राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का कांग्रेस के अध्यक्ष पद के लिए नामांकन के बाद से राजस्थान में मुख्यमंत्री पद को लेकर घमासान शुरू हो गया है। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत गुट के विधायकों ने रविवार रात को विधानसभा अध्यक्ष सी पी जोशी को इस्तीफे सौंप दिए।
आइए 10 प्वाइंट्स में जानें आखिर क्या है पूरा मामला-
अगले महीने होने वाले कांग्रेस अध्यक्ष पद के चुनाव के लिए राजस्थान के सीएम अशोक गहलोत की दावेदारी की घोषणा हुई। इसके बाद से ही राजस्थान में सियासी हलचल शुरू हो गई है।
अगर गहलोत कांग्रेस पार्टी के अध्यक्ष बनते हैं तो उन्हें राजस्थान के सीएम का पद छोड़ना होगा। हालांकि पहले इस बात की चर्चा थी कि वो दोनों पदों पर बने रह सकते हैं लेकिन फिर गहलोत ही इससे पीछे हट गए।
इसी बीच भारत जोड़ो यात्रा पर निकले राहुल गांधी ने भी संकेत दिए कि एक पद पर एक व्यक्ति ही रहेगा। इस दौरान सचिन पायलट ने भी राहुल गांधी से मुलाकात की, इसके बाद से वह मुख्यमंत्री पद के दावेदार बन गए।
पायलट की मुख्यमंत्री पद की दावेदारी के बाद से ही राजस्थान में सियासी भूचाल आ गया।
इस बीच खबर आई कि गहलोत पायलट के सीएम बनने के खिलाफ हैं।
राजस्थान के नए सीएम पद के उम्मीदवार पर चर्चा करने को लेकर कांग्रेस ने रविवार यानी 25 सितंबर की शाम सात बजे विधायक दल की बैठक बुलाई।
इसके बाद विधायक विधानसभा अध्यक्ष सीपी जोशी के बंगले पर इस्तीफा लेकर पहुंचे। इस दौरान 92 विधायकों ने इस्तीफा दे दिया।
गौरतलब है कि अशोक गहलोत और सचिन पायलट के बीच तना-तनी 2018 विधानसभा चुनाव से चली आ रही है। उस दौरान दोनों के बीच राजस्थान का मुख्यमंत्री बनने को लेकर पेंच फंसा था। आखिर में आलाकमान ने गहलोत को सीएम बनाया और पायलट उप मुख्यमंत्री बनाए गए थे।
कई दिन चली सियासी उठापट के बीच गहलोत अपनी सरकार बचाने में सफल हो गए, लेकिन पायलट को प्रदेश अध्यक्ष और उप मुख्यमंत्री के पद से हटा दिया गया। इसके बाद से पायलट सिर्फ एक विधायक की भूमिका हैं।
उधर सचिन पायलट के विरोध में खड़े विधायकों का कहना है कि बगावत करने वाले 18 विधायकों को छोड़कर किसी को भी मुख्यमंत्री बना दिया जाए। वह उसका समर्थन करेंगे।