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ईरान को प्रतिबंधों में मिलेगी ढील, होर्मुज स्ट्रेट खुलने की संभावना

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अमेरिका और ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता से दो हफ्ते के युद्ध विराम पर सहमति जताई है, जिससे छह हफ्ते से जारी युद्ध थम गया है

Last Updated- April 08, 2026 | 11:22 PM IST
Iran
संघर्ष-विराम की घोषणा के बाद तेहरान में जश्न मनाते लोग। फोटो: रॉयटर्स

अमेरिका और ईरान ने पाकिस्तान की मध्यस्थता से दो हफ्ते के युद्ध विराम पर सहमति जताई है, जिससे छह हफ्ते से जारी युद्ध थम गया है। यह संघर्ष पूरे पश्चिम ए​शिया में फैल गया था जिसमें हजारों लोग मारे गए और इसने दुनिया की ऊर्जा आपूर्ति में अभूतपूर्व बाधाएं खड़ी कर दी थीं।

संघर्ष विराम की घोषणा के बाद अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप ने आज कहा कि अमेरिका, ईरान के साथ मिलकर काम करेगा और दोनों देश शुल्क तथा प्रतिबंधों में राहत देने पर चर्चा कर रहे हैं। चर्चा में शामिल एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने रॉयटर्स को बताया कि अगर युद्ध विराम के लिए किसी रूपरेखा पर सहमति बनती है तो पाकिस्तान में होने वाली प्रस्तावित शांति वार्ता से पहले ईरान गुरुवार या शुक्रवार को होर्मुज स्ट्रेट खोल सकता है।

मंगलवार देर रात ट्रंप द्वारा समझौते की घोषणा किए जाने के बाद इस क्षेत्र की कई सड़कों और वैश्विक वित्तीय बाजारों में राहत का माहौल दिखा। यह घोषणा उस समय-सीमा से ठीक दो घंटे पहले की गई, जिसमें ट्रंप ने ईरान को चेतावनी देते हुए कहा था कि वह तय समय में होर्मुज स्ट्रेट को खोल दे नहीं तो उसकी ‘संपूर्ण सभ्यता’ का विनाश कर दिया जाएगा। अमेरिका और ईरान में युद्ध विराम की सहमति के बावजूद क्षेत्र में अनि​श्चितता बनी हुई है।

इजरायल ने ईरान पर अपने हमले रोक दिए मगर उसने लेबनान में अपने समानांतर युद्ध को और तेज कर दिया है। लेबनान में बेरूत के रिहायशी इलाकों में जोरदार धमाके हुए और आसमान में धुएं के विशाल बादल छा गए। बेरूत और दक्षिणी इलाकों के निवासियों ने बताया कि ये हमले बिना किसी पूर्व चेतावनी के हुए। कुवैत, संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने कहा कि अभी भी ईरानी मिसाइलों और ड्रोन द्वारा किए जा रहे हमले हो रहे हैं।

पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ़ ने कहा कि उन्होंने ईरानी और अमेरिकी प्रतिनिधिमंडलों को शुक्रवार को इस्लामाबाद में मुलाकात के लिए आमंत्रित किया है, जो इस युद्ध की पहली आधिकारिक शांति वार्ता होगी और ईरान के राष्ट्रपति ने इस बात की पुष्टि की है कि तेहरान इसमें शामिल होगा। लेकिन अमेरिका की ओर से आमने-सामने की बातचीत में शामिल होने की योजनाओं की कोई आधिकारिक पुष्टि नहीं की गई। व्हाइट हाउस ने कहा कि जब तक औपचारिक रूप से घोषणा नहीं की जाती, तब तक किसी भी बैठक को आधिकारिक नहीं माना जाएगा।

अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल के संभावित प्रमुख माने जा रहे अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा कि ट्रंप ने वार्ताकारों से किसी समझौते पर पहुंचने की कोशिश करने को कहा है लेकिन वेंस ने किसी विशिष्ट समय या स्थान पर बातचीत होने की पुष्टि नहीं की।

ट्रंप ने आज सुबह एक के बाद एक ऑनलाइन पोस्ट में कहा कि जो देश ईरान को हथियार की आूपर्ति करेगा, उस देश के निर्यात पर अमेरिका 50 फीसदी का नया शुल्क लगाएगा। उन्होंने जोर देकर कहा कि ईरान में ‘सत्ता परिवर्तन’ हो चुका है और वह यूरेनियम संवर्धन नहीं करने पर सहमत है।

अमेरिका के रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ ने कहा कि अमेरिका ने एक निर्णायक सैन्य जीत हासिल की है और ईरान का मिसाइल कार्यक्रम व्यावहारिक रूप से नष्ट हो चुका है।

अमेरिका ने कहा कि ईरान होर्मुज स्ट्रेट को खोलने पर सहमत हो गया है। लेकिन एक वरिष्ठ ईरानी अधिकारी ने स्पष्ट किया कि होर्मुज का खुलना ढांचागत संघर्ष-विराम समझौते पर पहुंचने की शर्त पर निर्भर है। अधिकारी ने कहा कि अगर सहमति बनती है तो शुरुआत में यह रास्ता सीमित होगा और जहाजों को वहां से गुजरने के लिए ईरान की अनुमति लेनी होगी।

युद्ध विराम पर सहमति की घोषणा के बाद ईरान की सड़कों पर भीड़ जश्न मनाने के लिए उमड़ पड़ी। लोग ईरान के झंडे लहरा रहे थे और अमेरिका तथा इजरायल के झंडे जला रहे थे। लेकिन इस बात को लेकर भी आशंका थी कि यह समझौता शायद टिक न पाए।

यह युद्ध 28 फरवरी को ट्रंप और इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू द्वारा शुरू किया गया था। उन्होंने घोषणा की थी कि उनका उद्देश्य ईरान को अपनी सीमाओं से बाहर अपनी शक्ति का विस्तार करने से रोकना, उसके परमाणु कार्यक्रम को समाप्त करना और ईरानियों के लिए ऐसी परिस्थितियाँ निर्मित करना है जिससे वे अपने शासकों को सत्ता से हटा सकें।

नेतन्याहू के कार्यालय ने ईरान पर दो हफ्तों के लिए हमले रोकने के फैसले का समर्थन किया है। लेकिन यह समझौता इजरायली नेता के लिए एक झटका है, जिन्होंने बार-बार कहा था कि वह चाहते हैं कि ईरान के शासकों का पतन हो। इजरायली सेना के पूर्व डिप्टी चीफ ऑफ स्टाफ यायर गोलान ने इस नतीजे को ‘पूरी तरह से नाकामी’ बताया, जिससे इजरायल की सुरक्षा ख़तरे में पड़ गई है।

अगर घोषणा के अनुसार शुक्रवार को इस्लामाबाद में शांति वार्ता शुरू होती है तो इसकी शुरुआत दोनों पक्षों की मुख्य मांगों के अनसुलझे रहते ही होगी। अमेरिका ने अपनी मांगें 15-सूत्रीय योजना के रूप में पेश की हैं जबकि ईरान ने अपनी 10-सूत्रीय योजना सौंपी है।

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First Published - April 8, 2026 | 11:20 PM IST

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