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Delhi Master Plan 2047: दिल्ली के नए मास्टर प्लान में राजधानी को एक ऐसे शहर के रूप में विकसित करने की योजना है, जहां दिन खत्म होने के साथ आर्थिक और सांस्कृतिक गतिविधियां भी बंद न हों। Master Plan for Delhi 2047 (MPD-2047) में ‘24-hour city’ की अवधारणा को बढ़ावा दिया गया है। इसके तहत दिल्ली के कुछ चुनिंदा इलाकों, जगहों और सांस्कृतिक मार्गों को इस तरह विकसित करने की योजना है कि वहां अलग-अलग समय पर गतिविधियां जारी रह सकें।
हालांकि, इसका मतलब यह नहीं है कि पूरी दिल्ली 24 घंटे खुली रहेगी। यह फिलहाल एक शहरी नियोजन की योजना है। किन इलाकों में लंबे समय तक गतिविधियां चलेंगी और इसे कैसे लागू किया जाएगा, इसका फैसला संबंधित सरकारी एजेंसियां करेंगी।
‘24-hour city’ का मतलब सिर्फ दुकानों और रेस्टोरेंट को देर रात तक खोलना नहीं है। मास्टर प्लान में ऐसे कल्चरल सर्किट विकसित करने की बात कही गई है, जहां दिन के अलग-अलग समय पर सांस्कृतिक, मनोरंजन और कारोबारी गतिविधियां आयोजित की जा सकें।
इसका उद्देश्य दिल्ली के सार्वजनिक स्थानों को ज्यादा सक्रिय बनाना, लोगों की आवाजाही बढ़ाना और शहर की अर्थव्यवस्था को गति देना है। साथ ही, अलग-अलग समय पर गतिविधियां होने से कुछ इलाकों में भीड़ और ट्रैफिक का दबाव कम करने में भी मदद मिल सकती है।
मास्टर प्लान के मुताबिक, चुने गए क्षेत्रों में रेस्टोरेंट, रिटेल स्टोर, खेल सुविधाओं और सामाजिक-सांस्कृतिक गतिविधियों के संचालन का समय बढ़ाया जा सकता है। हालांकि, यह संबंधित विभागों और स्थानीय एजेंसियों के फैसले और अनुमति पर निर्भर करेगा।
दिल्ली में ऐसे इलाकों और सांस्कृतिक मार्गों की पहचान स्थानीय निकाय, पर्यटन विभाग और अन्य संबंधित एजेंसियां करेंगी, जहां इस मॉडल को विकसित करने की संभावनाएं हों।
MPD-2047 में ‘कल्चरल इकोनॉमी’ पर भी जोर दिया गया है। इसका मकसद ऐसे स्थान और समय तैयार करना है, जहां कामकाज के साथ संस्कृति और मनोरंजन से जुड़ी गतिविधियां भी जारी रह सकें।
इससे पर्यटकों और स्थानीय लोगों को दिन के अलावा शाम और रात में भी घूमने-फिरने और मनोरंजन के ज्यादा विकल्प मिल सकते हैं। साथ ही, स्थानीय कारोबार को भी फायदा पहुंचने की उम्मीद है।
नहीं। ‘24-hour city’ का मतलब पूरी दिल्ली में 24 घंटे दुकानें, बाजार या रेस्टोरेंट खुले रहना नहीं है। यह चुनिंदा इलाकों को अलग-अलग समय पर सक्रिय रखने की योजना है।
कह सकते हैं कि MPD-2047 का लक्ष्य दिल्ली को ऐसा शहर बनाना है जहां दिन और रात, दोनों समय आर्थिक, सांस्कृतिक और मनोरंजन गतिविधियों के लिए सार्वजनिक स्थानों का बेहतर इस्तेमाल हो सके।
MPD-2047 में 24 घंटे चलने वाली अर्थव्यवस्था को रोजगार के बदलते स्वरूप से जोड़ने की बात कही गई है। इसके तहत पारंपरिक 9 से 5 की नौकरी के अलावा ई-कॉमर्स, स्टार्टअप, फूड डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स और दूसरी सर्विस आधारित गतिविधियों के लिए नए तरह के कार्यस्थलों को बढ़ावा देने की योजना है।
प्लान में ई-कॉमर्स वेयरहाउस, स्टार्टअप के लिए को-वर्किंग स्पेस और क्लाउड किचन जैसे विकेंद्रीकृत कार्यस्थलों को विकसित करने की बात कही गई है। इन जगहों पर बेहतर पैदल रास्ते और सार्वजनिक सुविधाएं उपलब्ध कराने पर भी जोर दिया गया है।
इसके अलावा कुछ चुनिंदा ट्रांजिट स्टेशनों के आसपास ऐसे क्षेत्र विकसित करने का प्रस्ताव है, जहां घर, ऑफिस, दुकानें और सामाजिक-सांस्कृतिक सुविधाएं एक-दूसरे के करीब हों। इससे लोगों के लिए सार्वजनिक परिवहन से काम की जगह तक पहुंचना आसान हो सकता है।
24 घंटे की अर्थव्यवस्था का फायदा उन क्षेत्रों को मिल सकता है, जहां काम का समय पारंपरिक नहीं होता। इनमें टेक्नोलॉजी, स्टार्टअप, फूड डिलीवरी, लॉजिस्टिक्स और दूसरी सर्विस इंडस्ट्री शामिल हैं। ऐसे क्षेत्रों में जरूरत के मुताबिक लंबे समय तक कामकाज संभव हो सकता है।
MPD-2047 ने अभी किसी इलाके को आधिकारिक तौर पर 24×7 डिस्ट्रिक्ट घोषित नहीं किया है। योजना के मुताबिक आगे संबंधित एजेंसियां ऐसे नोड, इलाके और कॉरिडोर की पहचान करेंगी, जहां 24 घंटे की अर्थव्यवस्था की संभावनाएं ज्यादा हैं।
कनॉट प्लेस और इसके आसपास के इलाके पहले से ही ऑफिस, होटल, मनोरंजन, रिटेल और कारोबार के बड़े केंद्र हैं। वहीं मंडी हाउस को सांस्कृतिक केंद्र के तौर पर देखा गया है। प्रगति मैदान, जिसे अब भारत मंडपम के रूप में विकसित किया गया है, को बड़े अंतरराष्ट्रीय आयोजनों और बिजनेस इवेंट्स के केंद्र के रूप में बताया गया है।
पुरानी दिल्ली का वॉल्ड सिटी क्षेत्र, खासकर चांदनी चौक जैसे ऐतिहासिक इलाके, दिल्ली के प्रमुख आर्थिक और सांस्कृतिक केंद्रों में शामिल हैं। योजना में यहां रिटेल और सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की बात कही गई है।
इसके आसपास के इलाकों में पहाड़गंज भी अहम है। MPD-2047 में पहाड़गंज में हॉस्पिटैलिटी सेक्टर को दोबारा विकसित करने की संभावना का उल्लेख किया गया है।
योजना के वॉल्ड सिटी वाले हिस्से में ‘एक्टिव 24×7 इकोनॉमी’ की बात कही गई है। इसके तहत ऐसे सांस्कृतिक इलाके और गतिविधियां चिन्हित करने का प्रस्ताव है, जो लंबे समय तक सक्रिय रह सकें।
दिल्ली को 24 घंटे चलने वाली अर्थव्यवस्था वाला शहर बनाने की योजना में सिर्फ दुकानों और कारोबार को देर रात तक खोलने की बात नहीं है। इसके लिए रात के समय लोगों के आने-जाने, सुरक्षा और जरूरी सुविधाओं की व्यवस्था भी जरूरी होगी। MPD-2047 में दिल्ली की 24×7 अर्थव्यवस्था को सफल बनाने के लिए पब्लिक ट्रांसपोर्ट, बेहतर रोशनी, सुरक्षित सार्वजनिक जगहों और अन्य सुविधाओं पर जोर दिया गया है।
MPD-2047 के मुताबिक दिल्ली की सार्वजनिक परिवहन व्यवस्था में मेट्रो और बसें मुख्य भूमिका निभाएंगी। वर्ष 2047 तक बड़ी संख्या में इलेक्ट्रिक बसें चलाने, ज्यादा इलाकों तक बस सेवा पहुंचाने और नियमित अंतराल पर बसें उपलब्ध कराने की योजना है।
मेट्रो और बसों को RRTS और रेलवे नेटवर्क से बेहतर तरीके से जोड़ने पर भी जोर दिया गया है। खास बात यह है कि योजना में 24×7 अर्थव्यवस्था को बढ़ावा देने के लिए कुछ चुनिंदा रूट और नेटवर्क पर विशेष परिवहन सेवाएं शुरू करने की संभावना का भी जिक्र है। हालांकि, इन सेवाओं को शुरू करने का फैसला उनकी व्यवहारिकता को देखते हुए किया जाएगा।
दिल्ली में रात के समय आर्थिक गतिविधियां बढ़ाने के लिए सुरक्षित सार्वजनिक स्थान जरूरी होंगे। MPD-2047 में ऐसे इलाकों को बेहतर बनाने की बात कही गई है, जहां सांस्कृतिक और व्यावसायिक गतिविधियों को बढ़ावा दिया जा सकता है।
इन क्षेत्रों में बेहतर बुनियादी ढांचा विकसित करने के साथ सार्वजनिक जगहों की सुरक्षा पर भी ध्यान दिया जाएगा। रात में यात्रा करने वाले लोगों के लिए पर्याप्त स्ट्रीट लाइट, यात्री सूचना प्रणाली और अन्य जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराने पर जोर दिया गया है।
24 घंटे चलने वाले शहर में बड़ी संख्या में लोग रात की शिफ्ट में भी काम करेंगे। ऐसे में उनके लिए बुनियादी सुविधाएं उपलब्ध कराना जरूरी होगा। योजना में वर्क सेंटरों पर चाइल्डकेयर सुविधाओं और सार्वजनिक शौचालयों की व्यवस्था का प्रावधान है।
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सार्वजनिक सुविधाओं को महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों और दिव्यांग लोगों की जरूरतों को ध्यान में रखकर विकसित करने की बात भी कही गई है। जरूरत के अनुसार चाइल्डकेयर सेंटर उपलब्ध कराने का भी प्रस्ताव है।
24 घंटे चलने वाली अर्थव्यवस्था से कई क्षेत्रों में रोजगार और कारोबार के अवसर बढ़ सकते हैं। इनमें होटल, रेस्टोरेंट, फूड सर्विस, रिटेल, मनोरंजन, कला, पर्यटन और इवेंट इंडस्ट्री शामिल हैं।
इसके अलावा को-वर्किंग स्पेस, ई-कॉमर्स, लॉजिस्टिक्स, क्लाउड किचन, स्ट्रीट वेंडर्स और दूसरे छोटे कारोबार भी इस व्यवस्था से लाभ उठा सकते हैं।
MPD-2047 ने दिल्ली को 24 घंटे चलने वाले शहर के रूप में विकसित करने की दिशा दिखाई है। लेकिन इसका मतलब केवल कारोबार को देर रात तक खुला रखना नहीं है।
अगर दिल्ली में रात के समय आर्थिक गतिविधियां बढ़ानी हैं तो सुरक्षित सड़कें, बेहतर रोशनी, सार्वजनिक परिवहन, पैदल चलने की सुविधा, सार्वजनिक शौचालय और अन्य जरूरी सेवाएं भी चौबीसों घंटे उपलब्ध होनी चाहिए।
यानी दिल्ली की 24×7 अर्थव्यवस्था तभी सफल होगी, जब शहर का पूरा सिस्टम रात में काम करने वाले कर्मचारियों और देर रात बाहर रहने वाले लोगों की जरूरतों को पूरा करने के लिए तैयार हो।