महाराष्ट्र में रियल एस्टेट क्षेत्र में निर्माण गतिविधियां बरकरार रहेंगी, लेकिन मौजूदा लॉकडाउन की वजह से जून तिमाही में बिक्री में भारी कमी की आशंका जताई जा रही है।
निर्माण क्षेत्र को लॉकडाउन की सख्ती से अलग रखा गया है और ज्यादातर बिल्डरों ने अपने श्रमिकों को निर्माण स्थलों पर ठहराने की व्यवस्था की है। महाराष्ट्र में निर्माण क्षेत्र के लिए सकल मूल्य वृद्घि (जीवीए) का संभावित नुकसान रेटिंग फर्म केयर द्वारा 2,584 करोड़ रुपये पर अनुमानित किया गया है। केयर ने चेतावनी दी है कि जहां निर्माण गतिविधि बरकरार रहेगी, वहीं इसकी रफ्तार काफी हद तक धीमी रहेगी और मौजूदा अनिश्चितताओं की वजह से नई परियोजनाएं नहीं चलाई जाएंगी।
भारतीय रियल एस्टेट क्षेत्र की बिक्री मुंबई और महाराष्ट्र के अन्य शहरों में लॉकडाउन की वजह से काफी धीमी पड़ गई थी। लेकिन राज्य सरकार द्वारा स्टांप शुल्क में भारी छूट देने से राज्य में कई सौदे हुए। लेकिन बिल्डरों का कहना है कि नया वित्त वर्ष नरमी के साथ शुरू हुआ है और बिक्री के संबंध में पूछताछ अप्रैल के पहले 15 दिनों में घटी है।
रियल एस्टेट विश्लेषकों का कहना है कि जहां लॉकडाउन कोविड महामारी की चेन को रोकने के लिए जरूरी है, वहीं इसका मांग और आपूर्ति के मोर्चों पर रियल एस्टेट व्यवसाय पर प्रभाव पडऩे की आशंका है। जेएलएल में मुख्य अर्थशास्त्री और शोध एवंं आरईआईएस प्रमुख डॉ. सामंतक दास ने कहा, ‘सरकारी उपायों के तहत व्यवसाय को बंद करने से अल्पावधि में उपभोक्ता धारणा प्रभावित होगी और इससे आवासीय क्षेत्र में मकानों की खरीदारी तथा वाणिज्यिक क्षेत्र में ऑफिस स्पेस लीजिंग की रफ्तार कमजोर होगी। जहां निर्माण गतिविधियों की अनुमति है, वहीं आवासीय और वाणिज्यिक इमारतों का विकास प्रभावित होगा, क्योंकि इसके लिए कच्चे माल की समय पर उपलब्धता मुश्किल होगी और साथ ही श्रमिकों के फिर से पलायन से भी चिंता पैदा हो रही है। हालांकि, टीकों की पेशकश में तेजी से हमें यह भरोसा करने में मदद मिली है कि यह एक अल्पावधि समस्या है और बाजार जल्द ही पटरी पर लौटेगा।’
मुंबई क्षेत्र में बिल्डरों के एक सर्वे में खुलासा किया गया कि पिछले कुछ सप्ताहों में 36,000 निर्माण श्रमिकों में से सिर्फ 2,100 ही मुंबई छोड़कर गए हैं। ये मजदूर मुख्य तौर पर होली मनाने और शादियों के सीजन की वजह से मुंबई से गए और यह रुझान पिछले कुछ वर्षों के दौरान भी देखा जाता रहा है।
रियल एस्टेट डेवलपरों का कहना है कि वे अपने श्रमिकों की सुरक्षा के लिए निर्माण स्थलों पर कोविड टेस्ट करा रहे हैं, जिससे कि कोविड मरीजों को जल्द से जल्द अलग रखा जा सके। मुंबई के रियल एस्टेट डेवलपरों के संगठन क्रेडाई-एमसीएचआई के अध्यक्ष दीपक गुलेरिया ने कहा, ‘श्रमिकों के कम वेतन ग्रेड से जुड़े होने और अपनी दैनिक गतिविधियों के लिए उनकी महतता को देखते हुए यह जरूरी है कि उनके हितों को सुरक्षित बनाया जाए। इसलिए हमने राज्य सरकार से लॉकडाउन की आशंका को देखते हुए निर्माण गतिविधियां बरकरार रहने की अनुमति देने का अनुरोध किया है, जिससे कि निर्माण सामग्री की आपूर्ति बनी रहे।