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सीमा निर्धारित नहीं, समस्याएं रहेंगी: चीन

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Last Updated- December 15, 2022 | 2:44 AM IST

चीन के विदेशमंत्री वांग यी ने कहा है कि भारत-चीन सीमा का अभी सीमांकन किया जाना बाकी है और इसलिए वहां पर हमेशा समस्याएं बनी रहेंगी। उन्होंने कहा कि दोनों देशों को मतभेदों को संघर्ष में तब्दील होने से रोकने के लिए उनके नेतृत्व के बीच बनी सहमति को लागू करना चाहिए। वांग ने यह भी कहा कि चीन भारत के साथ सभी मुद्दों को बातचीत के जरिये सुलझाने को तैयार है। चीन के विदेश मंत्री इस समय यूरोप की यात्रा पर हैं और उन्होंने यह टिप्पणी सोमवार को पेरिस स्थित ‘फ्रेंच इंस्टीट्यूट ऑफ इंटरनैशनल रिलेशन्स’ में एक संवाद के दौरान की।  भारत एवं जापान से चीन के संबंधों से जुड़े एक सवाल पर मंत्री ने पूर्वी लद्दाख में चीनी सेना की उकसावे की नवीनतम कार्रवाई का सीधा उल्लेख नहीं किया। उनकी यह टिप्पणी भारतीय सेना के इस बयान के घंटों बाद आया जिसमें कहा गया कि चीनी सेना ने पूर्वी लद्दाख में उकसावे की कार्रवाई करते हुए पैगोंग झील के दक्षिण में एकतरफा तरीके से यथास्थिति बदलने की कोशिश की।
उल्लेखनीय है कि 15 जून को पूर्वी लद्दाख के ही गलवान घाटी में चीनी और भारतीय सैनिकों के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद इलाके में यह पहली बड़ी घटना है। गलवान घाटी में हुई झड़प में भारतीय सेना के 20 जवान शहीद हो गए थे। वांग ने कहा, ‘चीन-भारत संबंध ने हाल में सभी पक्षों का ध्यान आकर्षित किया है।’ उन्होंने कहा, ‘चीन और भारत की सीमा का अबतक सीमांकन नहीं हुआ है, इसलिए वहां पर इस तरह की समस्याएं हमेशा रहेंगी। हम भारत के साथ सभी मुद्दों को बातचीत से निपटाने को तैयार हैं।’
वांग ने कहा कि इसके साथ ही द्विपक्षीय सबंधों में इन मुद्दों को उनके सही स्थान पर रखना चाहिए। चीनी विदेशमंत्री ने कहा कि चीनी राष्ट्रपति शी चिनफिंग और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कई बार मुलाकात की है और कई अहम सहमति पर पहुंचे हैं। उन्होंने कहा, ‘उदाहरण के लिए, ड्रैगन (चीन) और हाथी (भारत) एक दूसरे से प्रतिस्पर्धा करने के बजाय’, ‘ड्रैगन और हाथी मिलकर काम करेंगे।’ उन्होंने कहा, ‘एक जोड़ एक दो नहीं, बल्कि 11 होते हैं। और ये सब दार्शनिक विचार हैं।’
वांग ने कहा कि उदाहरण के लिए दोनों देशों के नेताओं ने सहमति जताई कि द्विपक्षीय सहयोग मतभेदों पर पर भारी पड़ते हैं और आपसी हित मतभेदो पर भारी पड़ते हैं। वांग ने कहा, ‘मतभेदों का प्रबंधन और नियंत्रण किया जाना चाहिए, खासतौर पर मतभेदों को संघर्ष में तब्दील नहीं होने देना चाहिए। मैं मानता हूं कि दोनों देशों के विभिन्न विभागों को इन अहम आम सहमतियों को लागू करना चाहिए।’  

पूर्वी लद्दाख में ब्रिगेड कमांडर स्तरीय वार्ता
भारत और चीन ने पूर्वी लद्दाख में पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे पर दोनों पक्षों के बीच ताजा टकराव से उत्पन्न तनाव को कम करने के लिए मंगलवार को एक और दौर की सैन्य वार्ता की। सरकारी सूत्रों ने यह जानकारी दी। उन्होंने कहा कि ब्रिगेड कमांडर-स्तरीय वार्ता पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा (एलएसी) पर भारतीय क्षेत्र में चुशूल में सुबह 10 बजे शुरू हुई। बैठक का विशिष्ट एजेडा पैंगोंग झील के आसपास की स्थिति पर चर्चा है।
भारतीय सेना ने सोमवार को कहा था कि चीनी सेना ने 29 और 30 अगस्त की दरम्यानी रात पूर्वी लद्दाख में उकसावे की कार्रवाई करते हुए पैंगोंग झील के दक्षिण में एकतरफा तरीके से यथास्थिति बदलने की कोशिश की। लेकिन भारतीय सैनिकों ने उसे नाकाम कर दिया। सूत्रों ने कहा कि दोनों पक्षों ने सोमवार को करीब छह घंटे तक बातचीत की, लेकिन उसका कोई ठोस नतीजा नहीं निकला। उन्होंने कहा कि कि क्षेत्र पर कब्जा करने के प्रयास के तहत बड़ी संख्या में चीनी सैनिक पैंगोंग झील के दक्षिणी किनारे की ओर बढ़ रहे थे। करीब साढ़े तीन महीने से चल रहे सीमा विवाद को हल करने के लिए दोनों पक्षों के बीच बातचीत जारी है। उन्होंने कहा कि इससे पहले दोनों पक्षों के बीच पैंगोंग झील के उत्तरी तट पर टकराव था, लेकिन यह पहला मौका है जब इस तरह की घटना दक्षिणी तट पर हुई। चीन की कोशिश के बाद भारतीय सेना ने झील के आसपास कई सामरिक स्थानों पर अपनी उपस्थिति बढ़ा दी है। भाषा

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First Published - September 1, 2020 | 11:34 PM IST

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