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₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर फीस क्यों? समझें 6 साल बाद क्यों बदला नियम

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15 अक्टूबर से चुनिंदा व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से ज्यादा के UPI भुगतान पर 0.4% MDR लगेगा

Last Updated- September 16, 2026 | 4:29 PM IST
UPI Payments
Representative image

UPI Payment Charges: किसी दुकान या कारोबारी को UPI से 2,000 रुपये से ज्यादा का पेमेंट करने पर 15 अक्टूबर से फीस लगेगा। यह फीस 0.4 फीसदी की रेट से लिया जाएगा। इसे मर्चेंट डिस्काउंट रेट यानी MDR कहा जाता है।

हालांकि, यह पैसा ग्राहक से नहीं बल्कि पेमेंट लेने वाले व्यापारी से वसूला जाएगा। एक व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति को UPI के जरिए भेजे गए पैसे पर कोई फीस नहीं लगेगा।

इस फैसले के साथ जनवरी 2020 से लागू UPI पर जीरो MDR की व्यवस्था बदल जाएगी। सवाल है कि 6 साल तक फ्री रखने के बाद अब फीस लगाने की जरूरत क्यों पड़ी?

अब तक UPI का खर्च कौन उठा रहा था?

UPI लेनदेन ग्राहकों और व्यापारियों के लिए मुफ्त जरूर था, लेकिन इसे चलाने में खर्च पहले भी होता था। इस खर्च का बड़ा हिस्सा बैंक, भुगतान कंपनियां और सरकार उठा रहे थे।

सरकार UPI सर्विस देने वाली कंपनियों को बजट के जरिए प्रोत्साहन राशि देती थी। 6 साल पहले यह व्यवस्था इसलिए सही मानी गई थी, क्योंकि उस समय UPI तेजी से बढ़ने की शुरुआती अवस्था में था। सरकार का लक्ष्य ज्यादा से ज्यादा लोगों और दुकानदारों को डिजिटल भुगतान से जोड़ना था।

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अब UPI का साइज काफी बड़ा हो चुका है। अगस्त 2026 में इसके जरिए 2,451 करोड़ लेनदेन हुए, जिनकी कुल कीमत 29.9 लाख करोड़ रुपये थी। इतने बड़े पेमेंट नेटवर्क को 24 घंटे चालू रखने, उसकी क्षमता बढ़ाने, साइबर सुरक्षा मजबूत करने और धोखाधड़ी रोकने में काफी खर्च आता है।

UPI चलाने में कितना खर्च आता है?

भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम यानी NPCI ने उद्योग के अनुमानों के आधार पर बताया है कि UPI सिस्टम को चलाने में हर साल करीब 20,000 करोड़ रुपये खर्च होते हैं।

इसके मुकाबले सरकार ने वित्त वर्ष 2026-27 में UPI के लिए 2,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है। यानी सरकारी सहायता UPI की कुल अनुमानित लागत से काफी कम है।

इसी वजह से बढ़ते नेटवर्क का पूरा खर्च केवल बैंकों, भुगतान कंपनियों और सरकारी प्रोत्साहन के भरोसे उठाना मुश्किल माना जा रहा था। बड़े कारोबारी लेनदेन पर शुल्क लगाने के पीछे यही आर्थिक वजह बताई गई है।

क्या हर UPI भुगतान पर शुल्क लगेगा?

नहीं। नया फीस सभी UPI ट्रांजेक्शन पर लागू नहीं होगा। यह केवल चुनिंदा व्यापारियों को किए जाने वाले 2,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर लगेगा।

वित्त वर्ष 2025-26 में 2,000 रुपये से ज्यादा के व्यक्ति से व्यापारी को पेमेंट पर कुल कारोबारी UPI लेनदेन की संख्या का केवल करीब 4 फीसदी थे। हालांकि, UPI से किए गए कुल कारोबारी भुगतान की रकम में इनकी हिस्सेदारी करीब दो-तिहाई थी। इसका मतलब है कि नया नियम रोज होने वाले छोटे-मोटे UPI भुगतान के बजाय बड़ी रकम के कारोबारी लेनदेन पर केंद्रित है।

कितनी रकम पर कितना शुल्क लगेगा?

अगर किसी व्यापारी को UPI से 5,000 रुपये का भुगतान किया जाता है तो 0.4 फीसदी की दर से 20 रुपये का MDR बनेगा। इसी तरह 50,000 रुपये के भुगतान पर 200 रुपये और 75,000 रुपये के भुगतान पर 300 रुपये शुल्क लगेगा।

किसी एक लेनदेन पर अधिकतम शुल्क 300 रुपये रखा गया है। इसलिए 75,000 रुपये से ज्यादा के भुगतान पर भी एमडीआर 300 रुपये से अधिक नहीं होगा। ध्यान रहे कि यह शुल्क भुगतान करने वाले ग्राहक के बजाय पैसा लेने वाले व्यापारी को देना होगा।

रेलवे, ईंधन और निवेश पर कितना शुल्क?

कुछ जरूरी सेवाओं के लिए अलग और कम शुल्क तय किया गया है। रेलवे, दूरसंचार, ईंधन और बीमा के लिए 2,000 रुपये से ज्यादा के यूपीआई भुगतान पर केवल 5 रुपये का एकसमान शुल्क लगेगा। शेयर बाजार, म्यूचुअल फंड और दूसरे पूंजी बाजार से जुड़े भुगतान पर MDR की दर 0.02 फीसदी रखी गई है।

क्या छोटे दुकानदारों को भी देना होगा शुल्क?

छोटे व्यापारियों को इस शुल्क से बाहर रखा गया है। क्यूआर कोड के जरिए एक महीने में 1 लाख रुपये तक का यूपीआई भुगतान लेने वाले छोटे दुकानदारों पर एमडीआर नहीं लगेगा।

ग्रामीण और छोटे कस्बों में व्यापारियों को किए जाने वाले क्यूआर कोड भुगतान भी मुफ्त रहेंगे। इसका मतलब है कि रोजमर्रा के कम रकम वाले लेनदेन के लिए यूपीआई इस्तेमाल करने वाले छोटे दुकानदारों की व्यवस्था में कोई बड़ा बदलाव नहीं होगा।

क्या ग्राहक से वसूला जा सकता है पैसा?

NPCI के मुताबिक MDR का बोझ ग्राहक पर नहीं डाला जा सकता। यह फीस व्यापारी को देना है। हालांकि, इसका वास्तविक असर इस बात पर निर्भर करेगा कि व्यापारी इस खर्च को अपने मुनाफे में समाहित करता है या सामान और सेवाओं की कीमत में किसी तरह जोड़ता है।

सीधी भाषा में समझें तो सरकार ने UPI इस्तेमाल करने वाले आम लोगों पर सीधे फीस नहीं लगाया है। इसके बजाय बड़े कारोबारी भुगतान के जरिए UPI नेटवर्क को चलाने की लागत का कुछ हिस्सा जुटाने की व्यवस्था की गई है। छोटे भुगतान, व्यक्तियों के बीच पैसे का लेनदेन और योग्य छोटे व्यापारियों के QR पेमेंट पहले की तरह मुफ्त बने रहेंगे।

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First Published - September 16, 2026 | 4:22 PM IST

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