भारत वर्ष 1990-91 के खाड़ी युद्ध के बाद अपनी ऊर्जा सुरक्षा की राह में सबसे कठिन चुनौती का सामना कर रहा है। पश्चिम एशिया सहित दुनिया में भारी उथल-पुथल के बीच प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पिछले दो दिनों में खाड़ी सहयोग परिषद (जीसीसी) के छह देशों में से पांच के शासकों और जॉर्डन के राजा अब्दुल्ला द्वितीय से बात और उन्हें ईद की शुभकामनाएं दी हैं। शुक्रवार शाम को प्रधानमंत्री ने बहरीन के राजा हमाद बिन ईसा अल खलीफा से भी बात की और उन्हें और बहरीन के लोगों को ईद अल-फितर की हार्दिक शुभकामनाएं दीं। दोनों नेताओं ने पश्चिम एशिया की स्थिति पर चर्चा की।
जीसीसी देशों के नेताओं के साथ अपनी बातचीत में प्रधानमंत्री ने ईद की शुभकामनाएं दीं, क्षेत्र की ऊर्जा और नागरिक अवसंरचना पर हुए हमलों की निंदा की और भारत की ऊर्जा सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्त्वपूर्ण जलमार्ग होर्मुज स्ट्रेट से सुरक्षित और निर्बाध आवागमन की आवश्यकता पर बल दिया। बहरीन के राजा से बातचीत में मोदी ने कहा कि इन हमलों का ‘वैश्विक खाद्य, ईंधन और उर्वरक सुरक्षा पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।’ भारत ने एलपीजी, एलएनजी और उर्वरक की अपनी आवश्यकताओं के लिए कई देशों से संपर्क किया है।
बहरीन के शासक के अलावा, प्रधानमंत्री ने बुधवार से कतर, ओमान, कुवैत और संयुक्त अरब अमीरात के शासकों से भी बात की है। हालांकि, बहरीन के राजा के साथ बातचीत में खाद्य सुरक्षा और उर्वरकों का जिक्र पहली बार हुआ। सूत्रों के अनुसार वे सऊदी अरब के नेतृत्व से भी मुलाकात करेंगे। खाड़ी देशों के अलावा प्रधानमंत्री ने जॉर्डन के राजा और मलेशिया के प्रधानमंत्री अनवर इब्राहिम से भी बातचीत की। भारत जॉर्डन, रूस और कुछ अन्य देशों से उर्वरक आयात करता है। सूत्रों के अनुसार ईरानी नेतृत्व से संवाद करना मुश्किल है क्योंकि वे पकड़े जाने के डर से सतर्क हैं।
भारत अपनी ऊर्जा सुरक्षा के लिए जीसीसी देशों पर बहुत अधिक निर्भर है। भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के आंकड़ों के अनुसार लगभग एक करोड़ भारतीय वहां रहते और काम करते हैं और उन्होंने 2023-24 में देश को प्राप्त कुल प्रेषण में 38 प्रतिशत तक का योगदान दिया। जीसीसी भारत का सबसे बड़ा व्यापारिक समूह भी है।
एक अधिकारी ने बताया,‘ईद एक महत्त्वपूर्ण त्योहार है और समृद्धि का प्रतीक है। यह क्षेत्र देश की अर्थव्यवस्था और लाखों परिवारों के घरेलू बजट में महत्वपूर्ण योगदान देता है।’
अधिकारियों का कहना है कि भारत के प्रधानमंत्री के रूप में अपने कार्यकाल के दौरान मोदी ने जीसीसी देशों के साथ नई दिल्ली के राजनीतिक संबंधों को अपने सदियों पुराने मजबूत जन-संबंधों के अनुरूप बनाने का प्रयास किया है। प्रधानमंत्री मई 2014 से खाड़ी देशों का 15 बार दौरा कर चुके हैं। मोदी इस अवधि में 7 बार यूएई, 3 बार सऊदी अरब और 2 बार कतर की यात्रा कर चुके हैं। वह ओमान, कुवैत और बहरीन इन तीनों ही देश की एक-एक बार आधिकारिक यात्रा भी की है। जीसीसी देशों के अलावा दिसंबर 2025 में मोदी की जॉर्डन यात्रा 37 वर्षों में किसी भारतीय प्रधानमंत्री की पहली यात्रा थी। यूएई के राष्ट्रपति शेख मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान ने जनवरी में भारत का दौरा किया था।
अधिकारियों ने बताया कि भारत ने खाड़ी देशों में से प्रत्येक के साथ सुरक्षा और रक्षा सहयोग को संस्थागत रूप दिया है जिससे भारत को अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पाकिस्तान का मुकाबला करने में मदद मिली है, खासकर उस देश से उत्पन्न आतंकवाद के मुद्दे पर। मोदी ने अरब नेताओं की भावी पीढ़ी के साथ घनिष्ठ संबंध बनाने के प्रयास भी किए हैं।
प्रधानमंत्री ने दिल्ली में अबू धाबी और दुबई के युवराजों शेख खालिद बिन मोहम्मद बिन जायद अल नाहयान और शेख हमदान बिन मोहम्मद अल मकतूम की मेजबानी की है। जीसीसी देशों की अपनी यात्राओं के दौरान मोदी ने ओमान और कुवैत के युवराजों से बातचीत की है। अबू धाबी के युवराज को सितंबर 2024 में भारत की अपनी पहली यात्रा पर राष्ट्राध्यक्ष को मिलने वाला सम्मान दिया गया था। जिन समझौतों पर हस्ताक्षर हुए उनमें एक यह था कि यूएई 15 वर्षों में भारत को दस लाख टन एलएनजी की आपूर्ति करने के लिए प्रतिबद्ध है। दिसंबर 2025 में मोदी की जॉर्डन यात्रा के दौरान जॉर्डन के युवराज उन्हें स्वयं संग्रहालय ले गए थे।
पश्चिम एशिया में संघर्ष शुरू होने के बाद से, नई दिल्ली ने ईरान से संपर्क साधने की कोशिश की है, हालांकि विपक्ष खासकर कांग्रेस और वामपंथी दलों ने इजरायल-अमेरिका के हमले में ईरान के सर्वोच्च नेता अयातुल्ला अली खामेनेई की हत्या पर भारतीय सरकार की विलंबित प्रतिक्रिया की आलोचना की है। विदेश सचिव विक्रम मिसरी ने सरकार की ओर से शोक संवेदना व्यक्त करने के लिए 5 मार्च को नई दिल्ली स्थित ईरानी दूतावास का दौरा किया।
हालांकि, विदेश मंत्री एस जयशंकर 28 फरवरी से अब तक अपने ईरानी समकक्ष अब्बास अरागची से चार बार फोन पर बातचीत की है। मोदी ने 12 मार्च को ईरानी राष्ट्रपति मसूद पेज़ेश्कियान से फोन पर बातचीत की जिसमें उन्होंने राष्ट्रपति से ‘माल और ऊर्जा के निर्बाध पारगमन’ की अनुमति देने का आग्रह किया।
अब तक ईरान ने भारतीय ध्वज वाले दो एलपीजी टैंकरों को होर्मुज जलडमरूमध्य से निकलने की अनुमति दी है। भारत को उम्मीद है कि वह भारत के 22 अन्य व्यापारिक जहाजों को भी पारगमन की अनुमति देगा जिनमें छह एलपीजी, एक एलएनजी और चार कच्चे तेल के टैंकर शामिल हैं। पिछले दो हफ्तों में भारत ने 183 चालक दल वाले एक ईरानी नौसैनिक जहाज को कोच्चि बंदरगाह पर लंगर डालने की अनुमति दी और संभवतः उसे अमेरिकी नौसैनिक हमले से बचाया। अमेरिकी नौसेना ने एक अन्य ईरानी युद्धपोत पर हमला किया जिसमें 80 से अधिक नाविक मारे गए। कोच्चि बंदरगाह पर मौजूद ईरानी नाविक तब से घर लौट चुके हैं। हालांकि जैसा जयशंकर ने कहा है भारतीय ध्वज वाले जहाजों के आवागमन के लिए तेहरान और नई दिल्ली के बीच अभी तक कोई ‘व्यापक समझौता’ नहीं हुआ है।
भारतीय जनता पार्टी के नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी, जिन्होंने खामेनेई की मौत पर शोक व्यक्त करने के लिए 9 मार्च को नई दिल्ली में ईरानी दूतावास का दौरा किया था, ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि उन्हें ईरानी पक्ष से सहयोग की उम्मीद है।
नकवी ने कहा, ‘हमने 45 मिनट तक बात की और मौजूदा संघर्ष पर चर्चा की। मैंने भारत का पक्ष रखा। ईरान की ओर से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली।’
पूर्व केंद्रीय मंत्री ने बताया कि उन्होंने ईरानी राजदूत को कोविड महामारी के दौरान भारत द्वारा कई देशों को दी गई सहायता के बारे में बताया जिसमें टीके भेजना और पड़ोसी देशों के नागरिकों को निकालना शामिल है और यही भारत का दृष्टिकोण है। हालांकि, ईरान चाहता है कि ब्रिक्स समूह के अध्यक्ष के रूप में भारत उसके क्षेत्र पर अमेरिका-इजरायल के हमले की निंदा करे। ईरानी विदेश मंत्री ने 12 मार्च को हुई बातचीत के दौरान जयशंकर के सामने यह मुद्दा उठाया था। नई दिल्ली के सूत्रों ने बताया कि ब्रिक्स समूह ऐसे प्रस्तावों को सर्वसम्मति से पारित करता है मगर यूएई और सऊदी अरब (जो ईरान की तरह ही समूह के सदस्य हैं) इस बात से सहमत नहीं हैं।