वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शुक्रवार को आर्टिफिशल इंटेलिजेंस (एआई) के मजबूत सुरक्षा उपाय के साथ तेजी से बदलती तकनीक को त्वरित व निरंतर अपनाने का आह्वान किया। इससे तेजी से बदलती तकनीक को अपनाया जा सकेगा। सीतारमण ने कहा कि सुरक्षा उपायों के बिना ‘एआई के बेकाबू होने का सवाल पूरे समाज के सामने खड़ा हो जाएगा।’ उन्होंने इसे जोखिम का ऐसा वितरण बताया जो लंबे समय तक नहीं चलेगा।
उन्होंने यह टिप्पणी एआई उद्योग में फ्रंटियर एआई मॉडल के तेजी से विकास और इस्तेमाल को लेकर बढ़ रही चिंताओं के मद्देनजर आई है। दरअसल, विश्व की नामचीन एआई लैबोरेटरीज में से एक में शोधकर्ता ने अपने पद से त्यागपत्र दे दिया है। इस शोधकर्ता ने सार्वजनिक रूप से चेतावनी दी थी कि कमर्शियल फ्रंटियर लैब ‘स्वयं को बेहतर बनाने वाली सुपर-इंटेलिजेंस की ओर तेजी से आग बढ़ रही हैं और हमारी ज़िंदगी के साथ जुआ खेल रही हैं।’
सीतारमण ने ग्लोबल फिनटेक फेस्ट 2026 में अपने भाषण में कहा, ‘ऐसे में क्या उस चेतावनी की बारीकी से जांच करने की जरूरत है? या हम बस यह मान लें कि जोखिम को बढ़ा-चढ़ाकर बताया गया है? मैं यह बात घबराहट फैलाने के लिए नहीं बल्कि समूची मानव जाति के प्रति संस्थागत जवाबदेही पर जोर देने के लिए कह रही हूं।’
उन्होंने पूछा, ‘ वैश्विक एआई उद्योग से कौन आगे आएगा और जनता को भरोसा दिलाएगा? कौन दिखाएगा कि सुरक्षा उपाय वास्तव में तकनीक की रफ्तार के साथ चल रहे हैं? भरोसेमंद व पारदर्शी जवाब देने के लिए संगठित और सामूहिक प्रयास कहां है?’
सीतारमण ने कहा कि तकनीक से पैदा हुई खामियों को दूर करने के लिए भी तकनीक का इस्तेमाल किया जा सकता है लेकिन सुरक्षा उपायों को भी जोखिमों के साथ-साथ तेजी से विकसित होना चाहिए। उन्होंने कहा कि एआई ‘दोधारी तलवार’ है। इसमें धोखाधड़ी का पता लगाने की क्षमता है, लेकिन यह साथ ही हमलावरों को ‘बड़े और ज्यादा जटिल साइबर हमले’ ऑटोमेट करने की सुविधा भी देती है।
सीतारमण ने नियामकों, बोर्ड और वरिष्ठ प्रबंधन को चेतावनी दी कि वे एआई गवर्नेंस को पूरी तरह से तकनीक टीमों पर न छोड़ें। लिहाजा उन्हें यह समझना होगा कि एआई का इस्तेमाल कहां हो रहा है, एआई किन फैसलों पर असर डालती है, यह किस डेटा पर निर्भर करती है और अगर सिस्टम फेल हो जाए तो क्या गड़बड़ हो सकती है। उन्होंने कहा कि ज्यादा जोखिम वाले एप्लिकेशन को लागू करने से पहले और उनके पूरे लाइफसाइकल के दौरान ज्यादा बारीकी से जांचा परखा जाना चाहिए।
सीतारमण ने कहा कि एआई को नहीं अपनाने के भी अपने जोखिम हो सकते हैं। इस क्रम में जो संस्थान पूरी तरह से पुराने सिस्टम पर निर्भर रहते हैं, वे कमजोर पड़ सकते हैं। वे प्रतिस्पर्धात्मकता खो सकते हैं या आखिरकार खत्म हो सकते हैं।