प्रतीकात्मक फोटो
Flipkart IPO: वॉलमार्ट के स्वामित्व वाली ई-कॉमर्स कंपनी फ्लिपकार्ट में सीनियर लेवल पर अधिकारियों के आने-जाने का सिलसिला तेज हो गया है। कंपनी के प्रस्तावित आरंभिक सार्वजनिक निर्गम यानी आईपीओ की समयसीमा साफ नहीं होने से कुछ कर्मचारियों की चिंता बढ़ रही है। मामले की जानकारी रखने वाले लोगों ने बिजनेस स्टैंडर्ड को यह जानकारी दी।
सूत्रों के मुताबिक फ्लिपकार्ट समूह के कई वरिष्ठ अधिकारी कंपनी छोड़ चुके हैं या बाहर नई नौकरियों की संभावना तलाश रहे हैं। यह बदलाव केवल शीर्ष पदों तक सीमित नहीं है। कई निदेशक और वरिष्ठ निदेशक भी दूसरी कंपनियों में जाने के विकल्पों पर विचार कर रहे हैं।
कंपनी छोड़ने वाले अधिकारियों में गुंजन भारती शामिल हैं। वह जनवरी 2026 में सीनियर वीपी के रूप में फ्लिपकार्ट से जुड़े थे और ईकार्ट के अलग-अलग कारोबार की वित्तीय जिम्मेदारी संभाल रहे थे। मिंत्रा में 2022 से चीफ मार्केटिंग ऑफिसर के पद पर काम कर रहे सुंदर बालासुब्रमण्यम भी कंपनी छोड़ चुके हैं।
फ्लिपकार्ट के ग्रॉसरी और मिनट्स कारोबार की आपूर्ति व्यवस्था संभालने वाले उपाध्यक्ष आमेर हुसैन भी नोटिस पीरियड में हैं। वह इसी साल जनवरी में फ्लिपकार्ट से जुड़े थे। उनकी नियुक्ति कंपनी के संभावित आईपीओ से पहले वरिष्ठ नेतृत्व को मजबूत करने की योजना का हिस्सा थी। फ्लिपकार्ट से इस बारे में विस्तृत प्रतिक्रिया मांगी गई थी, लेकिन खबर प्रकाशित होने तक कंपनी की ओर से जवाब नहीं मिला।
जानकारों के मुताबिक आईपीओ की समयसीमा स्पष्ट नहीं होने का सबसे ज्यादा असर कर्मचारी शेयर विकल्प यानी ईसॉप रखने वाले वरिष्ठ अधिकारियों पर पड़ रहा है। इन कर्मचारियों को उम्मीद थी कि फ्लिपकार्ट की शेयर बाजार में सूचीबद्धता के बाद उन्हें अपनी हिस्सेदारी बेचने का बड़ा अवसर मिलेगा। इसके साथ ही कंपनी का नया मूल्यांकन होने से उनके शेयर विकल्पों की कीमत बढ़ने की भी संभावना थी।
हालांकि, आईपीओ लगातार टलने और इसकी कोई पक्की समयसीमा सामने नहीं आने से वरिष्ठ कर्मचारियों में अनिश्चितता बढ़ी है। इसी कारण कुछ अधिकारी फ्लिपकार्ट समूह के बाहर अवसर तलाश रहे हैं।
फ्लिपकार्ट समूह की फैशन कंपनी मिंत्रा की मुख्य कार्याधिकारी नंदिता सिन्हा ने अप्रैल में पद छोड़ दिया था। वह जनवरी 2022 से यह जिम्मेदारी संभाल रही थीं। उनके स्थान पर शेरोन पेस को मिंत्रा का नया प्रमुख बनाया गया।
नंदिता सिन्हा ने बाद में स्विगी का दामन थाम लिया। उन्होंने 3 अगस्त से स्विगी के त्वरित सामान पहुंचाने वाले कारोबार इंस्टामार्ट के मुख्य कार्याधिकारी का पद संभाल लिया है।
सूत्रों के मुताबिक इंस्टामार्ट फ्लिपकार्ट समूह के दूसरे कर्मचारियों से भी बातचीत कर रहा है। त्वरित वाणिज्य कारोबार में बढ़ती प्रतिस्पर्धा के बीच अनुभवी अधिकारियों की मांग बढ़ रही है।
फ्लिपकार्ट के कर्मचारियों के लिए त्वरित सामान पहुंचाने वाली नई कंपनी फर्स्टक्लब भी एक प्रमुख विकल्प बनकर उभर रही है। इसकी स्थापना फ्लिपकार्ट के पूर्व अधिकारी अय्यप्पन आर ने की थी।
फर्स्टक्लब ने जून में सीरीज-बी निवेश दौर में 5.5 करोड़ डॉलर जुटाए थे। इस निवेश दौर का नेतृत्व पीक एक्सवी पार्टनर्स और सोफिना ने किया। मौजूदा निवेशकों एक्सेल, आरटीपी ग्लोबल और पैरामार्क वेंचर्स ने भी इसमें भाग लिया था।
बताया जा रहा है कि फर्स्टक्लब ने फ्लिपकार्ट समूह की पूर्व मानव संसाधन अधिकारी सोनिका प्रणय को अपना ‘पीपल एंड कल्चर’ प्रमुख नियुक्त किया है। उनके पास इस क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है।
फ्लिपकार्ट ने अभी अपने आईपीओ के लिए कोई समयसीमा तय नहीं की है। समूह के मुख्य कार्याधिकारी कल्याण कृष्णमूर्ति ने जुलाई में बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया था कि आईपीओ जैसा फैसला बहुलांश निवेशकों और निदेशक मंडल की चर्चा के आधार पर लिया जाएगा। कंपनी फिलहाल उस चरण में नहीं पहुंची है।
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फ्लिपकार्ट ने मार्च 2026 में अपना मुख्यालय सिंगापुर से भारत स्थानांतरित करने की प्रक्रिया पूरी की थी। इस ‘रिवर्स फ्लिप’ को घरेलू शेयर बाजार में कंपनी की संभावित सूचीबद्धता की दिशा में अहम कदम माना गया था।
हालांकि, कंपनी का आईपीओ कथित तौर पर 2028 तक टल गया है। इसकी अस्थायी समयसीमा को लेकर भी कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।
आईपीओ की देरी के बीच फ्लिपकार्ट ने पात्र कर्मचारियों को अपने कर्मचारी शेयर विकल्पों का कुछ हिस्सा बेचने की अनुमति दी है। कंपनी ने जुलाई में कहा था कि पहले घोषित नकदी कार्यक्रम के तहत दूसरी बार कर्मचारियों को यह अवसर दिया जाएगा।
फ्लिपकार्ट स्टॉक ऑप्शन प्लान 2026 के तहत 15 जुलाई 2026 तक कंपनी में काम कर रहे पात्र कर्मचारी अपने बकाया शेयर विकल्पों का अधिकतम 5 फीसदी हिस्सा बेच सकते हैं। इसमें 16 जुलाई 2023 से 15 जुलाई 2026 के बीच अधिकार में आए शेयर विकल्प शामिल हैं।
इन विकल्पों के लिए नकदी मूल्य 713.4 रुपये प्रति विकल्प तय किया गया था। आंतरिक सूचना के मुताबिक कर्मचारियों को अगस्त 2026 में भुगतान किया जाना था।
फ्लिपकार्ट के ऑनलाइन बाजार कारोबार का संचालन करने वाली फ्लिपकार्ट इंटरनेट ने वित्त वर्ष 2025 में 20,493 करोड़ रुपये का राजस्व दर्ज किया था। यह पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले 14 फीसदी ज्यादा रहा।
कंपनी का शुद्ध घाटा 37 फीसदी घटकर 1,494 करोड़ रुपये रह गया था। हालांकि, राजस्व बढ़ने की रफ्तार धीमी हुई है। वित्त वर्ष 2024 में कंपनी का राजस्व 21 फीसदी बढ़ा था, जबकि वित्त वर्ष 2025 में वृद्धि 14 फीसदी रही।
फ्लिपकार्ट के लिए अब एक तरफ मुनाफे की दिशा में आगे बढ़ना और दूसरी तरफ वरिष्ठ नेतृत्व को बनाए रखना बड़ी चुनौती होगी। कंपनी का आईपीओ कब आएगा, यह फैसला निवेशकों और निदेशक मंडल पर निर्भर करेगा। तब तक सूचीबद्धता की समयसीमा से जुड़ी अनिश्चितता कर्मचारियों और उनके शेयर विकल्पों पर बनी रह सकती है।