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US-Iran War: अमेरिका-ईरान सीजफायर बढ़ेगा? पूर्व Centcom चीफ का दावा, शांति वार्ता में नया मोड़

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अमेरिका-ईरान संघर्ष में सीजफायर बढ़ने और नई वार्ता की संभावना जताई जा रही है, जबकि होर्मुज और परमाणु मुद्दे तनाव बढ़ा रहे हैं।

Last Updated- April 21, 2026 | 3:57 PM IST
Iran US Conflict
Representative image

US-Iran War: अमेरिका और ईरान के बीच जारी संघर्षविराम को आगे बढ़ाए जाने की संभावना जताई जा रही है। पूर्व अमेरिकी सेंट्रल कमांड प्रमुख और CIA निदेशक रह चुके जनरल (रि.) David H Petraeus ने कहा है कि दोनों देश बातचीत जारी रखने के इच्छुक दिख रहे हैं, ऐसे में सीजफायर को आगे बढ़ाया जा सकता है।

पेट्रियस के अनुसार, वर्तमान संघर्षविराम की अवधि बुधवार को समाप्त हो रही है, लेकिन परिस्थितियां इस ओर इशारा कर रही हैं कि इसे आगे भी जारी रखा जा सकता है। उन्होंने कहा कि बातचीत करने वाले दोनों पक्ष एक दूसरे से संपर्क बनाए हुए हैं और दूसरे दौर की वार्ता की तैयारी भी चल रही है, जो इस्लामाबाद में हो सकती है। हालांकि, उन्होंने यह भी माना कि अभी अंतिम रूप से यह स्पष्ट नहीं है कि सभी पक्ष इसमें शामिल होंगे या नहीं।

उन्होंने एक इंटरव्यू में PTI को बताया कि अमेरिका और ईरान दोनों ही संघर्षविराम को आगे बढ़ाने के पक्ष में दिख रहे हैं।

इस बीच अमेरिकी मीडिया रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि अमेरिका के उपराष्ट्रपति जेडी वेंस मंगलवार को इस्लामाबाद जा सकते हैं, जहां ईरान के साथ शांति वार्ता की संभावना है। इन वार्ताओं का उद्देश्य दोनों देशों के बीच लगभग सात हफ्तों से जारी तनाव को समाप्त करना बताया जा रहा है।

दूसरी ओर ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बाघई ने कहा है कि उनका देश अभी यह तय नहीं कर पाया है कि वह अमेरिका के साथ होने वाले अगले दौर की वार्ता में शामिल होगा या नहीं। उन्होंने संकेत दिया कि निर्णय अभी विचाराधीन है।

उन्होंने कहा है कि मौजूदा हालात बेहद अस्थिर हैं और जमीनी स्थिति तेजी से बदल रही है।

पेट्रेयस के अनुसार, रणनीतिक रूप से अहम होर्मुज जलडमरूमध्य में दोनों देशों ने एक-दूसरे के खिलाफ नाकेबंदी जैसी स्थिति बना दी है, जिससे समुद्री व्यापार और जहाजों की आवाजाही लगभग ठप हो गई है। उन्होंने यह भी कहा कि इस क्षेत्र में छोटे स्तर पर हमले भी सामने आए हैं, जिनमें ईरान पर आरोप लगाया गया है कि उसने कुछ जहाजों को वापस लौटने पर मजबूर किया या उन्हें खतरा पैदा किया।

उन्होंने आशंका जताई कि इस स्थिति में अमेरिका की ओर से सैन्य कार्रवाई भी हो सकती है, यदि जरूरत पड़ी तो बल प्रयोग किया जा सकता है, ताकि ईरान की नाकेबंदी का जवाब दिया जा सके और समुद्री मार्गों को फिर से खोला जा सके।

पेट्रेयस ने अमेरिका के दो प्रमुख कूटनीतिक और रणनीतिक लक्ष्य भी बताए। पहला उद्देश्य है कि होर्मुज जलडमरूमध्य और खाड़ी क्षेत्र में समुद्री आवाजाही पूरी तरह स्वतंत्र हो, और किसी भी तरह का नियंत्रण या शुल्क ईरान द्वारा न लगाया जाए।

दूसरा लक्ष्य ईरान के परमाणु कार्यक्रम से जुड़ा है। उन्होंने कहा कि अमेरिका चाहता है कि ईरान यूरेनियम संवर्धन का अपना अधिकार छोड़ दे और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी या किसी अन्य स्वतंत्र संस्था को अपने पास मौजूद करीब 1,000 पाउंड 60 प्रतिशत संवर्धित यूरेनियम की निगरानी और हटाने की अनुमति दे।

अमेरिका के पूर्व सेंट्रल कमांड (Centcom) प्रमुख जनरल डेविड पेट्रेयस ने ईरान के खिलाफ जारी सैन्य स्थिति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने कहा कि अमेरिका और इज़राइल द्वारा चलाया गया संयुक्त अभियान सैन्य दृष्टि से काफी प्रभावी रहा है, जिसमें ईरान की एयर डिफेंस प्रणाली, मिसाइल क्षमता और कई सैन्य ढांचों को भारी नुकसान पहुंचा है।

हालांकि, पेट्रेयस ने यह भी माना कि इस संघर्ष का समग्र परिणाम अभी “अधूरा” है और स्थिति पूरी तरह नियंत्रित नहीं कही जा सकती।

होर्मुज स्ट्रेट पर टिकी रणनीतिक लड़ाई

उन्होंने चेतावनी दी कि यदि होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) को पूरी तरह से मुक्त आवाजाही के लिए दोबारा नहीं खोला गया, तो ईरान भले ही सैन्य रूप से कमजोर हो, लेकिन रणनीतिक रूप से उसे फायदा मिल सकता है। यह वैश्विक तेल आपूर्ति और व्यापार के लिए बेहद अहम मार्ग माना जाता है।

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पेट्रेयस के अनुसार आगे के विकल्प खुले हुए हैं। इनमें फिर से हवाई हमलों की तीव्रता बढ़ाना या जरूरत पड़ने पर जमीनी सैन्य कार्रवाई की संभावना भी शामिल है। हालांकि उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि ईरान में शासन बदलने या बड़े पैमाने पर आक्रामक जमीनी अभियान की संभावना बहुत कम है।

पूर्व Centcom प्रमुख ने यह भी बताया कि अमेरिका को पहले से जानकारी थी कि इज़राइल ईरान पर हमला करने की योजना बना रहा है। इसका कारण ईरान की लगातार बढ़ती मिसाइल क्षमता और उससे उत्पन्न सुरक्षा खतरे को माना गया।

फरवरी के हमले और क्षेत्रीय तनाव

रिपोर्ट के अनुसार 28 फरवरी को अमेरिका और इज़राइल ने मिलकर ईरान पर हमला किया था, जिसमें ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई और कई शीर्ष सैन्य कमांडरों की मौत हो गई थी। इसके बाद ईरान की जवाबी कार्रवाई ने संघर्ष को पूरे खाड़ी क्षेत्र तक फैला दिया।

इसी बीच 11 और 12 अप्रैल को इस्लामाबाद में हुई अमेरिका और ईरान के बीच वार्ता में युद्ध समाप्त करने को लेकर कोई समझौता नहीं हो सका। दोनों पक्ष किसी नतीजे पर पहुंचने में असफल रहे।

इस पूरे घटनाक्रम के बीच क्षेत्र में तनाव लगातार बना हुआ है और कूटनीतिक प्रयासों के बावजूद समाधान की तस्वीर फिलहाल साफ नहीं दिख रही है।

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First Published - April 21, 2026 | 3:57 PM IST

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