल्थकेयर, एनर्जी और ऑटो सेक्टर में भी विदेशी निवेशकों ने बिकवाली की। हालांकि दूसरी तरफ कुछ सेक्टरों में निवेश जारी रहा, जिससे यह साफ होता है कि FPIs पूरी तरह बाहर नहीं जा रहे बल्कि अपने पोर्टफोलियो में बदलाव कर रहे हैं।

Advertisement
First Published - May 18, 2026 | 11:39 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement