Campus Activewear Stock: स्पोर्ट्स और एथलीजर फुटवियर बनाने वाली कंपनी Campus Activewear के लिए आने वाले साल बेहतर साबित हो सकते हैं। ब्रोकरेज फर्म मोतीलाल ओसवाल की ताजा रिपोर्ट के मुताबिक, वित्त वर्ष 2026 की शुरुआत भले ही कुछ कमजोर रही हो, लेकिन साल के दूसरे हिस्से में कंपनी की ग्रोथ फिर तेज होने लगी है। रिपोर्ट का कहना है कि प्रीमियम जूतों की बढ़ती मांग, रिटेल नेटवर्क का विस्तार और जीएसटी में हुए बदलाव जैसे कारक कंपनी की बिक्री को सहारा दे रहे हैं। इसके साथ ही बैकवर्ड इंटीग्रेशन और प्रीमियम प्रोडक्ट्स की बढ़ती हिस्सेदारी के कारण कंपनी के मुनाफे में भी सुधार दिख रहा है। मोतीलाल ओसवाल ने कंपनी के शेयर पर ‘बाय’ रेटिंग बरकरार रखते हुए टारगेट प्राइस 305 रुपये तय किया है।
कैंपस एक्टिववियर पिछले कुछ सालों से धीरे-धीरे अपने प्रोडक्ट पोर्टफोलियो को ज्यादा प्रीमियम बना रही है। कंपनी फैशन के नए ट्रेंड के हिसाब से डिजाइन तैयार कर रही है और स्नीकर्स जैसे ज्यादा कीमत वाले उत्पादों पर ज्यादा ध्यान दे रही है। इस रणनीति का असर कंपनी की औसत बिक्री कीमत पर भी साफ दिखाई दे रहा है। कुछ साल पहले जहां कंपनी के जूतों की औसत कीमत करीब 510 रुपये थी, वहीं अब यह बढ़कर 639 रुपये तक पहुंच चुकी है और वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में यह लगभग 688 रुपये तक पहुंच गई। ब्रोकरेज का मानना है कि यह ट्रेंड आगे भी जारी रह सकता है और आने वाले समय में कंपनी के जूतों की औसत कीमत और बढ़ सकती है। इसका एक बड़ा कारण यह भी है कि कंपनी नए डिजाइन और नई तकनीक वाले उत्पाद तेजी से बाजार में उतार रही है।
फुटवियर बाजार में फैशन का ट्रेंड बहुत तेजी से बदलता है और जो कंपनी जल्दी नए डिजाइन बाजार में उतारती है, वही आगे रहती है। कैंपस ने इसी रणनीति को अपनी ताकत बना लिया है। कंपनी डिजाइन तैयार करने से लेकर उसे बाजार में लॉन्च करने तक की पूरी प्रक्रिया 60 से 90 दिनों में पूरी कर लेती है। यही वजह है कि कंपनी लगातार नए प्रोडक्ट लॉन्च करती रहती है। पिछले साल कंपनी ने 270 से ज्यादा नए डिजाइन बाजार में उतारे थे। हाल में कंपनी ने Air Capsule Pro जैसे नए और इनोवेटिव प्रोडक्ट भी लॉन्च किए हैं, जिससे स्नीकर्स और एथलीजर सेगमेंट में उसकी पकड़ मजबूत हो रही है।
कैंपस अब सिर्फ जूतों तक सीमित नहीं रहना चाहती। कंपनी ने एथलीजर कपड़ों के बाजार में भी कदम रख दिया है। फिलहाल कंपनी ने पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर पोलो टी-शर्ट, राउंड नेक टी-शर्ट, जैकेट, जॉगर्स और कैप जैसे उत्पाद लॉन्च किए हैं। इस कदम के पीछे कंपनी की रणनीति साफ है। वह चाहती है कि ग्राहक सिर्फ जूते ही नहीं बल्कि कपड़े और अन्य एथलीजर उत्पाद भी उसी ब्रांड से खरीदें। इससे हर ग्राहक से होने वाली कमाई बढ़ सकती है और ब्रांड की पहचान भी मजबूत होगी।
कंपनी ने अपने डिस्ट्रीब्यूटर नेटवर्क में भी बदलाव किया है। पहले कंपनी के पास ज्यादा संख्या में डिस्ट्रीब्यूटर थे, लेकिन अब उसने उन्हें थोड़ा कम कर दिया है और ज्यादा मजबूत पार्टनर्स के साथ काम करने पर ध्यान दिया है। इसके बावजूद कंपनी की बाजार में पहुंच बढ़ी है। देशभर में उसके रिटेल टचपॉइंट्स 26 हजार से बढ़कर 29 हजार से ज्यादा हो गए हैं। इससे कंपनी को अपने उत्पाद ज्यादा जगहों पर उपलब्ध कराने और बाजार में अपनी पकड़ मजबूत करने में मदद मिल रही है।
आज के समय में ऑनलाइन बाजार तेजी से बढ़ रहा है और कैंपस एक्टिववियर ने इस ट्रेंड को जल्दी पहचान लिया। कुछ साल पहले कंपनी की कुल बिक्री में ऑनलाइन चैनल का हिस्सा बहुत कम था, लेकिन अब यह तेजी से बढ़कर करीब 37 प्रतिशत तक पहुंच गया है। ऑनलाइन प्लेटफॉर्म के जरिए कंपनी देश के उन इलाकों तक भी पहुंच बना पा रही है जहां उसका रिटेल नेटवर्क सीमित है। साथ ही नए डिजाइन लॉन्च करने और ग्राहकों की पसंद समझने में भी यह चैनल मददगार साबित हो रहा है।
पिछले कुछ समय में कंपनी ने ब्रांड बनाने और विज्ञापन पर ज्यादा खर्च किया, जिससे उसके मुनाफे पर थोड़ा दबाव आया था। इसके बावजूद कंपनी का ग्रॉस मार्जिन मजबूत बना रहा और हाल के महीनों में मांग में सुधार के साथ मुनाफे का स्तर भी धीरे-धीरे बेहतर होने लगा है। रिपोर्ट के मुताबिक कंपनी का EBITDA मार्जिन वित्त वर्ष 2026 के पहले नौ महीनों में बढ़कर करीब 15.9 प्रतिशत हो गया है। आने वाले वर्षों में प्रीमियम प्रोडक्ट्स और बड़े पैमाने पर उत्पादन के कारण इसमें और सुधार हो सकता है।
मोतीलाल ओसवाल का अनुमान है कि अगले कुछ सालों में कंपनी की ग्रोथ मजबूत रह सकती है। ब्रोकरेज का मानना है कि वित्त वर्ष 2025 से 2028 के बीच कंपनी की बिक्री, मुनाफा और आय तीनों में दो अंकों की वृद्धि हो सकती है। प्रीमियम जूतों की बढ़ती मांग, स्नीकर्स सेगमेंट में विस्तार और अब कपड़ों के बाजार में एंट्री के कारण कैंपस एक्टिववियर आने वाले वर्षों में स्पोर्ट्स और एथलीजर सेगमेंट की प्रमुख कंपनियों में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकती है।
डिस्क्लेमर: यहां दी गई राय ब्रोकरेज की है। बिज़नेस स्टैंडर्ड इन विचारों से सहमत होना जरूरी नहीं समझता और निवेश से पहले पाठकों को अपनी समझ से फैसला करने की सलाह देता है।