कनाडा के प्रधानमंत्री मार्क कार्नी ने भारत के साथ 1.9 अरब डॉलर के यूरेनियम समझौते की आज घोषणा की। कनाडा की कंपनी कैमेको ने भारत में वर्ष 2027 से 2035 तक परमाणु ऊर्जा उत्पादन के लिए 2.2 करोड़ पौंड यूरेनियम की आपूर्ति के समझौते पर हस्ताक्षर किया। अभी कार्नी भारत की अपनी पहली आधिकारिक यात्रा पर हैं।
भारत ने निजी क्षेत्र के लिए दो महीने पहले परमाणु ऊर्जा खोली और निजी निवेश को आकर्षित करने के लिए दायित्व नियमों को कम किया है। इसके दो महीने बाद यह समझौता हुआ है। यह समझौता यूरेनियम के अलावा अक्षय ऊर्जा, जैव ईंधन, हाइड्रो पावर, हाइड्रोजन, तरलीकृत प्राकृतिक गैस और तरलीकृत पेट्रोलियम गैस को कवर करने वाली बड़ी रणनीतिक ऊर्जा साझेदारी का हिस्सा है।
साझेदारी के तहत महत्त्वपूर्ण खनिजों और ऊर्जा स्रोतों पर सहयोग बढ़ाने, तकनीकी और वाणिज्यिक जुड़ाव का समर्थन करने और आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने के लिए दो समझौतों पर हस्ताक्षर किए गए हैं। दोनों पक्षों ने कुल मिलाकर 5.5 अरब कनाडाई डॉलर से अधिक के दस वाणिज्यिक समझौतों पर हस्ताक्षर किए हैं। कनाडा की सरकार ने अंतरराष्ट्रीय सौर गठबंधन (आईएसए) में शामिल होने का भी फैसला किया है और ग्लोबल बायोफ्यूल एलायंस (जीबीए) में पूर्ण सदस्यता की स्थिति में अपग्रेड कर रही है। कनाडा भारत के साथ अपना पहला दीर्घकालिक एलपीजी समझौता भी करेगा।
दोनों देश इस साल नए व्यापक आर्थिक भागीदारी समझौते (सीईपीए) को अंतिम रूप देंगे। लिहाजा भारत में मुख्य वार्ताकारों की बैठक होगी और संदर्भ शर्तों को अंतिम रूप दिया जाएगा व हस्ताक्षर किए जाएंगे। सीईपीए से 2030 तक द्विपक्षीय व्यापार दोगुना होकर 51 अरब डॉलर होने की संभावना है।वर्ष 2024 में भारत में कुल प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष कनाडाई निवेश 80 अरब डॉलर से अधिक हो गया।
कनाडा के प्रधानमंत्री कार्नी की यात्रा के दौरान दोनों देशों ने महत्त्वपूर्ण खनिजों, टेक्नालजी और आर्टिफिशल इंटेलिजेंस, रक्षा व प्रतिभा और संस्कृति सहित विभिन्न क्षेत्रों में कई अन्य पहलों की घोषणा की। भारत का लक्ष्य 2047 तक परमाणु ऊर्जा क्षमता को वर्तमान 8.8 गीगावाट से बढ़ाकर 100 गीगावाट करना है। भारत और कनाडा ने 2010 में परमाणु समझौते पर हस्ताक्षर किए थे। इससे वर्ष 2015 में कैमेको के साथ यूरेनियम आपूर्ति समझौते का मार्ग प्रशस्त हुआ था।