सुप्रीम कोर्ट ने गुजरात के जामनगर में बने वनतारा सेंटर (Vantara) की जांच के लिए एक विशेष टीम (SIT) बनाई है। यह टीम पूर्व जज जे. चेलमेश्वर के नेतृत्व में काम करेगी। आरोप है कि यहां जानवरों को लाने और रखने में नियमों का पालन नहीं हुआ। अदालत ने कहा कि सच पता लगाना जरूरी है। SIT को 12 सितंबर 2025 तक रिपोर्ट देनी है और 15 सितंबर को फिर सुनवाई होगी।
वनतारा फरवरी 2024 में शुरू हुआ था। इसका मतलब है – ‘जंगल का सितारा’। यह दुनिया का सबसे बड़ा जू और जानवरों को बचाने का केंद्र बताया जाता है। यह 3,000 एकड़ में रिलायंस की जामनगर रिफाइनरी के अंदर बना है। इसे अनंत अंबानी चला रहे हैं। यहां 2,000 से ज्यादा जानवर हैं, जिनमें 200 हाथी शामिल हैं। इलाज के लिए बड़े अस्पताल भी बनाए गए हैं, खासकर हाथियों के लिए।
याचिकाओं में कहा गया है कि कई हाथियों को मंदिरों और निजी मालिकों से बिना नियमों के लिया गया। कुछ विदेशी जानवरों को भी गलत तरीके से लाने का आरोप है। यह भी सवाल है कि जामनगर का मौसम सभी प्रजातियों के लिए ठीक है या नहीं। पैसों के लेन-देन और मनी लॉन्ड्रिंग के आरोप भी लगाए गए हैं।
सबसे ज्यादा चर्चा तब हुई जब कोल्हापुर के जैन मंदिर से 30 साल की हथिनी महादेवी को जामनगर लाया गया। हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट ने इस फैसले को सही माना, लेकिन महाराष्ट्र में लोगों ने इसका विरोध किया और प्रदर्शन हुए। इसी से Vantara पर और ध्यान गया।
SIT यह देखेगी कि जानवरों को कैसे लाया गया और क्या कानून का पालन हुआ। इलाज की सुविधाएं, जानवरों की सेहत, मौत के मामले और पैसों का इस्तेमाल भी जांचा जाएगा।
वनतारा ने कहा है कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश का सम्मान करता है और जांच में पूरा सहयोग करेगा। संस्था ने कहा कि उसका मकसद हमेशा जानवरों की देखभाल और बचाव रहा है। अब SIT तुरंत जांच शुरू करेगी और 12 सितंबर तक रिपोर्ट देगी। इसके बाद 15 सितंबर को सुप्रीम कोर्ट तय करेगा कि आगे क्या करना है।