जी7 देशों के विदेश मंत्रियों ने शुक्रवार को ईरान युद्ध में नागरिकों और नागरिक बुनियादी ढांचे के खिलाफ हमलों को तत्काल रोकने की मांग की है। फ्रांस में जी7 की बैठक के दूसरे दिन संयुक्त बयान में इन मंत्रियों ने कहा कि उन्होंने क्षेत्रीय भागीदारों, नागरिक आबादी और महत्त्वपूर्ण बुनियादी ढांचे पर संघर्ष के प्रभाव को कम करने पर जोर दिया है। फ्रांस जी7 देशों के विदेश मंत्रियों की इस बैठक की मेजबानी कर रहा है।
समूह में शामिल देशों के साझा बयान में कहा गया, ‘इस युद्ध के कारण आर्थिक, ऊर्जा, उर्वरक और वाणिज्यिक आपूर्ति श्रृंखलाओं में व्यवधान से वैश्विक स्तर पर होने वाले आर्थिक नुकसान को कम करने के लिए हमने अलग-अलग साझेदारों के बीच आपसी समन्वय के साथ तमाम पहल शुरू करने के महत्त्व पर ध्यान केंद्रित किया, क्योंकि इसका आम नागरिकों पर सीधा प्रभाव पड़ता है।’ विदेश मंत्रियों ने होर्मुज स्ट्रेट में सुरक्षित और शुल्क-मुक्त नौवहन बहाल करने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। जी7 में अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली और जापान जैसे देश शामिल हैं। साथ ही यूरोपीय संघ भी इसका हिस्सा है।
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इस बीच, विदेश मंत्री एस जयशंकर और कनाडा की विदेश मंत्री अनीता आनंद ने फ्रांस में जी7 बैठक के इतर मुलाकात कर पश्चिम एशिया संकट और उसके परिणामों पर प्रमुखता से चर्चा की। जयशंकर जी7 के सदस्य देशों के विदेश मंत्रियों की बैठक में भाग लेने गुरुवार को यहां पहुंचे। कनाडा की विदेश मंत्री ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर पोस्ट में बताया कि उन्होंने एवं जयशंकर ने जी7 बैठक से इतर मुलाकात की तथा दोनों नेताओं ने ‘इस साल की शुरुआत में हमारी भारत यात्रा के दौरान दोनों देशों के प्रधानमंत्रियों द्वारा आगे बढ़ाई गई साझेदारी पर बातचीत की।’
उन्होंने कहा कि दोनों नेताओं ने ‘व्यापार, पश्चिम एशिया में स्थिति और दुर्लभ खनिज, कृषि एवं शिक्षा सहित उन प्रमुख क्षेत्रों पर भी चर्चा की, जिनमें सहयोग को और गहरा किया जा सकता है।’