देश के निजी क्षेत्र के सबसे बड़े एचडीएफसी बैंक में बुधवार को भारी उथल-पुथल मचने के बाद हालात अब संभलते दिख रहे हैं। बुधवार देर शाम इसके अंशकालिक अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती का अचानक इस्तीफा आने के बाद बैंक के सामने गंभीर संकट खड़ा हो गया। हालांकि, गुरुवार दोपहर तक भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की तरफ से यह स्पष्ट कर दिया गया कि एचडीएफसी बैंक में संचालन या व्यवहार से जुड़ी कोई समस्या नहीं है।
पूर्व ब्यूरोक्रेट चक्रवर्ती ने पिछले दो वर्षों में बैंक के भीतर हुए कुछ घटनाक्रम एवं व्यवहारों का हवाला देते हुए तत्काल प्रभाव से इस्तीफा दे दिया। चक्रवर्ती ने कहा कि ये घटनाक्रम एवं व्यवहार उनके व्यक्तिगत ‘मूल्यों और नैतिकता’ के अनुरूप नहीं थे। आरबीआई ने एक बयान में कहा,‘हमारे आवधिक मूल्यांकन के आधार पर बैंक के व्यवहार या संचालन से जुड़ी चिंता की कोई बात सामने नहीं आई है।’
आरबीआई ने कहा कि एचडीएफसी बैंक घरेलू स्तर पर महत्त्वपूर्ण बैंक (डी-एसआईबी) है जिसकी वित्तीय स्थिति सुदृढ़ है और इसका निदेशक मंडल पेशेवर रूप से संचालित है। आरबीआई ने कहा कि बैंक की प्रबंधन टीम भी सक्षम है। आरबीआई ने यह भी कहा कि वह आगे की रणनीति पर बोर्ड और प्रबंधन के साथ बातचीत जारी रखेगा। एचडीएफसी बैंक का बाजार पूंजीकरण रिलायंस इंडस्ट्रीज के बाद दूसरे स्थान पर है।
चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद एचडीएफसी बैंक के चार बोर्ड सदस्यों ने दो डिप्टी गवर्नरों सहित आरबीआई अधिकारियों से मुलाकात की और अपने बोर्ड सदस्य केकी मिस्त्री को अंतरिम अंशकालिक अध्यक्ष नियुक्त करने का अनुरोध किया। आरबीआई ने तत्काल इसकी मंजूरी दे दी।
शेयर बाजार खुलने से पहले ही एचडीएफसी बैंक ने अपने 12 मौजूदा बोर्ड सदस्यों में से 6 (जिनमें मिस्त्री और प्रबंध निदेशक एवं सीईओ शशिधर जगदीशन शामिल थे) के साथ एक निवेशक सम्मेलन आयोजित करके संकट से निपटने के प्रयास शुरू कर दिए।
केकी मिस्त्री ने विश्लेषकों से कहा, ‘अगर यह मेरे सिद्धांतों और बैंक से अपेक्षित मेरी ईमानदारी के स्तर के अनुरूप नहीं होता तो मैं 71 वर्ष की आयु में यह जिम्मेदारी नहीं लेता।’
उन्होंने स्पष्ट रूप से कहा कि बैंक में कोई बड़ी समस्या या संचालन संबंधी चिंता नहीं हैं और बैंक के किसी भी बोर्ड सदस्य को उस मुद्दे की जानकारी नहीं है जिसके कारण चक्रवर्ती ने इस्तीफा दिया है। मिस्त्री ने कहा कि मामूली मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं लेकिन उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि बैंक में कोई सत्ता संघर्ष नहीं है। जगदीशन ने कहा कि बोर्ड ने चक्रवर्ती को अपना फैसला वापस लेने के लिए मनाने की कोशिश की।
मीडिया से बातचीत के दौरान जगदीशन ने कहा,‘बैठक के दौरान ये घटनाक्रम सामने आ रहे थे जहां बोर्ड के हर सदस्य ने पूर्व अंशकालिक अध्यक्ष को अपना इस्तीफा वापस लेने या उनकी चिंता विस्तार से बताने का अनुरोध किया था।’
एचडीएफसी बैंक का शेयर पिछले बंद भाव से लगभग 5 प्रतिशत नीचे खुला और दिन में कारोबार के दौरान कुछ हद तक संभल गया क्योंकि यह स्पष्ट हो गया कि अंशकालिक अध्यक्ष का फैसला संचालन व्यवस्था के मुद्दे से जुड़ा नहीं था। हालांकि, कारोबार समाप्त होने पर शेयर 5.13 प्रतिशत नीचे बंद हुआ। इससे निवेशकों को 66,433 करोड़ रुपये की चपत लग गई।
बैंक के सूत्रों ने बताया कि बैंक प्रबंधन और पूर्व अध्यक्ष के बीच कुछ समस्याएं थीं जिनके कारण पूर्व अध्यक्ष ने अचानक पद छोड़ दिया।
एक सूत्र ने बताया,‘बुधवार को जब बैंक की बोर्ड बैठक चल रही थी तब कई निदेशकों ने उनसे पूछा कि क्या कोई संचालन संबंधी समस्या है तो उन्होंने कहा कि ऐसी कोई समस्या नहीं है।’
विश्लेषकों का कहना है कि एचडीएफसी के साथ विलय के बाद एचडीएफसी बैंक में वरिष्ठ अधिकारियों के इस्तीफे आने लगे हैं।
ब्रोकिंग फर्म एमके ने कहा,‘एचडीएफसी लिमिटेड के विलय के बाद एचडीएफसी बैंक में अधिकारियों के इस्तीफे में तेजी आई है। इससे नेतृत्व में स्पष्टता और विश्वास की कमी दिखाई दे रही है। प्रबंधन के साथ संबंधों संबंधी समस्याओं के कारण अध्यक्ष अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे से अब बोर्ड में भी चिंता बढ़ गई हैं।’