20 मार्च को अंतरराष्ट्रीय खुशहाली दिवस है और यह इस बात की ताकीद कराता है कि केवल आर्थिक विकास ही किसी देश के कल्याण को तय नहीं करता है। गुरुवार को जारी 14वीं वर्ल्ड हैप्पीनेस रिपोर्ट में फिनलैंड को लगातार नौवें साल दुनिया का सबसे खुशहाल देश घोषित किया गया। फिनलैंड को इसके मानदंड के पैमाने पर 10 में से 7.764 अंक मिले। इसके बाद आइसलैंड और डेनमार्क का स्थान रहा। भारत 147 देशों में से 116वें स्थान पर रहा, जिसका औसत स्कोर 4.536 रहा।
खुशहाली मापने वाले कुल छह संकेतकों में से चार में भारत ने 1 अंक से भी कम स्कोर किया। इन संकेतकों में सामाजिक समर्थन, स्वस्थ जीवन प्रत्याशा, उदारता और भ्रष्टाचार की धारणा शामिल है। हालांकि 2024 की तुलना में 2025 में उसकी स्थिति थोड़ी सुधरी है। वर्ष 2024 में भारत 118वें स्थान पर था जबकि 2025 की नवीतम रिपोर्ट में भारत की रैंकिंग सुधरी है।
साल 2019 और 2025 के बीच प्रति व्यक्ति सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में सुधार के बावजूद, भारत की स्वस्थ जीवन प्रत्याशा और उदारता में गिरावट आई है। साल 2011 और 2025 के बीच भारत के खुशहाली स्कोर में 0.44 फीसदी की कमी आई। भारत के पड़ोसियों में चीन ने खुशहाली स्कोर में सबसे तेज वृद्धि दर्ज की जबकि अफगानिस्तान में सबसे ज्यादा गिरावट देखी गई। शीर्ष तीन सबसे खुशहाल देशों में डेनमार्क अकेला ऐसा देश है जहां खुशहाली स्कोर में गिरावट आई है।