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मुआवजा उपकर बढ़ाने पर माथापच्ची

Last Updated- December 15, 2022 | 3:15 AM IST

अगले हफ्ते वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) परिषद की होने वाली बैठक में मुआवजा उपकर का दायरा बढ़ाने पर खास चर्चा होगी। बैठक में राजस्व की कमी का सामना कर रहे राज्यों के लिए एक वैकल्पिक ढांचा तैयार करने पर विचार होगा। जीएसटी परिषद उपकर अवधि अतिरिक्त 2-5 वर्षों के लिए बढ़ाने, उपकर मुआवजा के तहत अधिक वस्तु एवं सेवाएं शामिल करने, मौजूदा वस्तुओं पर उपकर बढ़ाने और राजस्व की भरपाई के लिए बाजार से उधार लेने के विकल्प पर भी चर्चा करेगी।
उपकर मुआवजा को लेकर विभिन्न पक्षों की राय अलग-अलग होने से जीएसटी परिषद की बैठक गहमागहमी भरी हो सकती है। केंद्र चाहता है कि राज्यों को राजस्व में कमी की भरपाई बाजार से उधार लेकर करनी चाहिए जबकि राज्यों का कहना है कि केंद्र या जीएसटी परिषद को उधार लेकर रकम का बंदोबस्त करना चाहिए। 27 अगस्त को होने वाली जीएसटी परिषद की 41वीं बैठक में केवल मुआवजा उपकर पर चर्चा होगी। सोने पर ई-वे बिल और जीएसटी रिटर्न में तकनीकी बदलावों पर परिषद की आगामी 19 सितंबर को होने वाली बैठक में चर्चा होगी। महाधिवक्ता के के वेणुगोपाल ने केंद्र से सिफारिश की है कि उपकर में कमी की भरपाई करने के लिए राज्यों उधार लेने की इजाजत दी जाए। हालांकि ज्यादातर राज्य इसका विरोध कर रहे हैं। उनका कहना है कि वित्तीय रूप से ऐसा करना तर्कसंगत नहीं होगा।
केंद्र ने राज्यों को वित्त वर्ष 2020 में राज्यों को जीएसटी में कमी की भरपाई के लिए 1.65 लाख करोड़ रुपये मुआवजा जारी किए हंै। केंद्र ने पिछले वर्ष की जमा रकम से नवंबर तक 1.15 लाख करोड़ रुपये जारी किए थे और इसके बाद वर्ष 2017-18 के लंबित एकीकृत जीएसटी बकाया से फरवरी तक तीन महीने की अवधि के लिए 36,000 करोड़ रुपये जारी किए थे। अपर्याप्त मुआवजा और उपकर संग्रह कमजोर रहने से हरेक दो महीने पर होने वाला भुगतान फिलहाल नहीं हो पा रहा है। कोविड-19 महामारी से स्थिति और भी खराब हो गई है।
राज्य जीएसटी मुआवजा अवधि निर्धारित 2022 के बाद भी अतिरिक्त 2-5 वर्षों के लिए बढ़ाए जाने की भी मांग करेंगे। उन सेवाओं एवं वस्तुओं को भी मुआवजा खंड में लाने पर भी चर्चा होगी जिन पर पहले 28 प्रतिशत कर लगता था। बिहार के उप-मुख्यमंत्री सुशील कुमार मोदी ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया कि राज्यों को उधारी लेने के लिए कहना तर्कसंगत नहीं होगा। उन्होंने कहा कि अंतत: राज्यों को उधार ली जाने वाली रकम की गारंटी देनी होगी जिससे उनका राजकोषीय घाटा 1.0-1.5 प्रतिशत अंक तक बढ़ जाएगा।

First Published - August 19, 2020 | 11:06 PM IST

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