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रक्षा क्षेत्र में हो सकता है ऐतिहासिक बदलाव! भारतीय सेना में महिलाओं की टेरिटोरियल आर्मी में एंट्री की तैयारी

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मार्च 2022 में राज्यसभा में दिए जवाब में तत्कालीन रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने बताया था कि महिलाओं की लड़ाकू भूमिका पर विचार चल रहा है और इसे समय-समय पर रिव्यू किया जाता है

Last Updated- November 16, 2025 | 8:50 PM IST
women soldiers in indian army
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

भारतीय सेना अब महिलाओं को टेरिटोरियल आर्मी के कुछ बटालियनों में शामिल करने की सोच रही है। सूत्रों के मुताबिक, ये पायलट प्रोजेक्ट के तौर पर शुरू होगा। पहले सिर्फ चुनिंदा बटालियनों में भर्ती होगी, फिर शुरुआती फीडबैक देखकर दूसरे बटालियनों में बढ़ाई जा सकती है। इससे सेना में महिलाओं के लिए और दरवाजे खुलेंगे।

सरकार लगातार ‘नारी शक्ति’ को बढ़ावा दे रही है। मार्च 2022 में राज्यसभा में दिए जवाब में तत्कालीन रक्षा राज्य मंत्री अजय भट्ट ने बताया था कि महिलाओं की लड़ाकू भूमिका पर विचार चल रहा है और इसे समय-समय पर रिव्यू किया जाता है। अभी महिलाएं सेना में 10 ब्रांचों में कमीशन पा रही हैं। इनमें इंजीनियर्स कोर, सिग्नल्स कोर, आर्मी एयर डिफेंस, आर्मी सर्विस कोर, ऑर्डनेंस कोर, इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स कोर, एविएशन कोर, इंटेलिजेंस कोर, जज एडवोकेट जनरल ब्रांच और एजुकेशन कोर शामिल हैं। इसके अलावा मेडिकल सर्विसेज में भी हैं।

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टेरिटोरियल आर्मी की शुरुआत और भूमिका

टेरिटोरियल आर्मी की नींव 18 अगस्त 1948 को रखी गई थी, जब टेरिटोरियल आर्मी एक्ट पास हुआ। इसे पहली बार 9 अक्टूबर 1949 को भारत के पहले गवर्नर जनरल सी राजगोपालाचारी ने उद्घाटन किया। ये एक तरह की ‘नागरिक सैनिक सेना’ है। इसमें आम नागरिक, जो रेगुलर आर्मी में उम्र की वजह से नहीं जा सकते, देश की सेवा कर सकते हैं।

अभी इसमें करीब 50 हजार जवान हैं। 65 डिपार्टमेंटल यूनिट्स हैं, जैसे रेलवे, आईओसी, ओएनजीसी। इसके अलावा नॉन-डिपार्टमेंटल यूनिट्स में इन्फैंट्री बटालियन, होम एंड हार्थ बटालियन, इकोलॉजिकल बटालियन और इंजीनियर रेजिमेंट शामिल हैं। इंजीनियर यूनिट्स लाइन ऑफ कंट्रोल की फेंसिंग संभालती हैं।

ये यूनिट्स कई ऑपरेशंस में सक्रिय रहीं। 1962, 1965 और 1971 की जंगों में हिस्सा लिया। श्रीलंका में ऑपरेशन पवन, पंजाब-जम्मू कश्मीर में ऑपरेशन रक्षक, नॉर्थईस्ट में ऑपरेशन राइनो और बजरंग में भी ‘टेरियर्स’ ने बढ़-चढ़कर योगदान दिया। ये भागीदारी दिखाती है कि टेरिटोरियल आर्मी कितनी अहम है। अब महिलाओं का आना इसे और मजबूत बनाएगा।

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First Published - November 16, 2025 | 8:26 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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