रेजरपे ने ओपनएआई के साथ साझेदारी की है। इसके तहत डेवलपर कुछ ही मिनटों में अपने ऐप में सीधे भुगतान तंत्र को जोड़ सकेंगे। इसका मकसद आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) से बने उत्पादों से कमाई को आसान बनाना है। रेजरपे ने यह जानकारी दी।
इस साझेदारी के तहत ओपनएआई के कोडिंग प्लेटफॉर्म कोडेक्स का इस्तेमाल करने वाले डेवलपर रेजरपे को एजेंट के भीतर जोड़कर तुरंत भुगतान लेना शुरू कर सकते हैं। इससे डेवलपर को भुगतान तंत्र को सेट करने में लगने वाले कई दिनों का समय बच जाएगा और वे कुछ ही मिनटों में अपने विचार को आय के साधन में बदल सकेंगे। भुगतान की यह सुविधा रेजरपे के एमसीपी सर्वर के साथ जोड़ी गई है।
रेजरपे के सह-संस्थापक और प्रबंध निदेशक शशांक कुमार ने कहा, ‘भारत ऐसे दौर में है जहां कोई भी व्यक्ति एआई की मदद से कुछ घंटों में प्रोडक्ट बना सकता है। लेकिन असली बदलाव तब आता है जब वह विचार तुरंत कारोबार बन सके। हमारा लक्ष्य सरल है। अगर एआई के जरिये कुछ बनाना आसान है तब रेजरपे को कमाना और आसान बनाना चाहिए। कोडेक्स में रेजरपे को जोड़कर हम यह सुनिश्चित कर रहे हैं कि जैसे ही डेवलपर कुछ उपयोगी चीजें बनाते हैं तो वह तुरंत उससे कमाई शुरू कर सकें। आने वाले वक्त में स्टार्टअप फंडिंग या इन्फ्रास्ट्रक्चर से नहीं बल्कि एक ‘प्रॉम्प्ट’ से शुरू होंगी और जब वह प्रॉम्प्ट उत्पाद बनेगा, तब रेजरपे उसके लेन-देन का प्रबंधन करने की ताकत देगा।’
इस एकीकरण की मदद से डेवलपर अपने आइडिया को कुछ ही मिनटों में कमाई उत्पाद में बदल सकते हैं वह भी बिना भुगतान सेटअप में समय गंवाए। भारत में हर महीने 20 अरब से ज्यादा यूपीआई लेनदेन होते हैं और यहां डेवलपरों की संख्या भी बहुत बड़ी है। ऐसे में यह पहल एआई आधारित ऐप को पहले दिन से ही कमाई में मदद करेगी।