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ब्रिटेन में कामकाजियों की दौड़ में भारतीय हैं सबसे आगे

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Last Updated- December 10, 2022 | 5:34 PM IST

ब्रिटेन में रहने वाले भारतीय मूल के लोगों की गिनती अब वहां सबसे ज्यादा रोजगार प्राप्त करने वालों समूहों में होती है।


ब्रिटेन में रहने वाले अल्पसंख्यकों में भारतीय मूल के लोगों की संख्या सर्वाधिक है। राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय के वर्ष 2008 के ताजा आधिकारिक प्रकाशन सोशल ट्रेंड्स के मुताबिक ब्रिटेन में रह रहे कामकाजी उम्र के लोगों में सबसे ज्यादा यानी 25 फीसदी चीनी बेरोजगार हैं।


इसके अनुपात में सबसे कम बेरोजगार लोगों का समूह भारतीय मूल के लोगों का है। महज 10 फीसदी भारतीय ही ब्रिटेन में बेरोजगार हैं। वहीं 11 फीसदी गोरे लोगों के पास रोजगार नहीं है।


सोशल ट्रेंड्स वर्ष 2007 की समाज की ताजा और विस्तृत जानकारी उपलब्ध कराता है। यह सरकारी विभागों और अन्य संस्थानों से मिले अन्य आंकड़ों को लेकर समाज में हो रहे बदलाव और चलन के लिए जिम्मेदार कारणों को दर्शाता है। अध्ययन के मुताबिक ब्रिटेन में कार्यरत कर्मचारियों में एशियाई मूल के नागरिक सबसे ज्यादा हैं।


जनसंख्या का 5 फीसदी हिस्सा एशियाई लोगों का है। अध्ययन के अनुसार ब्रिटेन में भारतीयों की संख्या 12,15,000 है। यह दर्शाता है कि ब्रिटेन में दूसरे देशों के मूल के लोगों की सबसे ज्यादा विविधता पाई जाती है। ब्रिटेन में गोरों की संख्या अभी भी 90 फीसदी के साथ सर्वाधिक है। वर्ष 2001 में 93 फीसदी गोरे ब्रिटेन में रहते थे।


अगर पेशे के लिहाज से देखें तो पता चलता है कि देश में मध्यम से लेकर ऊंचे दर्जे तक के पदों पर भारतीयों का कब्जा बना हुआ है। पर इनमें सबसे अधिक संख्या उन कामगारों को है जिन्हें मध्यम स्तर की तनख्वाह दी जाती है। यह भी स्पष्ट हैकि देश में रोजगार के अवसरों में कमी से भारतीय भी प्रभावित हुए हैं।

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First Published - April 9, 2008 | 10:25 PM IST

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