facebookmetapixel
Advertisement
Karamtara IPO Listing: पहले ही दिन निवेशकों की बल्ले-बल्ले! ₹254 वाला शेयर ₹320 पर लिस्ट, मिला 26% प्रीमियमRentomojo IPO की शानदार लिस्टिंग! ₹482.45 पर शेयरों की एंट्री, निवेशकों को मिला 19% प्रीमियमARCIL IPO Listing: ₹139 पर सपाट लिस्टिंग, फिर 4% से ज्यादा टूटा शेयर; GMP दे रहा था 8.6% फायदे का संकेतNSE IPO Valuation: Nasdaq से लेकर BSE तक, किसके मुकाबले कहां खड़ा है NSE?रूस से तेल खरीदना भारत को पड़ेगा भारी? US House ने पास किया बिल, 100% टैरिफ का मंडराया खतराअगस्त में म्युचुअल फंड का पैसा किधर गया? इंश्योरेंस समेत इन 5 सेक्टरों में बढ़ा निवेश, यूटिलिटीज समेत इन 5 में घटाकच्चे तेल में गिरावट जारी, WTI $102 और Brent $105 के करीब; जानें क्यों घट रहे भावफेड द्वारा ब्याज दर बढ़ाने से सोना 1,957 रुपये सस्ता, चांदी भी 2,485 रुपये सस्तीSemicon India 2026: PM मोदी ने सेमीकंडक्टर कंपनियों के CEO से की मुलाकात, भारत में निवेश और नवाचार बढ़ाने पर जोरStock Market Update: सेंसेक्स सपाट, Nifty 23,200 के करीब; Fed की दर बढ़ोतरी के बाद IT शेयर दबाव में

सोशल मीडिया आतंकियों के लिए प्रभावी उपकरण : जयशंकर

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 12:47 PM IST

भारत ने ‘‘असामाजिक तत्वों’’ द्वारा एन्क्रिप्टेड संदेश और क्रिप्टो करेंसी जैसी नयी प्रौद्योगिकियों के संभावित दुरुपयोग को रोकने के लिए समन्वित वैश्विक प्रयास करने का शनिवार को आह्वान किया और आगाह किया कि सोशल मीडिया मंच आतंकवादी समूहों की ‘‘टूलकिट’’ में प्रभावशाली उपकरण बन गए हैं। 

दिल्ली में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (यूएनएससी) की आतंकवाद निरोधक समिति की विशेष बैठक को संबोधित करते हुए विदेश मंत्री एस जयशंकर ने कहा कि आतंकवादी समूहों, उनके ‘‘वैचारिक अनुयायियों’’ और ‘‘अकेले हमला करने वाले’’ (लोन वोल्फ) लोगों ने इन नयी प्रौद्योगिकियों तक पहुंच हासिल करके अपनी क्षमतायें बढ़ा ली हैं। 

जयशंकर ने स्पष्ट तौर पर पाकिस्तान के संदर्भ में यह भी कहा कि संयुक्त राष्ट्र की आतंकवाद रोधी प्रतिबंध व्यवस्था उन देशों को आगाह करने के लिए प्रभावी है, जिन्होंने आतंकवाद को ‘‘राज्य द्वारा वित्त पोषित उद्यम’’ बना लिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सभी 15 सदस्य देशों के प्रतिनिधि दिल्ली में हो रही इस बैठक के दूसरे दिन के सत्र में भाग ले रहे हैं। पहले दिन का सत्र मुंबई में आयोजित किया गया था। 

आतंकवाद का मुकाबला करने में भारत की प्रतिबद्धता दोहराते हुए विदेश मंत्री ने यह भी एलान किया कि नयी दिल्ली इस साल संयुक्त राष्ट्र ट्रस्ट फंड फॉर काउंटर-टेरररिज्म में पांच लाख डॉलर का स्वैच्छिक योगदान देगा। जयशंकर ने कहा कि पिछले दो दशकों में तकनीकी नवाचार दुनिया के काम करने के तरीके में परिवर्तनकारी रहे हैं और वर्चुअल निजी नेटवर्क तथा एन्क्रिप्टेड मैसेजिंग सेवाओं से लेकर आभासी मुद्राओं तक नयी एवं उभरती प्रौद्योगिकियां आर्थिक और सामाजिक लाभों के लिए एक आशाजनक भविष्य की पेशकश कर रही हैं। 

उन्होंने कहा कि हालांकि, जब बात आतंकवाद से संबंधित हो तो सिक्के का दूसरा पहलू भी सामने आता है। जयशंकर ने कहा, ‘‘इन नयी प्रौद्योगिकियों ने असामाजिक तत्वों द्वारा दुरुपयोग के लिहाज से कमजोर होने के कारण सरकारों तथा नियामक संस्थाओं के लिए नयी चुनौतियां पैदा की है।’’ उन्होंने कहा, ‘‘हाल के वर्षों में, खासतौर से खुले और उदार समाज में आतंकवादी समूहों, उनके वैचारिक अनुयायियों और अकेले हमला करने वाले लोगों ने इन प्रौद्योगिकियों तक पहुंच हासिल करके अपनी क्षमताएं बढ़ा ली हैं।’’ उन्होंने कहा, ‘‘वे आजादी, सहिष्णुता और प्रगति पर हमला करने के लिए प्रौद्योगिकी और पैसा तथा सबसे जरूरी खुले समाज के लोकाचार का इस्तेमाल करते हैं।’’ 

उन्होंने कहा, ‘‘इंटरनेट और सोशल मीडिया मंच समाज को अस्थिर करने के मकसद से दुष्प्रचार, कट्टरपंथ फैलाने तथा साजिश रचने के लिए आतंकवादियों और आतंकवादी समूहों की टूलकिट में प्रभावशाली उपकरण बनकर उभरे हैं।’’ जयशंकर ने कहा, ‘‘आतंकवादी समूहों और संगठित आपराधिक नेटवर्कों द्वारा मानवरहित हवाई प्रणालियों के इस्तेमाल ने दुनियाभर में सरकारों की चिंताओं को और बढ़ा दिया है।’’ उन्होंने कहा कि आतंकवादी समूहों द्वारा कुख्यात उद्देश्यों जैसे कि हथियारों एवं विस्फोटकों की डिलीवरी तथा लक्षित हमले करने के लिए इन मानवरहित हवाई प्रणालियों का ‘‘दुरुपयोग आसन्न खतरा’’ बन गया है। 

विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘रणनीतिक, बुनियादी और वाणिज्यिक संपत्तियों के खिलाफ आतंकवादी उद्देश्यों के लिए हथियारबंद ड्रोन के इस्तेमाल की आशंकाओं पर सदस्य देशों को गंभीरता से ध्यान देने की जरूरत है।’’ यह पहला मौका है जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद भारत में किसी भी रूप में बैठक का आयोजन कर रही है। 

आतंकवाद को मानवता के लिए ‘‘सबसे गंभीर खतरों में से एक’’ बताते हुए जयशंकर ने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने पिछले दो दशकों में आतंकवाद से निपटने के लिए मुख्य रूप से आतंकवाद रोधी प्रतिबंध व्यवस्था के आसपास निर्मित महत्वपूर्ण संरचना विकसित की है। उन्होंने कहा, ‘‘यह उन देशों को आगाह करने के लिए बहुत प्रभावी रही है, जिन्होंने आतंकवाद को राज्य द्वारा वित्त पोषित उद्यम बना लिया है।’’ जयशंकर ने कहा, ‘‘इसके बावजूद आतंकवाद का खतरा बढ़ रहा है, खासतौर से एशिया और अफ्रीका में, जैसा कि 1267 प्रतिबंध समिति निगरानी रिपोर्टों में बार-बार उल्लेख किया गया है।’’ 

उन्होंने कहा कि संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद द्वारा भारत में एक विशेष बैठक का आयोजन करना भी यह दिखाता है कि शीर्ष वैश्विक निकाय में नयी दिल्ली के मौजूदा कार्यकाल के दौरान आतंकवाद से मुकाबला शीर्ष प्राथमिकताओं में शुमार है। 

जयशंकर ने आतंकी समूहों द्वारा नयी एवं उभरती प्रौद्योगिकियों के दुरुपयोगों को रोकने के लिए आतंकवाद रोधी समिति में चर्चा करने का आह्वान किया। उन्होंने 26/11 मुंबई हमले में आतंकी नेटवर्कों द्वारा प्रौद्योगिकी के इस्तेमाल का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा, ‘‘हमारा अनुभव दिखाता है कि कैसे एक अच्छी तकनीक ‘वॉयस ओवर इंटरनेट प्रोटोकॉल’ का इस्तेमाल सीमा पार से बर्बर आतंकवादी हमले करने के लिए किया जा सकता है।’’ 

विदेश मंत्री ने कहा, ‘‘हाल ही में इन आतंकवादी समूहों ने सीमा पार से मादक पदार्थ तथा हथियारों की तस्करी करने तथा आतंकवादी हमले करने के लिए ड्रोन जैसे मानवरहित हवाई प्रणालियों का इस्तेमाल किया है।’’ 

उन्होंने आगाह किया कि ऐसे खतरे केवल भारत तक सीमित नहीं हैं। बैठक में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद के सदस्य देशों के प्रतिनिधियों के अलावा वैश्विक विशेषज्ञ और संबंधित वैश्विक एजेंसियां भी भाग ले रही हैं।

Advertisement
First Published - October 29, 2022 | 2:40 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement