अल्टरनेटिव इन्वेस्टमेंट फंड्स (AIFs) में निवेश प्रतिबद्धता मार्च 2026 के अंत तक बढ़कर 16.94 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गईं। भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) के आंकड़ों के मुताबिक, यह तिमाही आधार पर 7 फीसदी की बढ़ोतरी है और सालाना आधार पर इसमें 25 फीसदी का उछाल आया है।
इसके अलावा, जुटाया गया फंड भी पहली बार 7 लाख करोड़ रुपये के पार पहुंच गया। इस पूल से किया गया निवेश FY26 के आखिर में 6.76 लाख करोड़ रुपये था।
निवेश के लिहाज से रियल एस्टेट सबसे पसंदीदा सेक्टर बना रहा। मार्च 2026 के अंत तक इस सेक्टर में कुल निवेश बढ़कर रिकॉर्ड 1.29 लाख करोड़ रुपये पर पहुंच गया, जबकि दिसंबर 2025 के अंत में यह 75,350 करोड़ रुपये था।
फाइनेंशियल सर्विसेज और आईटी सेक्टर में निवेश में तेज बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि फार्मा सेक्टर में मामूली गिरावट रही। हालांकि, हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स और स्वास्थ्य सेवाओं से जुड़े कारोबारों में निवेश बढ़ा।
पिछले कुछ वर्षों में AIF उद्योग में निवेशकों की दिलचस्पी लगातार बढ़ी है। मार्च 2022 के अंत में जहां इन्वेस्टमेंट कमिटमेंट 6.4 लाख करोड़ रुपये थीं, वहीं वित्त वर्ष 2025-26 के अंत तक यह बढ़कर करीब 17 लाख करोड़ रुपये के स्तर पर पहुंच गईं।
हालांकि, AIF मैनेजर्स का कहना है कि पिछले कुछ महीनों में पश्चिम एशिया में जारी युद्ध से पैदा हुई अनिश्चितता के कारण नई निवेश प्रतिबद्धताओं की रफ्तार कुछ धीमी पड़ी है।
AIF में निवेश के लिए न्यूनतम निवेश सीमा 1 करोड़ रुपये निर्धारित है। हालांकि मान्यता प्राप्त (Accredited) निवेशकों को इससे कम राशि निवेश करने की भी अनुमति है।
ये फंड इंफ्रास्ट्रक्चर, सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSMEs), स्टार्टअप्स समेत विभिन्न एसेट्स में निवेश करते हैं। वहीं, कैटेगरी-III AIF जटिल ट्रेडिंग रणनीतियों (Complex Trading Strategies) के जरिए निवेश करते हैं।