प्रतीकात्मक तस्वीर
भारतीय रिजर्व बैंक अगले वित्त वर्ष में पॉलिमर के बैंक नोट शुरू करने की योजना बना रहा है। केंद्रीय बैंक के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने मौद्रिक नीति जारी करने के बाद आज संवाददाता सम्मेलन में बताया कि इन नोटों का परिचालन लोगों के बीच सफल परीक्षण और संचालन के आकलन पर निर्भर करेगा।
केंद्रीय बैंक ने पॉलिमर की शीटें खरीदने के लिए टेंडर प्रक्रिया शुरू कर दी है। दरअसल, इन शीट पर ही नोट छापे जाते हैं। बैंक इन्हें बड़े स्तर पर चलाने से पहले भारत के मौसम और इस्तेमाल की स्थितियों पर परीक्षण करेगा। मल्होत्रा ने कहा, ‘हम अभी पायलट स्तर पर हैं। हम परीक्षण करेंगे और देखेंगे कि भारतीय स्थितियों, मौसम और हमारे आधारभूत ढांचे में पॉलिमर नोट कैसे काम करते हैं। फिर हम देखेंगे कि क्या हमें इन्हें इसी तरह या कुछ बदलावों के साथ चलाना है।’
उन्होंने कहा, ‘हमारा लक्ष्य है कि अगर सब कुछ योजना के अनुसार रहा तो अगले वित्त वर्ष की शुरुआत में ये चलन में आ जाएं।’ गवर्नर ने कहा कि पॉलिमर नोट दो मुख्य उद्देश्य के साथ लाए जा रहे हैं। पहला, कागज की मुद्रा की तुलना में इनकी उम्र बहुत ज्यादा होती है। लिहाजा ये कम कीमत वाले नोटों के लिए सटीक हैं क्योंकि इनका इस्तेमाल ज्यादा होता है और वे जल्दी खराब हो जाते हैं। कई देशों में 30 से ज्यादा वर्षों से पॉलिमर नोट चलन में हैं। आमतौर पर ये कागज की मुद्रा की तुलना में तीन से चार गुना ज्यादा समय तक चलते हैं।
दूसरा, पॉलिमर नोट लाने से रिजर्व बैंक की मुद्रा छापने की क्षमता बढ़ेगी। वैसे भी अर्थव्यवस्था में नकदी की जरूरतें बढ़ रही हैं। उन्होंने कहा, ‘जैसे-जैसे अर्थव्यवस्था की जरूरतें बढ़ेंगी, इनसे हमारी क्षमता भी बढ़ेगी। हम परीक्षण करेंगे और देखेंगे कि पॉलिमर के नोट भारत के मौसम और स्थितियों में कैसा काम करते है। फिर देखेंगे कि क्या हमें इन्हें इसी तरह या कुछ बदलावों के साथ चलाना है।’
सरकार ने पिछले महीने 10 और 20 रुपये के पॉलिमर नोट चलाने के रिजर्व बैंक के प्रस्ताव को मंजूरी दी थी। वित्त राज्य मंत्री पंकज चौधरी ने लोक सभा में लिखित जवाब में कहा था कि रिजर्व बैंक ने लोगों के बीच परीक्षण के लिए 10 और 20 रुपये के एक-एक अरब पॉलिमर नोट जारी करने का प्रस्ताव दिया था। परीक्षण सफल होने के बाद इन नोटों को नियमित रूप से जारी किया जाएगा।
सरकार ने स्पष्ट किया है कि कागज के नोटों को पूरी तरह बदलने का कोई प्रस्ताव नहीं है। सफल प्रायोगिक परीक्षण के बाद अगर पॉलिमर नोट लाए जाते हैं तो वे मौजूदा नोटों के साथ-साथ चलन में रहेंगे। मल्होत्रा ने बताया कि पॉलिमर नोटों को जारी करने से पहले कई चरणों में परीक्षण होगा। इसमें सिक्योरिटी क्लीयरेंस भी शामिल है। सिक्योरिटी फीचर की जानकारी सही समय पर दी जाएगी।
रिजर्व बैंक का कहना है कि पॉलिमर नोटों में आधुनिक सिक्योरिटी फ़ीचर शामिल किए जा सकते हैं, जैसे नकली नोटों को रोकने वाले बेहतर फीचर। रिजर्व बैंक की वित्त वर्ष 26 की सालाना रिपोर्ट के मुताबिक नोटोंकी प्रिंटिंग पर खर्च 2025-26 में घटकर 4,875.2 करोड़ रुपये रह गया, जो एक साल पहले 6,372.8 करोड़ रुपये था। आस्ट्रेलिया, ब्रिटेन और वियतनाम समेत लगभग 60 देशों ने पूरी तरह या आंशिक रूप से पॉलिमर नोट चला रखे हैं।