देश में राष्ट्रव्यापी टीकाकरण अभियान के शुरुआती पांच दिनों में लगभग 8,00,000 लाभार्थियों को कोविड-19 टीके की पहली खुराक दी गई है। साथ ही, किसी टीकाकरण सत्र में कम संख्या में लोगों के पहुंचने की स्थिति में पहले से को-विन प्लेटफॉर्म पर पंजीकृत लोगों तत्काल टीकाकरण उपलब्ध कराने की सुविधा के लिए को-विन प्रणाली को उन्नत बनाया गया है। स्वास्थ्य मंत्रालय ने टीके की पहली खुराक लेने वाले लोगों को एक अस्थायी टीकाकरण प्रमाणपत्र देने का भी फैसला किया है और दूसरी खुराक लेने के बाद उन्हें अंतिम प्रमाणपत्र भी दिया जाएगा। व्यक्ति को एक महीने के अंतराल में दोनों खुराक लेनी होगी। दूसरी खुराक के चौदह दिनों के बाद ऐंटीबॉडी का प्रभाव होगा। डेटाबेस में पहले से पंजीकृत लाभार्थी को किसी टीकाकरण सत्र में शामिल किया जा सकता है। किसी व्यक्ति को डेटाबेस में उसके मोबाइल नंबर द्वारा भी खोजा जा सकता है।
देश में टीकाकरण के बाद अब तक चार लोगों की मौत हो चुकी है, लेकिन उनकी मौत एवं टीके के बीच फिलहाल कोई कड़ी स्थापित नहीं की जा सकी है। टीका लगने के एक दिन बाद उत्तर प्रदेश एवं कर्नाटक में हुई दो मौतों के बाद, कर्नाटक के शिवमोगा जिले एवं तेलंगाना के निर्मल में दो और लोगों की मौत की जानकारी सामने आई है। पहले व्यक्ति को दिल का दौरा पडऩे से मौत की आशंका जताई जा रही है, जो टीके से किसी भी तरह संबंधित नहीं है तो वहीं दूसरे व्यक्ति की पोस्टमार्टम रिपोर्ट आने के बाद जानकारी सामने आएगी।
स्वास्थ्य मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव मनोहर अगनानी ने कहा, ‘अभी तक, टीकाकरण के बाद किसी भी गंभीर या अति-गंभीर प्रतिकूल घटना के लिए टीके को जिम्मेदार नहीं ठहराया गया है।’
बुधवार को 20 राज्यों में टीकाकरण अभियान चलाया गया। बुधवार को शाम 6 बजे तक 1,12,000 से अधिक लाभार्थियों को टीके की पहली खुराक दी गई।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जिलाधिकारियों एवं जिला प्रतिरक्षण अधिकारियों को टीकाकरण साइटों एवं कोल्ड चेन केंद्र प्रभारियों के साथ दैनिक आधार पर समीक्षा बैठकें करने की सलाह दी है।