पश्चिम एशिया में चल रहे सैन्य संघर्ष का असर केवल व्यापार मार्गों और कच्चे तेल की कीमतों पर ही नहीं पड़ा है, इससे ब्रांड दुबई भी प्रभावित हो रहा है। ईरान की ओर से कतर, सऊदी अरब और यूएई जैसे देशों में चुनिंदा हमले किए जाने से यहां अनिश्चितता के बादल छाए हुए हैं। इसका सबसे अधिक असर दुबई पर पड़ा है, जो लंबे समय से अपने गोल्डन वीजा और अनुकूल कराधान नीतियों की वजह से वैश्विक स्तर पर सबसे सुरक्षित जगह और प्रवासियों के आकर्षण का केंद्र रहा है। हालांकि विशेषज्ञों का मानना है कि दुबई इन हालात से बहुत जल्द उबर आएगा।
फ्यूचरब्रांड्स में ब्रांड विशेषज्ञ और मुख्य कार्यकारी अधिकारी संतोष देसाई ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया, ‘दुबई पर हाल फिलहाल जरूर असर दिख रहा है, लेकिन इस ब्रांड की छवि पर लंबे समय तक बड़ा असर नहीं पड़ेगा। अरबी रेगिस्तान के बीच स्थित दुबई को एक शांत जगह के रूप में जाना जाता है, जो जीवंत और सुरक्षित है। यहां वह सब कुछ जो प्रवासियों को लुभाने के जरूरी होता है।’
उन्होंने कहा, ‘भले ही पश्चिम एशिया में उथल-पुथल रही है, लेकिन दुबई इससे ज्यादातर अछूता ही रहा है। लेकिन मौजूदा युद्ध का लोगों पर गंभीर असर पड़ा है। कहा जाता है कि मनोविज्ञान और भूगोल एक समान नहीं होते। जब आसपास लड़ाई छिड़ी हो तो भले ही कोई इसमें सीधे तौर पर शामिल न हो, लेकिन उस पर असर अवश्य पड़ता है।’
दुबई, यूएई महासंघ बनाने वाले सात संप्रभु अमीरातों में से एक है, जो दुनिया में सबसे अधिक 6 से 9% किराया लाभ देता है। यहां बड़ी संख्या में भारतीय रहते हैं, जो सबसे बड़ा विदेशी निवेशक समूह है। यहां सभी विदेशी संपत्ति खरीदारों में भारतीयों की हिस्सेदारी 20 से 22% है। एनारॉक के आंकड़ों के अनुसार, दुबई के तेज प्रॉपर्टी बाजार ने 2025 में अब तक के सबसे अधिक 250 अरब डॉलर के रियल एस्टेट सौदे दर्ज किए थे। इससे यह निवेशकों के लिए और भी अधिक आकर्षक बाजार बन कर उभरा है। इसी के मद्देनजर रियल एस्टेट खिलाड़ियों का मानना है कि शहर की ब्रांड छवि पर पश्चिम एशिया में छिड़े युद्ध का प्रभाव बहुत कम होगा।
दुबई स्थित रियल एस्टेट रणनीतिकार और प्रोएक्ट लग्जरी रियल एस्टेट के सीईओ रितु कांत ओझा ने कहा, ‘हमें छोटे खरीदारों की चिंताओं को बड़े समूहों के मुकाबले अलग नजरिए से देखने की जरूरत है। खुदरा खरीदार अपना निर्णय टाल सकता है या इसमें देर कर सकता है, लेकिन पारिवारिक कार्यालयों और हेज फंडों के लिए एक सुरक्षित ठिकाने का मतलब यह नहीं है कि वह क्षेत्र हमेशा पूरी तरह शांत या शोर से मुक्त हो।’
ओझा ने यह भी कहा, ‘इसका मतलब है कि शोर या अस्थिर माहौल में भौतिक रक्षा ढांचे और बैंकिंग तटस्थता से वित्तीय सुरक्षा का अहसास होता है। सप्ताहांत में यह देखा भी गया है। क्षेत्रीय खतरों को सफलतापूर्वक नाकाम किया गया तो निवेशकों को पता चल गया कि दुबई का सुरक्षा खाका बहुत मजबूत है। यह सिर्फ भाग्य के भरोसे नहीं है।’
एनारॉक में कार्यकारी निदेशक और अनुसंधान और सलाहकार प्रमुख प्रशांत ठाकुर ने कहा कि ईरान और खाड़ी क्षेत्र में संघर्ष बढ़ने और यूएई के कुछ हिस्सों में हमले होने पर निवेशकों के दिमाग में यह सवाल तो कोंधता ही है कि क्या क्षेत्रीय अस्थिरता के कारण दुनिया के सबसे गतिशील प्रॉपर्टी बाजारों में से एक दुबई की व्यवस्था पटरी से उतार जाएगी? हालिया माहौल को देखते हुए निस्संदेह निवेशक सावधानी बरतेंगे और इससे आने वाले समय में लेनदेन प्रभावित होगा।
उन्होंने कहा, ‘दुबई तक हमले पश्चिम एशिया में एक सुरक्षित आर्थिक केंद्र के रूप में अमीरात की प्रतिष्ठा का इम्तिहान भी है। भले ही इससे भौतिक नुकसान बहुत ज्यादा न हुआ हो, लेकिन वैश्विक निवेशकों पर मनोवैज्ञानिक प्रभाव तो पड़ा ही है।’
दुबई में लेनदेन की मात्रा 270,000 सौदों को पार कर गई है, जो बाजार में तरलता और निवेशकों की मजबूत भागीदारी को दर्शाती है। खास यह कि आवासीय यूनिट के सौदे सबसे ज्यादा हुए हैं। वर्ष के दौरान लगभग 538 अरब दिरहम मूल्य के लगभग 200,000 आवासीय लेनदेन दर्ज किए गए। वर्ष 2021 से दुबई में आवासीय संपत्ति की कीमतों में लगभग 60-75 प्रतिशत की वृद्धि हुई है, जिससे यह महामारी के बाद की अवधि में विश्व स्तर पर सबसे मजबूत आवास बाजार में से एक बन गया है।
एल्केमिस्ट ब्रांड कंसल्टिंग के संस्थापक और प्रबंध भागीदार समित सिन्हा कहते हैं, ‘पश्चिम एशिया क्षेत्र में व्यापक रूप से फैले संघर्ष से दुबई को भी अलग नहीं किया जा सकता। वैसे इससे दुबई की छवि को नुकसान नहीं होगा, क्योंकि इसके लिए बहुत कुछ चल रहा है। यूरोप और दक्षिण अमेरिका के कुछ हिस्सों में भी उथल-पुथल है। एक बार जब पश्चिम एशिया में चीजें सामान्य हो जाएंगी, तो दुबई का बाजार दोबारा उछाल मारेगा।’
एक्सपीरियंस रियल्टी में उपाध्यक्ष (संपत्ति प्रबंधन) ममतु मीरचंदानी ने कहा कि मौजूदा स्थिति के कारण कुछ निवेशक एक पल के लिए रुक सकते हैं, लेकिन दुबई का ट्रैक रिकॉर्ड खुद ही बोलता है। यहां ठहराव बहुत अधिक नहीं ठहर सकता। यहां मजबूत रक्षा प्रणाली और क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस व्यवस्था है।
उन्होंने कहा, ‘भू-राजनीतिक तनाव दुख की बात है। दुनिया भर में इस समय दर्जनों जगहों पर संघर्ष चल रहे हैं, लेकिन यूएई ने वास्तव में मजबूत रक्षा क्षमता और इस प्रकार की क्षेत्रीय चुनौतियों से निपटने के लिए ठोस प्रणाली के साथ अपनी गति जारी रखी है।’
मीरचंदानी कहते हैं, ‘रियल एस्टेट के जानकार जानते हैं कि जनसंख्या वृद्धि, दुनिया भर से आने वाला सारा पैसा और किराए की लगातार मांग जैसी चीजों के कारण रियल एस्टेट बाजार बहुत दिन शांत नहीं रह सकता। यह इससे पहले भी देखा गया है जब 2020 की महामारी और पश्चिमी एशिया में अन्य कठिन परिस्थितियों के बाद बाजार ने जोरदार वापसी की। इससे साबित होता है कि दुबई में जो कुछ भी फिलहाल चल रहा है, वह बहुत दिन इस गतिशील वित्तीय केंद्र को रोक नहीं पाएगा। इसमें बराबर निवेशकों को आकर्षित करने की क्षमता है।’