एचडीएफसी बैंक में विलय से पहले कई वर्षों तक मॉर्गेज लेंडर एचडीएफसी लिमिटेड की अगुआई करने वाले 71 वर्षीय केकी मिस्त्री अब अंतरिम चेयरमैन के रूप में बैंक की बागडोर संभाल रहे हैं और उन्हें बैंक को मौजूदा विवाद से उबारने का जिम्मा सौंपा गया है। यह घटनाक्रम पूर्व अंशकालिक चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती के इस्तीफे के बाद सामने आया है। चक्रवर्ती ने उन चिंताओं का हवाला देते हुए पद छोड़ दिया, जिनके बारे में उनका कहना था कि वे उनके मूल्यों और नैतिकता के अनुरूप नहीं थीं, जिससे बैंक में गवर्नेंस संबंधी सवाल उठने लगे हैं।
मिस्त्री ने गुरुवार को कहा, अगर यह जिम्मेदारी मेरे सिद्धांतों और बैंक से अपेक्षित मेरी ईमानदारी के स्तर के अनुरूप नहीं होती तो मैं 71 वर्ष की आयु में इसे स्वीकार नहीं करता। उन्होंने कहा कि वे आदर्श रूप से नियामक की सहमति से बैंक द्वारा नियुक्त तीन महीनों से अधिक समय तक इस पद पर नहीं बने रहना चाहेंगे और इन तीन महीनों में हालात स्थिर करने के लिए अपने सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेंगे।
मिस्त्री ने कहा, जहां तक मेरा सवाल है, मेरी भूमिका तीन महीने की है। मैं हालात को यथासंभव स्थिर करना चाहूंगा। तीन महीने के अंत में क्या मैं इस पद पर बने रहना चाहूंगा? मेरी समझ में नहीं। बुधवार देर रात बैंक ने बताया कि आरबीआई की मंजूरी से मिस्त्री को 19 मार्च से तीन महीने के लिए अंतरिम अंशकालिक चेयरमैन नियुक्त किया गया है।
अपनी नियुक्ति के कुछ घंटों बाद ही मिस्त्री ने हितधारकों की चिंताओं को दूर करने के लिए तेजी से कदम उठाए और गुरुवार की सुबह विश्लेषकों से बात की। उन्होंने कहा, बोर्ड की ओर से और कार्यकारी नेतृत्व के साथ पूर्ण सहमति में मैं सभी हितधारकों को आश्वस्त करना चाहता हूं कि इस समय कोई गंभीर मामला नहीं है। हमारी चर्चाओं के आधार पर कोई विशिष्ट घटना या कार्यप्रणाली हमारे संज्ञान में नहीं आई है।
मिस्त्री ने कहा, बोर्ड संस्थागत मजबूती और विश्वास सूचकांक की रक्षा के लिए पूरी तरह से प्रतिबद्ध है। बैंक मजबूत संचालन मानकों, सुदृढ़ आंतरिक नियंत्रणों और अत्यंत अनुभवी प्रबंधन टीम के साथ काम करता है। हमारी रणनीतिक दिशा व्यावसायिक प्राथमिकताएं और निष्पादन क्षमताएं हमेशा की तरह बनी हुई हैं।
मिस्त्री ने यह भी स्पष्ट किया कि प्रबंधन और चक्रवर्ती के बीच मामूली मुद्दों पर मतभेद हो सकते हैं, लेकिन ऐसी कोई गंभीर बात नहीं थी। उन्होंने कहा, बोर्ड की किसी भी बैठक में किसी भी तरह के पूर्ण मतभेद या इस तरह की कोई बात नहीं हुई। व्यक्तियों के बीच कुछ न कुछ आपसी मतभेद तो होते ही रहते हैं। ऐसी बातें होती रहती हैं। बैंक में कोई सत्ता संघर्ष नहीं था।
मिस्त्री वित्तीय सेवा क्षेत्र के अनुभवी व्यक्ति हैं, जिन्हें बैंकिंग, आवास वित्त और पूंजी बाजार आदि में चार दशकों से अधिक का अनुभव है। चार्टर्ड अकाउंटेंट और इंस्टिट्यूट ऑफ चार्टर्ड अकाउंटेंट्स ऑफ इंडिया के फेलो रहे मिस्त्री ने 1975 में एएफ फर्ग्यूसन ऐंड कंपनी से अपने करियर की शुरुआत की, जिसके बाद उन्होंने हिंदुस्तान यूनिलीवर और इंडियन होटल्स कंपनी में भी काम किया।
वह 1981 में हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनैंस कॉरपोरेशन (एचडीएफसी) से जुड़े और धीरे-धीरे पदोन्नति पाते हुए कई महत्त्वपूर्ण पदों तक पहुंचे। 2000 में वे प्रबंध निदेशक बने और बाद में उपाध्यक्ष एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी का पदभार संभाला। अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने एचडीएफसी समूह के विस्तार और एचडीएफसी बैंक, एचडीएफसी लाइफ और एचडीएफसी अर्गो सहित प्रमुख वित्तीय सेवा कारोबारों को खड़ा करने का काम किया।
जुलाई 2023 में एचडीएफसी लिमिटेड के एचडीएफसी बैंक में विलय के बाद उन्होंने कार्यकारी जिम्मेदारियों से सेवानिवृत्त होकर बैंक के बोर्ड में गैर-कार्यकारी निदेशक के रूप में पदभार ग्रहण किया। मिस्त्री एचडीएफसी लाइफ इंश्योरेंस, एचडीएफसी अर्गो जनरल इंश्योरेंस, टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज, एचडीएफसी कैपिटल एडवाइजर्स, द ग्रेट ईस्टर्न शिपिंग कंपनी, केएटीबी कंसल्टेंट, ब्रुकप्रॉप मैनेजमेंट सर्विसेज और फ्लिपकार्ट प्राइवेट लिमिटेड, सिंगापुर के बोर्ड में भी निदेशक हैं।
वह पीडब्ल्यूसी इंडिया और ऐक्सिस म्युचुअल फंड के बोर्ड में रियल एस्टेट के संबंध में सलाहकार और साइरस पूनावाला ग्रुप के वित्तीय सेवा उपक्रमों के लिए रणनीतिक सलाहकार भी हैं।